Old Testament
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होशे 5:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मैं एप्रैम के लिये सिंह, और यहूदा के घराने के लिये जवान सिंह बनूँगा। मैं आप ही उन्हें फाड़कर ले जाऊँगा; जब मैं उठा ले जाऊँगा, तब मेरे पंजे से कोई न छुड़ा सकेगा।
होशे 5:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 5:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 7:2 (HINIRV) »
ऐसा न हो कि वे मुझ को सिंह के समान फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर डालें; और कोई मेरा छुड़ानेवाला न हो।

मीका 5:8 (HINIRV) »
और याकूब के बचे हुए लोग जातियों में और देश-देश के लोगों के बीच ऐसे होंगे जैसे वन-पशुओं में सिंह, या भेड़-बकरियों के झुण्डों में जवान सिंह होता है, क्योंकि जब वह उनके बीच में से जाए, तो लताड़ता और फाड़ता जाएगा, और कोई बचा न सकेगा।

होशे 13:7 (HINIRV) »
इसलिए मैं उनके लिये सिंह सा बना हूँ; मैं चीते के समान उनके मार्ग में घात लगाए रहूँगा।
होशे 5:14 — क्यों यह बात मायने रखती है
हमारा verse यह दिखाता है कि परमेश्वर की प्रतिक्रिया केवल दया-भरी नहीं, बल्कि पाप के परिणामों से उद्धार के लिए कसौटी-भरी भी हो सकती है। होशे के समय इस वचन में ईश्वरीय करूणा और न्याय दोनों एक साथ चलते हैं: परमेश्वर स्वयं खतरे के मध्य कदम उठाते हैं, ताकि अपने लोक को सचेत कर सकें और उनसे सत्य-त्याग के रास्ते पर लौटने को कहें। यह वचन बतलाता है कि खतरे और दंड के बावजूद परमेश्वर का उद्धारकारी प्रेम स्थिर है, और वह प्रायः कठोर रास्ता अपनाकर भी अपनी मंशा पूरी करते हैं—ताकि उद्धार की राह फिर से खुल सके।
पारिभाषिक संदर्भ और मूल संदर्भ
होशे नामक नबी ने इजरायल और यहूदा के प्रजातियों में बढ़ते वैर-आचरण, विश्वासघात और धर्मत्याग के कारण ईश्वर के न्याय को उजागर किया। 5:14 में “एप्रैम के लिए सिंह” और “यहूदा के घराने के लिए जवान सिंह” के रूपक से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर एक प्रबल, पराक्रमी दंडवाहक के रूप में आ रहे हैं—जो प्रकृति की आत्मीयता के भीतर नहीं, बल्कि नीति-नियम और पाप के नतीजों के नियंत्रण में न्याय कर सकते हैं। यह दंड-केन्द्रित चित्र उद्धार की तैयारी के रूप में भी है; क्योंकि अंतत: वही दया और पुनर्स्थापना की राह खोल सकता है।
मुख्य संदेश
इस पद का मूल संदेश यह है: परमेश्वर अपने चुनावित लोगों के पाप को छिपानेवाला नहीं है, बल्कि उनकी दूरी को साफ़ कर के उन्हें आत्म-चेतना और पश्चात्ताप की ओर बुलाते हैं। “मैं उठा लाऊँगा, तब मेरे पंजे से कोई न छुड़ा सकेगा” से स्पष्ट होता है कि दण्ड एक कृपा-यात्रा का भाग है, जो लोगों को वास्तविक व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रेरित करती है। यह भू-आन्दोलन नहीं, आन्तरिक तब्दीली की मांग है, ताकि ईश्वर की संगति फिर से स्थापित हो सके।
आध्यात्मिक विषयक आपका मार्गदर्शक
कुछ उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज
यशायाह 54:8-9; पतरस के पहले पत्र 5:6-7; हेबर 10:26-31
इन संदर्भों में स्पष्ट होता है कि दंड के पीछे एक दीर्घकालिक उद्देश्य है: विश्वासियों को दृढ़ता और पवित्रता की ओर ले जाना। Yशायाह में उद्धार के साथ बाध्य-चेतना, पतरस में दया-प्रेरणा, और हेबर में आस्था के लिए सतर्कता की तुलना मिलती है।
छोटी देवotional reflection
जब हम अपने पाप के भार से तंग आकर सचेत होते हैं, तब परमेश्वर हमें स्थितियों के माध्यम से चेतावनी देते हैं—ताकि हम फिर लौट आएं। यह verse हमें आश्वस्त करता है कि हमारा पालनहार हमारे साथ है, चाहे स्थिति कितनी भी कठोर क्यों न हो। वह सिंह होकर आता है, पर उसकी दया की डगर भी खुली रहती है; हमें केवल अपने आप को उसकी गति में देने की जरूरत है।
ऐतिहासिक-धार्मिक उद्धरण का नोट
इस जोड़े गए उद्धरणों में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से कुछ शाब्दिक उद्धरण सीधे तौर पर नीचे दिए नहीं गए हैं; यदि आवश्यक हो तो वे इन पंक्तियों में समानार्थी विचारों के साथ समन्वयित कर सकते हैं—पर यहाँ संक्षेप में उनके अवलोकनों के सार को ही समाहित किया गया है।