Old Testament
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होशे 7:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे फिरते तो हैं, परन्तु परमप्रधान की ओर नहीं; वे धोखा देनेवाले धनुष के समान हैं; इसलिए उनके हाकिम अपनी क्रोधभरी बातों के कारण तलवार से मारे जाएँगे। मिस्र देश में उनको उपहास में उड़ाए जाने का यही कारण होगा।
होशे 7:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 7:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 78:57 (HINIRV) »
और मुड़कर अपने पुरखाओं के समान विश्वासघात किया; उन्होंने निकम्मे धनुष के समान धोखा दिया।

होशे 9:3 (HINIRV) »
वे यहोवा के देश में रहने न पाएँगे; परन्तु एप्रैम मिस्र में लौट जाएगा, और वे अश्शूर में अशुद्ध वस्तुएँ खाएँगे।

यहेजकेल 23:32 (HINIRV) »
प्रभु यहोवा यह कहता है, अपनी बहन के कटोरे से तुझे पीना पड़ेगा जो गहरा और चौड़ा है; तू हँसी और उपहास में उड़ाई जाएगी, क्योंकि उस कटोरे में बहुत कुछ समाता है।
होशे 7:16 पर दार्शनिक-व्याख्या: धोखे और दया के बीच नरमाई नहीं
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: होशे की यह पंक्ति दर्शाती है कि यीशु-युग से पहले के इस अध्याय में इस्राइल के लोग परमप्रधान की ओर पलटकर नहीं लौटते; वे भ्रमित रहते हैं, धनुषधारी छलकपट से चलते हैं, और परिणामस्वरूप राष्ट्र के शासक तलवार के सामने गिर जाते हैं। यह उद्धरण एक चेतावनी है कि परमेश्वर के सामने धोखा और परास्त भाव ही विनाश के रास्ते खोलते हैं, भले ही लोग धोखेबाज़ धनुषों और औज़ारों के साथ गौरव करें।
पाठ-सम्पादन और साहित्यिक संदर्भ
सम्भव शब्द-चित्र में होशे याद दिलाते हैं कि इस्राइल के लोग “धोखा देनेवाले धनुष के समान” हैं—यद्यपि यह स्पष्ट रूप से युद्ध-यंत्र की भूरि-भूरि नहीं, बल्कि उनकी आत्म-भरोसा और भ्रामक व्यवस्था का प्रतीक है। वे परमप्रधान की ओर लौटते नहीं; उनके हाकिम समय समय पर क्रोधपूर्ण नीति रखते हैं जिससे दण्ड अवश्य आता है। मिस्र में उनका उपहास होने का संकेत यह बताता है कि पन्थ-भटकाव किस स्तर तक पहुंच सकता है: उनका राजनीतिक और आचरण-स्तर दुष्टता के कारण परास्त होता है।
पवित्री और theological संकेत
यह कथन यह भी दिखाता है कि ईश्वर के क्रोध में भी करुणा की एक सीमा है। 房शेष लोग जब तक अपने उद्धारकर्ता को छोड़ते हैं, तब तक वे स्व-निर्मित सुरक्षा-यंत्रों पर निर्भर रहते हैं, परन्तु वे ठोस रीढ़ नहीं बन पाते। “परमप्रधान” के विरोध में उनकी चालें अंततः विकट परिणामों को बुलाती हैं; यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि आत्म-सन्तुष्टि और छल-प्रचार का समर्थक होने से बुरा कुछ नहीं।
आत्मिक-निर्देश और cross-scripts
संयोग से प्राचीन लेखन में ऐसे संकेत बार-बार मिलते हैं—धोखा और धनुष एक साथ चलते हैं, परन्तु परमेश्वर की योजना इनकी जीत नहीं बनती। उदाहरणार्थ: - होशे 4:17 – इस्राइल का एकाधिकार टूटना, क्योंकि वे देवता के वचन से पलटते हैं। - עשׁיה 31:3 (यानी अन्य स्थानों पर भी मिसाल मिलती है कि सत्ता और युद्ध-यंत्र मानव-सरकार पर भरोसे का स्थान नहीं लेते।) कथन के साथ ये cross-रिफरेंस बताते हैं कि परमेश्वर-विश्वास से भटकना अंदर से कमजोर बनाता है और परिणाम तलवार, अपमान और दमन के रूप में दिखते हैं।
जीवंत प्रश्न-आत्म-चिंतन
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 7:16 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की ओर लौटना ही उत्तर है। धोखे और शक्ति-प्रदर्शन के बजाय ईश्वर के निष्ठ और सच-वर-वचन से शक्ति मिलती है। इस्राइल के कठिन काल में उपहास के बावजूद परमेश्वर चाहता था कि वे उसकी ओर लौटें; इतिहास बताता है कि जो लोग अपने भीतर से ईश्वर-निर्भरता को महत्त्व देते हैं, वे भय और दुष्कर परिस्थितियों में भी उद्धार-योजना पाते हैं।
संक्षिप्त उद्धरण (पुष्टि के लिए)
यदि उपलब्ध हो, नीचे के तीन महान अंशों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उद्धरण मिल सकते हैं। इस पद पर भी उनका संक्षिप्त उल्लेख शामिल है:
- Matthew Henry: “धोखा देनेवाले धनुष के समान हैं”—उनकी अकथनी और चालाकी की व्याख्या एक चेतावनी की तरह है।
- Albert Barnes: इस आयत में असत्य और लौकिक सुरक्षा के भ्रम की निंदा है; परमेश्वर के क्रोध के सामने यह राह नहीं टिकती।
- Adam Clarke: धनुष-चाल के प्रतीक से राज्य-नीतियों के अंतर्द्वंद्व की व्याख्या करते हुए दिखाते हैं कि परमेश्वर की योजना से भटकना विनाश की ओर ले जाता है।
Cross-references (संक्षेप में)
• होशे 4:17 — इस्राइल का अस्थिर रिश्ता; उद्धारक के प्रति प्रतिबद्धता न होना।
• होशे 11:7 — लोग सत्य से फिरते हैं, परन्तु ईश्वर अनुग्रह के मार्ग दिखाते हैं।
• यशाय 31:3 — मनुष्यों के हाथों की शक्ति सीमित और परमेश्वर की सत्ता सर्वोपरि।