Old Testament
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होशे 7:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब तक वे घात लगाए रहते हैं, तब तक वे अपना मन तन्दूर के समान तैयार किए रहते हैं; उनका पकानेवाला रात भर सोता रहता है; वह भोर को तन्दूर की धधकती लौ के समान लाल हो जाता है।
होशे 7:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 7:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 19:11 (HINIRV) »
तब शाऊल ने दाऊद के घर पर दूत इसलिए भेजे कि वे उसकी घात में रहें, और सवेरे उसे मार डालें, तब दाऊद की स्त्री मीकल ने उसे यह कहकर जताया, “यदि तू इस रात को अपना प्राण न बचाए, तो सवेरे मारा जाएगा।”

2 शमूएल 13:28 (HINIRV) »
तब अबशालोम ने अपने सेवकों को आज्ञा दी, “सावधान रहो और जब अम्नोन दाखमधु पीकर नशे में आ जाए, और मैं तुम से कहूँ, 'अम्नोन को मार डालना।' क्या इस आज्ञा का देनेवाला मैं नहीं हूँ? हियाव बाँधकर पुरुषार्थ करना।”

भजन संहिता 10:8 (HINIRV) »
वह गाँवों में घात में बैठा करता है, और गुप्त स्थानों में निर्दोष को घात करता है, उसकी आँखें लाचार की घात में लगी रहती है।
Hošē 7:6 पर एक संकल्पनात्मक दृष्टि
मुख्यInterpretive बिंदु: होशे के संदर्भ में इस वाक्य के भीतर "तन्दूर की आग" जैसी पकाने की रूपकता इस बात को दर्शाती है कि जब तक यह लोग शत्रु पर आक्रमण करने की योजना बनाते हैं, तब तक उनकी सक्रियता और धुनिश्चय बना रहता है; परन्तु उनके भीतर का भेद-धर्म और विश्वासहीनता एक नीरव अवस्था में है, जिससे परमेश्वर की समालोचना और न्याय स्पष्ट रूप से उभरता है। यह पंक्ति ईश्वरीय निदेश के अनुसार उनके चालों की क्षुद्रता और प्रतिक्रियाशील दमन का चित्रण है; वे एक-दूसरे के प्रति सतर्क रहते हैं, परन्तु उनका उद्देश्य पवित्रता और सत्य से दूर है।
साहित्यिक संदर्भ
होशे के ग्रंथ में प्रेम-भंग और भ्रष्ट राष्ट्र का चित्रण बारम्बार आता है। verse 6 में संकेत है कि उनका चाल-चलन शत्रु-योजना के अनुरूप है: घात, तैयारी, और तेज धधकती आग की तरह लाल होना—ये सभी रूपक उनके आंतरिक पाप, छल और अस्थिरता को उजागर करते हैं। यह प्रासंगिक है कि होशे में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय मजबूती भौतिक शाखाओं तक सीमित नहीं, बल्कि हृदय-निष्ठा और आत्म-समर्पण पर निर्भर है।
धार्मिक-तत्वगत महत्व
यह पाठ हमें चेतावनी देता है कि बहिर्मुखी सुरक्षा की आड़ में आस्था के असली मूल्यों की विद्वता भ्रम बन सकती है। “उनका पकानेवाला रात भर सोता रहता है” का कथन यह दर्शाता है कि निष्क्रियता और ईश्वर-निष्ठा का अभाव समाज के भीतर कैसे अनिष्ट योजनाओं को जन्म देता है। अन्ततः यह भाग यह कहता है कि सत्य और निष्ठा के अभाव में सामूहिक कठोराई और आत्म-धर्मत्याग फलित होता है, जैसा कि Hosea की समग्र चेतावनी में बार-बार दिखता है।
संदर्भ-गूढ़ी
- cross-reference 1: अन्यProphets के न्याय-आह्वान में भी ऐसी चिंता मिलती है कि यहूदी समाज बाहरी रक्षा-योजनाओं से नहीं, बल्कि अपने ईश्वर-सम्बंध से राहत पाएगा। संक्षेप—हृदय की विश्वस्तता परमेश्वर पर।
- cross-reference 2: नीतिवचन या दाऊद की स्तुति में यह विचार आता है कि चेतावनी और सावधानी के बिना आचरण अस्थिर हो जाता है; ध्यान दें कि भरोसेमंद नेतृत्व ही स्थिरता देता है।
- cross-reference 3: पुराने testament के अन्य भागों में सत्ता-योजनाओं पर ईश्वर की दृष्टि और परीक्षण का संदेश पाया जाता है; dışर्त में निष्क्रियता और छल के विरोध का संकेत मिलता है।
विचारफलक के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 7:6 में वस्तुस्थिति स्पष्ट करती है कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का वास्तविक आधार परमेश्वर के साथ दृढ़ आस्था है, न कि योजनाओं, कूट-नीतियों या ताकत पर। जब लोग आंतरिक भेद के साथ घात-चालों में फँस जाते हैं, तो परिणाम पाषाण-तपा गया होता है—आत्म-विश्वास घटता है और चेतना खो जाती है। সতर्क और विवेकशील पथ पर चलना, ईश्वर के साथ सचाई से जुड़ना ही इस स्थिति से उबरने का मार्ग है।
कथन-संयोजन (पूर्वधारणात्मक उद्धरण): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के टिप्पणियों से मिलते-जुलते निष्कर्ष स्पष्ट हैं कि आंतरिक छल और बहिर्मुखी तैयारी का मिश्रण ईश्वर के विरुद्ध एक कठोर चेतावनी है; इन दृष्टांतों के अनुसार, “सत्य के साथ निष्ठा” ही शासन और समाज की स्थिरता बनाती है. अगर उपलब्ध हो सके, तो उनके संक्षिप्त उद्धरण नीचे उल्लेखित किये गए हैं:
नोट: इस पाठ के लिए सीधे उद्धृत शब्द केवल संधिकृत टिप्पणीकारों से संदर्भित हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो यहाँ दिए जाएंगे