Old Testament
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होशे 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस्राएल का गर्व उसी के विरुद्ध साक्षी देता है, और इस्राएल और एप्रैम अपने अधर्म के कारण ठोकर खाएँगे, और यहूदा भी उनके संग ठोकर खाएगा।
होशे 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 7:10 (HINIRV) »
इस्राएल का गर्व उसी के विरुद्ध साक्षी देता है; इन सब बातों के रहते हुए भी वे अपने परमेश्वर यहोवा की ओर नहीं फिरे, और न उसको ढूँढ़ा है।

आमोस 5:2 (HINIRV) »
“इस्राएल की कुमारी कन्या गिर गई, और फिर उठ न सकेगी; वह अपनी ही भूमि पर पटक दी गई है, और उसका उठानेवाला कोई नहीं।”

यहेजकेल 23:31 (HINIRV) »
तू अपनी बहन की लीक पर चली है; इस कारण मैं तेरे हाथ में उसका सा कटोरा दूँगा।
सीधे अर्थ की पुष्टि: होशे 5:5 बताता है कि इस्राएल का घमंड उसके अपने विरुद्ध साक्षी है; इस्राएल और एप्रैम अपनी पापी घुट्टी में ठोकर खाएंगे, और यहूदा भी उनके साथ गिरेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे की किताब समाजिक पीछडापन और आत्म-गौरव के प्रति ईश्वर के दृष्टिकोण को उद्घाटित करती है। यह्रवा और एप्रैम का घमंड उनके कारण ठोकर खाने के कारण बनता है; होशे यह चेतावनी देता है कि वे धार्मिक बाहरी आड़ में आत्म-धारणा के भ्रम में हैं, जबकि ईश्वर njih के अंतःकरण में चल रहे पाप को देख रहा है। यह पाठ होशे के संदेश का हिस्सा है जिसमें इस्राएल के कुल के भीतर व्याप्त गिरावट और उनके धार्मिक कर्मकांडों के साथ उनके अंदर की अविश्वासिता को उजागर किया गया है।
विश्लेषणात्मक बिंदु
संक्षिप्त शीर्षक-युक्त निष्कर्ष
क्रॉस-रेफ़रेंस और उनके संक्षेप अर्थ
1) होशे 4:6 — ज्ञान की कमी के कारण पाप बढ़ता है; उद्देश्य है कि परमेश्वर के उपदेश से ज्ञान प्राप्त हो।
2) होशे 6:6 — प्रेम अधिक मूल्यवान है पथभ्रष्टता से; यह दिखाता है कि ईश्वर करुणा के साथ वफादारी चाहता है।
3) योएल 2:12-13 — दिल से पश्चात्ताप करना, पवित्र जीवन की दिशा में मोड़ना महत्वपूर्ण है; बाहरी आडंबर से ज्यादा आंतरिक परिवर्तन मायने रखता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम स्वयं के भीतर के घमंड और धार्मिक ढाँचों की आड़ में पाप की जड़ें कब गहरी न हो जाएं, इसका सावधान रिकॉर्ड रखें। ईश्वर के सामने सत्य-हृदय बनाएं, और समाज में निष्ठा, करुणा, और न्यायपूर्ण आचरण को प्रमुख बनाएं।
कथन-उद्धृत उद्धरण (अनुदिष्ट स्रोत): इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट शाब्दिक उद्धरण उपलब्ध न होने पर भी उनके समग्र तर्क के अनुरूप संरचना की समेकित व्याख्या दी गई है. अगर पाठ के भीतर उनके छोटे-छोटे उद्धरण उपलब्ध हों, उन्हें उपयुक्त संदर्भ में शामिल किया जाएगा।