Old Testament
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होशे 5:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब एप्रैम ने अपना रोग, और यहूदा ने अपना घाव देखा, तब एप्रैम अश्शूर के पास गया, और यारेब* राजा को कहला भेजा। परन्तु न वह तुम्हें चंगा कर सकता और न तुम्हारा घाव अच्छा कर सकता है।
होशे 5:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 5:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 7:11 (HINIRV) »
एप्रैम एक भोली पंडुकी के समान हो गया है जिसके कुछ बुद्धि नहीं; वे मिस्रियों की दुहाई देते*, और अश्शूर को चले जाते हैं।

होशे 10:6 (HINIRV) »
वह यारेब राजा की भेंट ठहरने के लिये अश्शूर देश में पहुँचाया जाएगा। एप्रैम लज्जित होगा, और इस्राएल भी अपनी युक्ति से लजाएगा।

होशे 12:1 (HINIRV) »
एप्रैम पानी पीटता और पुरवाई का पीछा करता रहता है; वह लगातार झूठ और उत्पात को बढ़ाता रहता है; वे अश्शूर के साथ वाचा बाँधते और मिस्र में तेल भेजते हैं।
होशे 5:13 का संक्षिप्त अर्थ
यहूदा तथा एप्रैम अपने-अपने रोगों को देखकर न तो उपचार पा सके; न ही दूसरे से उनको चंगा किया जा सकता है। यह वचन संदेश देता है कि परमेश्वर की सजा के समय मनुष्य अपनी नीयत और प्रयास से उद्धार नहीं पा सकता, क्योंकि उद्धारकर्ता वह नहीं जो मानव रोगों को ठीक करे, बल्कि वह है जो अपने न्याय के अनुसार स्थितियाँ बनाता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे की किताब संयुक्त इस्राएल के अराजक समय में लिखी गई। होशे और ईज़राइल-यूदा के बीच आचरण का अन्तर, कूड़ीत और अज्ञानता का परिणाम बनकर सामने आया है। इस verse में कहा गया है कि एप्रैम (उत्तर के अधिक विकसित राज्य) और यहुदा (दक्षिणी राजधानी) दोनों रोगी हैं—लेकिन उनका उचित उपचार केवल परमेश्वर के पास है, न कि आश्रित-राजाओं या अस्थाई उपायों के पास।
विश्लेषणात्मक बिंदु
अन्वेषणीय निष्कर्ष (3 बिंदु)
अनुकूलित क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके अर्थ
1) मत्ती 9:12-13 में यीशु बताते हैं कि रोगी को चंगा करने वाला परमेश्वर का पुत्र है; ये स्थानीय प्रशासन नहीं, पर परमेश्वर की कृपा है जो उद्धार दे।
2) यिर्मयाह 17:9 बताता है कि मनुष्य का हृदय धोखा देता है; चिकित्सा अथवा राजनीति से असली परिवर्तन नहीं होता।
3) दान 12:2 में स्पष्ट है कि सत्ता और शासन यदि परमेश्वर के नियम से नहीं जुड़ते, तो वे भी क्षणिक राहत के अतिरिक्त कुछ नहीं देते।
महत्वपूर्ण उद्धरण (चयनित टिप्पणीकारों के विचार)
हेनरी, बर्न्स और क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों में se prachlit विचार यह है कि: मानव प्रयास चाहे कितना भी हो, परिवर्तन और चंगा केवल परमेश्वर के राज्य-कार्य से आते हैं; कमजोरी के समय विश्वस्त उपायों पर निर्भर रहना संकट को बढ़ाता है।
matlab: यदि आप पाठ की सटीक उद्धरण चाहते हैं, तो "Matthew Henry" और "Albert Barnes" के संकलनों में इस प्रकार के विचार मिलते हैं: “Man’s extremity is God’s opportunity” प्रकार का विचार—परन्तु यहां हमें पूर्ण वाक्यों को फिर से उद्धृत नहीं करना है; केवल संकेत दिए जाते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग अपने रोगों, निराशाओं और दुष्कमलों के सामने खड़े हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए: बाहरी उपायों के साथ-साथ आन्तरिक परिवर्तन की भी नितांत आवश्यकता है। परमेश्वर की कृपा और न्याय के संतुलन में ही सच्ची चंगा संभव है। अपनी आशा को दूरदृष्टि से परमेश्वर की दिशा में रखें, न कि केवल मानव-उपायों पर।