Old Testament
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होशे 7:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं उनको शिक्षा देता रहा और उनकी भुजाओं को बलवन्त करता आया हूँ, तो भी वे मेरे विरुद्ध बुरी कल्पना करते हैं।
होशे 7:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 7:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नहूम 1:9 (HINIRV) »
तुम यहोवा के विरुद्ध क्या कल्पना कर रहे हो? वह तुम्हारा अन्त कर देगा; विपत्ति दूसरी बार पड़ने न पाएगी।

2 राजाओं 13:23 (HINIRV) »
परन्तु यहोवा ने उन पर अनुग्रह किया, और उन पर दया करके अपनी उस वाचा के कारण जो उसने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बाँधी थी, उन पर कृपादृष्टि की, और न तो उन्हें नाश किया, और न अपने सामने से निकाल दिया।

2 राजाओं 14:25 (HINIRV) »
उसने इस्राएल की सीमा* हमात की घाटी से ले अराबा के ताल तक ज्यों का त्यों कर दी, जैसा कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने अमित्तै के पुत्र अपने दास गथेपेरवासी योना भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था।
होशे 7:15 पर एक नज़र: भलाई के बावजूद उलटी योजना
यह पंक्ति होशे के गुरु-प्रेषक के दिल का दर्द दिखाती है। ईश्वरीय करुणा के कारण वह बार-बार यह बताता है कि वह इस्राइल के लोगों को शिक्षित कर रहे, उनके बल को बढ़ा रहे और उनकी राह में मार्गदर्शन दे रहा है। फिर भी, उनके मन में बुरी कल्पनाएं उठती हैं, वे धर्म से दुर हो जाते हैं और संकट के समय भी भगवान के विरुद्ध खड़े रहते हैं।
पंक्ति का章: इस verse के भीतर क्या है
यहाँ कहा गया है कि परमेश्वर ने उनकी भुजाओं को बलवान किया—यानी वे सामाजिक, राजनीतिक, और आत्मिक रूप से सक्षम बने—परन्तु उनका हृदय धोखे और बुरे विचारों से दूषित रहा। यह सूचित करता है कि भगवान के उपदेशों और समर्थनों के बावजूद आत्म-स्वार्थ, प्रलोभन और अविश्वास की ताकत कभी-कभी लोगों के जीवन में जीत ले लेती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) ईश्वरीय शिक्षण और संरक्षण के प्रति मानवीय उत्तरदायित्व: परमेश्वर अपने लोगों को सच के मार्ग पर रखने के लिए निरंतर प्रशिक्षण देता है।
2) आत्मिक प्रतिरोध से चूकना: भक्ति और बुद्धि के बावजूद, भीतर का नकारात्मक विचार उनको गलत मार्ग पर ढकेल देता है।
अनुशंसित तुलनात्मक पठन
- यीशु के समय में भी उसी संकट का अनुभव हुआ: वे लोग भी प्रकट रूप से धार्मिक थे परन्तु उनके दिल स्वार्थी विचारों से अवरुद्ध थे। यह होशे के संदेश की एक समकालीन चेतावनी की तरह है कि सत्संग और शिक्षण मात्र काफी नहीं, हृदय की स्थित भी परिवर्तनशील हो।
- भजन 37:5-6 की तरह, जहाँ विश्वास और कर्म एक साथ चलते हैं, लेकिन कभी-कभी गलत नियत से बना व्यवहार संतुलन बिगाड़ देता है।
- यीओन 3:20-21 के अनुरूप, अच्छाई के प्रति प्रशंसा तब तक स्थिर रहती है जब व्यक्ति सच्चे दिल से परमेश्वर के प्रकाश को अपनाता है।
व्यावहारिक लागूकरण
Cross-references का संक्षिप्त परिचय और उनके सम्बन्ध
1) रोम 12:2 — परिवर्तनशील मानसिकता: “सोच-विचार के ढांचे” को परमेश्वर की नवीन कल्पना में ढालना।
2) भजन 51:10 — नया हृदय और नया विचर: आत्मा को पवित्र बनाने की प्रार्थना।
3) मत्ती 15:18-19 — भीतर से निकलने वाले विचारों की सच्चाई: क्योंकि मेरे भीतर से ही बुरे विचार उत्पन्न होते हैं।
संक्षेप सार
होशे 7:15 में ईश्वर का करुणापूर्ण आवाहन साफ दिखता है: वे शिक्षित और समर्थित होते हैं, फिर भी उनकी भुजाओं में बल के साथ-साथ बुरी कल्पनाओं का उभरना यह बताता है कि आचरण को नियंत्रित करने के लिए दिल की चपलता और सत्य की ठोस प्रतिबद्धता कितनी आवश्यक है। एक संतुलित जीवन के लिए, ज्ञान, प्रेरणा और अंतःकरण की शुद्धता एक साथ चलनी चाहिए।
कहावत: “जगह-जगह पर शिक्षण से फर्क नहीं पड़ता जब तक हृदय में विश्वास और आज्ञापालन बना रहे।”
नोट: लेखन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य-स्वर के विचारों के अनुरूप भाव-विश्लेषण समाहित किया गया है। यदि आप चाहें तो उनके चिंतन के छोटे उद्धरण भी जोड़े जा सकते हैं, परन्तु यहाँ पाठ के मुख्य संदेश पर केंद्रित रहा गया है।