Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 5:2 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 5:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उन बिगड़े हुओं ने घोर हत्या की है, इसलिए मैं उन सभी को ताड़ना दूँगा।
होशे 5:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 5:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

होशे 9:15 (HINIRV) »
उनकी सारी बुराई गिलगाल में है; वहीं मैंने उनसे घृणा की। उनके बुरे कामों के कारण मैं उनको अपने घर से निकाल दूँगा। और उनसे फिर प्रीति न रखूँगा, क्योंकि उनके सब हाकिम बलवा करनेवाले हैं।

यशायाह 29:15 (HINIRV) »
हाय उन पर जो अपनी युक्ति को यहोवा से छिपाने का बड़ा यत्न करते, और अपने काम अंधेरे में करके कहते हैं, “हमको कौन देखता है? हमको कौन जानता है?”

होशे 6:9 (HINIRV) »
जैसे डाकुओं के दल किसी की घात में बैठते हैं, वैसे ही याजकों का दल शेकेम के मार्ग में वध करता है, वरन् उन्होंने महापाप भी किया है।
होशे 5:2 पर धारणा
मुख्य अंतर्दृष्टि: पाप की गहराई में डूबे यहूदा-राज्य के पापी नेताओं के कारण परमेश्वर का निर्णय और क्षमा की मांग एक साथ उठती है। होशे में कहा गया है कि शासक वर्ग और निर्गम-चरित्र वाले लोग अत्यंत धृष्ट होकर हत्या जैसी कुल अवज्ञाओं को अंजाम दे चुके हैं; लेकिन परमेश्वर के निर्णय में न्याय और दया दोनों का संतुलन है—ताकि लोगों में आस्था औरCTR (उद्धार) का पुनः प्रवेश हो सके।
साहित्यिक संदर्भ और लेखन-परिप्रेक्ष्य
होशे की पुस्तक के इस भाग में लेखक होशे अपनी धार्मिक-राजनीतिक विडंबना दिखाते हैं: प्रायः धर्म के दिखावे के पीछे सामाजिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार ने जन्म लिया है। होशे 5:2 में जातीय-सरकार के दोषी अधिकारी “घोर हत्या” जैसी कृत्यों के सहारे पाप का ठंडा सच उजागर करते हैं। यह पाठ न केवल व्यक्तियों के नैतिक गिरावट को पहचानता है, बल्कि समुदाय-स्तर पर राष्ट्रीय अपमान और ईश्वर-निंदा का भी चिह्न देता है।
यहाँ की भाषा तीखी है: अपराधी, जो समाज की सत्ता पर बैठे थे, वे भी दोषी ठहराए जाते हैं—यही संदेश है कि पाप केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत है।
तीसरी-स्थापना: theological significance
तीर्थ-परिप्रेक्ष्य में यह बयान यह दिखाता है कि पाप कितना गहरा हो जाए, ईश्वर न्याय से चूक नहीं करते। “ताड़ना” से आशय है स्पष्ट चेतावनी और शासन-न्याय, ताकि लोग ताप-आग से विचलित होकर फिर से सत्य की ओर लौटें। साथ ही यह संकेत देता है कि दया और क्षमा का मार्ग भी खुला है, जब लोग पश्चाताप करें।
ग्रंथ-संयोजन पर विचार
कुछ प्रमुख cross-references की कलम से जोड़-जोड़ इस प्रकार गूंजती है: - यहूदा के पाप के विरुद्ध परमेश्वर का न्यायी निर्णय प्रकट होता है; वेशी के दोष यह दिखाते हैं कि पाप समाज के भीतर संरचनात्मक जलन बन गया है। - हिरोनियों में भी पाप के बढ़ने से परमेश्वर की दया और न्याय का संयोजन सामने आता है; दोषियों के लिए ताड़ना भी उद्धार के अवसर का हिस्सा बनती है। - दूसरे भविष्यवक्ताओं के संदेश भी यही संकेत देते हैं कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए सत्य के मार्ग पर लौटने का अवसर बारम्बार देते हैं, ताकि उनके भीतर नया जीवन ध्वनि करे।
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 5:2 बताता है कि पाप का जवाबदेही से बचना संभव नहीं है—खासकर जब वह समाज के नेता और संरचनात्मक व्यवस्था तक पहुँचे। फिर भी परमेश्वर की ओर से ताड़ना के साथ उद्धार का मार्ग भी खुला है, यदि मनुष्य पश्चाताप करे और ईश्वर के सत्य पर लौटे। इस संदेश से प्रेरणा मिलती है कि नैतिक-जागरूकता और सार्वजनिक न्याय का संयोजन ईश्वर के राज्य के निर्माण में आवश्यक है।
उद्धृत स्रोतों के साथ प्रतिबद्ध उद्धरण (यदि उपलब्ध) — Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रत्यक्ष शब्द: - "Matthew Henry" का सटीक संकलन यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है, पर उनके सिद्धांत पंक्ति-पर-पंक्ति पाठ को दिशा देते हैं। - "Albert Barnes" और "Adam Clarke" के सन्दर्भात्मक सार उनके सामान्य विवेचन में मिलते हैं; यहाँ छोटे-से सार को एकीकृत किया गया है ताकि पाठक मूल संदेश समझ सके।