Old Testament
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होशे 5:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
न्याय के दिन में एप्रैम उजाड़ हो जाएगा; जिस बात का होना निश्चित है, मैंने उसी का सन्देश इस्राएल के सब गोत्रों को दिया है।
होशे 5:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 5:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 1:6 (HINIRV) »
परन्तु मेरे वचन और मेरी आज्ञाएँ जिनको मैंने अपने दास नबियों को दिया था, क्या वे तुम्हारे पुरखाओं पर पूरी न हुईं? तब उन्होंने मन फिराया और कहा, सेनाओं के यहोवा ने हमारे चालचलन और कामों के अनुसार हम से जैसा व्यवहार करने का निश्चय किया था, वैसा ही उसने हमको बदला दिया है।” (विलाप. 2:17)

यशायाह 46:10 (HINIRV) »
मैं तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूँ जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूँ, 'मेरी युक्ति स्थिर रहेगी* और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूँगा।'

होशे 9:11 (HINIRV) »
एप्रैम का वैभव पक्षी के समान उड़ जाएगा; न तो किसी का जन्म होगा, न किसी को गर्भ रहेगा, और न कोई स्त्री गर्भवती होगी!
होशे 5:9 पर टिप्पणी: न्याय के दिन एप्रैम उजाड़ होगा
यह पद इस्राएल की धार्मिक-नेतृत्व की असतत् स्थिति और सामाजिक-न्याय की कमी की पुष्टि करता है। न्याय के दिन का उल्लेख आते ही परमेश्वर की सजा और जागृति दोनों सामने आती हैं; यहाँ एप्रैम के लिए उजाड़ होने की भविष्यवाणी से यह स्पष्ट होता है कि उसके विरुद्ध निष्क्रिय नहीं रह सकता, क्योंकि उनका आचरण और रीति-रिवाजों में छल-प्रपंच, दमन और असत्य फैला रहा है। यह सन्देश सुदृढ़ करता है कि परमेश्वर राज्य के भीतर भी नैतिक व्यवस्था बनाए रखेंगे और जो लोग उसकी स्मरण-सीमा के बाहर जाते हैं, उन्हें परिणाम भुगतना ही है।
परिप्रेक्ष्य का परिचय
होशे इस्राएल के उत्तर-युग के उत्तरार्ध में हुआ एक विरोधी-निष्कर्षक प्रचारक-पत्र है। एप्रैम, जो उत्तर राज्यक्षेत्र का प्रतीक है, न केवल भू-राजनीतिक रूप से बल्कि आध्यात्मिक विवेक के क्षेत्र में भी संबद्ध है। इस verse में कहा गया है कि न्याय के दिन एप्रैम उजाड़ हो जाएगा—यानी उसका सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक ढांचा ध्वस्त हो जाएगा क्योंकि उसने परमेश्वर-नियमों से पीछे हटकर अन्याय और पाखंड को बढ़ावा दिया।
मुख्य संदेश और निहितार्थ
इस पाठ का मूल तात्पर्य यह है कि परमेश्वर न्याय का राज स्थापित करते समय केवल बाहरी उपासना नहीं देखते, बल्कि प्रबुद्ध विवेक, दया और ईमानदार जीवन की मांग करते हैं। एप्रैम के उजाड़ होने की बात से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के न्याय से बचना संभव नहीं है यदि समुदाय के भीतर नैतिक गड़बड़ाहट और असत्य का बोलबाला रहता है। साथ ही, यह उद्धारण संदेश देता है कि परमेश्वर अपने दायित्व-उद्धार के उद्देश्य के अनुसार निर्णय लेते हैं, चाहे वह किसी एक जनजाति के विरुद्ध हो या उसके भीतर के पाप के विरुद्ध।
धर्मशास्त्रीय प्रवर्तनों से सम्बन्ध
- न्याय-के-दिन का विचार: प्रेषित न्याय का दिन परमेश्वर के आह्वान की निर्धारक तिथि है, जिसमें पाप के परिणाम स्पष्ट होते हैं।
- ईमानदार असत्य के विरुद्ध चेतावनी: बाहरी रीति-रिवाजों के बजाय अंतःकरण की सच्चाई ही महत्त्वपूर्ण है।
- दया और न्याय का संतुलन: परमेश्वर दया दिखाते हैं, पर पाप के विरुद्ध कठोर निर्णय भी लेते हैं।
संदर्भ क्रॉस-रेफरेंसेस
छोटी-सी व्यावहारिक चर्चा
मुख्य उद्धरण-उद्धृतियाँ
यदि किसी पाठ्य-स्तर पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्द सीधे उद्धृत हो तो उन्हें यहाँ संक्षेप में शामिल किया जाएगा; वर्तमान पाठ में वे खर्च नहीं हुए हैं।
आध्यात्मिक ध्यान
न्याय के दिन की समीक्षा करते हुए, विचार करें: क्या हमारी व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में पवित्रता के साथ ईमानदारी है? परमेश्वर के न्याय से भय զգना और उसकी दया की आशा रखना दोनों संतुलित तरीके से आवश्यक हैं। अपने जीवन में थोड़े-से छोटे कदम भी निभाएं जो संस्थागत पाखंड के विरुद्ध सच्चे विश्वास को दृढ़ करें—अन्तःकरण की सच्चाई, दयालुता, और न्यायप्रिय व्यवहार।
संक्षेप में, होशे 5:9 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का न्याय विश्व के हर हिस्से पर लागू होता है, और एप्रैम के उजाड़ होने की चेतावनी से यह सिद्ध होता है कि ईश्वर गलत कार्यों पर चुप नहीं रहते। हमारी आस्था और व्यवहार दोनों को सत्य-निष्ठा के साथ मिलकर चलना चाहिए ताकि हम दिन के न्याय के समय में उसके स्वागतयोग्य लोगों में बनें।