Old Testament
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होशे 7:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उन पर हाय, क्योंकि वे मेरे पास से भटक गए! उनका सत्यानाश हो, क्योंकि उन्होंने मुझसे बलवा किया है! मैं तो उन्हें छुड़ाता रहा, परन्तु वे मुझसे झूठ बोलते आए हैं।
होशे 7:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 7:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 9:12 (HINIRV) »
चाहे वे अपने बच्चों का पालन-पोषण कर बड़े भी करें, तो भी मैं उन्हें यहाँ तक निर्वंश करूँगा कि कोई भी न बचेगा। जब मैं उनसे दूर हो जाऊँगा, तब उन पर हाय!

होशे 11:12 (HINIRV) »
एप्रैम ने मिथ्या से, और इस्राएल के घराने ने छल से मुझे घेर रखा है; और यहूदा अब तक पवित्र और विश्वासयोग्य परमेश्वर की ओर चंचल बना रहता है।

प्रकाशितवाक्य 8:13 (HINIRV) »
जब मैंने फिर देखा, तो आकाश के बीच में एक उकाब को उड़ते और ऊँचे शब्द से यह कहते सुना, “उन तीन स्वर्गदूतों की तुरही के शब्दों के कारण जिनका फूँकना अभी बाकी है, पृथ्वी के रहनेवालों पर हाय, हाय, हाय*!”
होशे 7:13 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में: प्रेरित भटके हुए लोग हीनता के कारण परमेश्वर के पास से भटक गए हैं, उनके होने का परिणाम भारी भाग्यविधि और शोक है; क्योंकि उन्होंने परमेश्वर से बार-बार धोखा किया है, जबकि परमेश्वर उन्हें बचाने को तत्पर रहा है।
पाठ का संदर्भ और पृष्ठभूमि
यहहफा होशे की पुस्तक के जबानी संदर्भ में है जब ईश्वर के चयनित लोग यहूदा/इस्राएल के भीतर सामाजिक और धार्मिक काम-चलन में उलझे थे। होशे उन लोगों के प्रति दृढ़ दयनीय लेकिन स्पष्ट चेतावनी सुनाते हैं: परमेश्वर ने उनके लिए खूब कोशिशें कीं, परन्तु वे उनकी आवाज़ को न मानकर झूठ बोलते रहे। स्थानीय राजनीति, धार्मिक पाखंड, और आत्म-स्वार्थ ने उनके विश्वास को खोखला बना दिया है।
मुख्य interpretive observations
छोटा विचार-तत्व (Theme highlights)
पवित्र ग्रन्थ के अन्य सम्बद्ध संदर्भ
1) कल्पनात्मक चेतावनी: होशे के संदेश में कई बार इस तरह के चेतावनी-हेतू हो: “जब लोग अपने पापों से मुक्त नहीं होते।”
2) दयालुता और दण्ड का संतुलन: परमेश्वर बचाने का प्रयास करते हैं, परंतु दुष्कर्म के लिए न्याय भी अनिवार्य है।
3) विशिष्ट उद्धार के संकेत: भटकाव के बीच भी परमेश्वर के साथ पुनः जुड़ने के रास्ते खुलते हैं यदि व्यक्ति सत्यवचन स्वीकार करे।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम अपने दिल में आदान-प्रदान की ईमानदारी बनाए रखें: न तो धार्मिक दिखावे से nor झूठ बोलकर परमेश्वर को भ्रमित करें; बल्कि सच्चे विश्वास, पश्चात्ताप और सत्यनिष्ठा से चलें। कठिन समय में भी ईश्वर की आवाज को सुनना और उसी के अनुसार व्यवहार करना अहम है।
टेकअवे
जहाँ लोग अपने लाभ के लिए परमेश्वर से दूरी बनाते हैं, वहाँ क्रोध और दंड का खतरनाक संकेत बना रहता है; परन्तु ईश्वर की निरंतर करुणा और छुड़ाने की चाह से पथ-प्रशस्त हो सकता है, यदि हम सच बोलें और सही मार्ग पर चलें।