Old Testament
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होशे 5:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहूदा के हाकिम उनके समान हुए हैं जो सीमा बढ़ा लेते हैं; मैं उन पर अपनी जलजलाहट जल के समान उण्डेलूँगा।
होशे 5:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 5:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 19:14 (HINIRV) »
“जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको देता है, उसका जो भाग तुझे मिलेगा, उसमें किसी की सीमा* जिसे प्राचीन लोगों ने ठहराया हो न हटाना।

व्यवस्थाविवरण 27:17 (HINIRV) »
'श्रापित हो वह जो किसी दूसरे की सीमा को हटाए।' तब सब लोग कहें, 'आमीन।'

भजन संहिता 32:6 (HINIRV) »
इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है*। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तो भी उस भक्त के पास न पहुँचेगी।
होशे 5:10 का संदर्भ और उसका प्रभाव
स्थिति का परिचय: होशे की किताब 5章 में यहूदा और ईब्रानी प्रदेश के नेताओं के व्यवहार पर परमेश्वर की कड़ी चेतावनी दी गई है। यहां होशे प्रेषित करते हैं कि जब नेता सीमा बढ़ा लेते हैं—यानी अपनी सीमाओं को तोड़कर अन्याय, भ्रष्टाचार और अधर्म को बढ़ावा देते हैं—तो यह परमेश्वर के विरुद्ध एक मंच है। यह पद विशेष रूप से यहूदा के हाकिमों के व्यवहार पर निशाना साधता है, जो राजनीतिक सत्ता का दुरुपयोग करते हैं और लोगों पर दबाव डालते हैं।
पवित्र पाठ का पाठ्य-विछेदन
यहूदा के हाकिम उनके समान हुए हैं जो सीमा बढ़ा लेते हैं; मैं उन पर अपनी जलजलाहट जल के समान उण्डेलूँगा।
ईश्वर की तेजस्विता और अन्याय के विरुद्ध विश्वास
इस वाक्य में ईश्वर की दया और न्याय का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखता है। परमेश्वर सीमा से आगे बढ़कर नेताओं के भ्रष्ट आचरण को देख रहा है और उसकी जलजलाहट—कठोर क्रोध—उपयुक्त न्याय के रूप में उभरती है। यह एक चेतावनी है कि सत्ता के दुरुपयोग पर भगवान चुप नहीं रहेंगे; न्याय के हाथ पहचाने जाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ और छवियाँ
संबद्ध बाइबिल संदर्भ
धार्मिक पाठ में यह समान चेतावनियाँ अन्यत्र भी मिलती हैं जहाँ धार्मिक नेतृत्त्व भ्रष्ट होने पर परमेश्वर न्याय का आदेश देता है (उदा. अन्य देशों के नेताओं के विरुद्ध और यद्यपि दूसरे हिस्सों में न्याय की गवाही अलग रूप में मिलती है)। यह भी दिखता है कि परमेश्वर राजनीतिक और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध एक न्यायी आवाज बनते हैं।
今日 के लिए अनुप्रयोग
1) नेतृत्व में पारदर्शिता और जवाबदेही परमेश्वर की दृष्टि में अनिवार्य है; सत्ता का दुरुपयोग सामाजिक असमानताओं को बढ़ाता है।हम अपने नेताओं से सत्य, ईमानदारी और न्याय की अपेक्षा करें।
2) व्यक्तिगत जीवन में तानाशाही या दबाव से बचना—समाजिक दबाव के सामने उठकर सत्य और नैतिक आचार को बनाए रखना सीखें।
3) अगर प्रशासनिक पथों में भ्रष्टाचार हो, तो एकद्वारा नहीं बल्कि समुदाय के साथ सत्य-न्याय की मांग करें; प्रार्थना और साहस से नीति-निर्णयों में सत्य का पक्ष लें।
अनुकृति और एकीकृत टिप्पणी
इस पाठ के भीतर तीन पुरालेख लेखक (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के उधृत विचारों की जीवंतता अनुकूलित रूप से समाहित की गई है, ताकि यह पठन में एक सुसंगत ताने-बाने की तरह लगे।
Matthew Henry का सार: सत्ता के दुरुपयोग के विरुद्ध एक चेतावनी, और यह कि परमेश्वर न्याय के हाथ को धीमा नहीं करते।
Albert Barnes का दृष्टिकोण: नेताओं की अवहेलना से सामाजिक आतंक बढ़ सकता है; ईश्वर की क्रोधी चेतावनी समाज को सचेत करती है।
Adam Clarke का विचार: यह दृश्य यह संकेत करता है कि धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व की विवेकहीनता से ईश्वर का क्रोध तेज होता है और न्याय का दिन निकट आता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में और हर स्पष्ट उद्धरण के लिए संक्षिप्त संकेत)
1) यहूदा के नेताओं के दुरुपयोग के विरुद्ध अन्य जगह मिले न्याय के संकेतों पर ध्यान दें।
2) यहोवा की जलजलाहट के चित्रण को अन्याय के विरुद्ध दिखाती धारा; परमेश्वर के निर्णय का भाग बनती है।
3) प्रामाणिक नेतृत्व और नैतिक उत्तरदायित्व के महत्त्व पर बल देती है।