Old Testament
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होशे 7:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस्राएल का गर्व उसी के विरुद्ध साक्षी देता है; इन सब बातों के रहते हुए भी वे अपने परमेश्वर यहोवा की ओर नहीं फिरे, और न उसको ढूँढ़ा है।
होशे 7:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 7:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 5:5 (HINIRV) »
इस्राएल का गर्व उसी के विरुद्ध साक्षी देता है, और इस्राएल और एप्रैम अपने अधर्म के कारण ठोकर खाएँगे, और यहूदा भी उनके संग ठोकर खाएगा।

यशायाह 9:13 (HINIRV) »
तो भी ये लोग अपने मारनेवाले की ओर नहीं फिरे और न सेनाओं के यहोवा की खोज करते हैं।

आमोस 4:6 (HINIRV) »
“मैंने तुम्हारे सब नगरों में दाँत की सफाई करा दी, और तुम्हारे सब स्थानों में रोटी की घटी की है, तो भी तुम मेरी ओर फिरकर न आए,” यहोवा की यही वाणी है।
होशे 7:10 पर टिप्पणी—अर्थ और संदर्भ
सीधी बात में अर्थ: इस्राएल का अहंकार उसके सामने ही गवाही दे रहा है कि वे परमेश्वर Yehovah से पलट नहीं रहे, बल्कि आत्म-गर्त में पड़े हुए धय रहते हैं; फिर भी वे उसे ढूंढ़ना नहीं छोड़ते।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे के दिनों इस्राएल के राज्य (उत्तर) में परमेश्वर के प्रति अविश्वास और ढीला विश्वास बढ़ रहा था। वे आर्थिक-राजसी समृद्धि और राजनीतिक alliances में चिपके थे, परन्तु उस समय के भीतर उनका हृदय ईश्वर के प्रति ढीला था। इस verse में क्रूर गर्व और फिरौती के साथ साथ परमेश्वर की ओर न लौटने की प्रवृत्ति उभरती है—गर्व के साथ भी वे परमेश्वर के विरुद्ध गवाही देते हैं कि उनका मन सचमुच सामने नहीं आया है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
- गर्व की साक्षी: उनके अपने गुण—उनकी शक्ति, धन, और राजनीतिक प्रभाव—गर्व का आधार बनते हैं, पर वह गर्व साक्ष्य देता है कि वे गलत दिशा में बढ़ रहे हैं।
- परिवर्तन की कमी: कई बार अवसर और संकेत उनके सामने आते हैं, परन्तु वे परमेश्वर की ओर पलटकर नहीं देखते; यह दृढ़ अड़चन उनकी आत्मा की असफलता को चिह्नित करता है।
- परमेश्वर की निरपेक्षा: वे यह भी दिखाते हैं कि वे अपने आराध्य को ढूंढ़ना चाहते हैं, परन्तु वह ढूंढ़ना एक सतही खोज है—आत्मिक बदलाव नहीं।
कथात्मक और अनुशीलन टिप्पणियाँ
होशे की इस पंक्ति में ईश्वर के विरुद्ध चलती हुई चालें बार-बार तब उभरती हैं जब समाज अपने पूर्व नियोजित मार्ग से दूर हो जाता है। यह बताती है कि अहंकार केवल व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक सिद्धांत बन सकता है, जो अन्ततः परमेश्वर के साथ संबंध को खतरे में डालता है।
मूर्त संदर्भों से चयनित विचार
अन्य पवित्रशास्त्र से क्रॉस-रेफरेंसे
- दानियेल 4:37 तथा याकूब 4:6 जैसे तत्त्व यहाँ संदिग्ध गर्व के विरुद्ध विनय की महत्ता बताते हैं—गर्व का स्थान परमेश्वर के पास नहीं, बल्कि उसकी ओर लौटना है।
- रोम 11:22-23 में ईश्वर की दयालुता के साथ न्याय की ज़रूरत पर बल दिया गया है—गर्व से नहीं, विनय से जीवित रहने की आवश्यकता।
- 1 पतरस 5:6-7—उच्चावस्था से नीचे गिरकर परमेश्वर के चरणों में विनम्र होना ही सच्चा ठहराव है।
नोट: अगर उद्धृत शास्त्रीय टिप्पणीकारों के छोटे-छोटे शब्द उद्धृत किए गए हों, तो वे बिल्कुल संक्षेप में ही शामिल हैं और पूर्ण पाठ नहीं हैं।
संक्षिप्त एकाग्र निष्कर्ष
होशे 7:10 हमें याद दिलाता है कि गर्व के बावजूद परमेश्वर के पास लौटने की पुकार बनी रहती है। उद्धार के लिए केवल ढूंढ़ना नहीं, बल्कि पूरे मन से परिवर्तन और दयालुता के साथ उनकी ओर मुड़ना आवश्यक है।