Old Testament
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जकर्याह 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु मेरे वचन और मेरी आज्ञाएँ जिनको मैंने अपने दास नबियों को दिया था, क्या वे तुम्हारे पुरखाओं पर पूरी न हुईं? तब उन्होंने मन फिराया और कहा, सेनाओं के यहोवा ने हमारे चालचलन और कामों के अनुसार हम से जैसा व्यवहार करने का निश्चय किया था, वैसा ही उसने हमको बदला दिया है।” (विलाप. 2:17)
जकर्याह 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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विलापगीत 2:17 (HINIRV) »
यहोवा ने जो कुछ ठाना था वही किया भी है, जो वचन वह प्राचीनकाल से कहता आया है वही उसने पूरा भी किया है*; उसने निष्ठुरता से तुझे ढा दिया है, उसने शत्रुओं को तुझ पर आनन्दित किया, और तेरे द्रोहियों के सींग को ऊँचा किया है।

व्यवस्थाविवरण 28:15 (HINIRV) »
“परन्तु यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की बात न सुने, और उसकी सारी आज्ञाओं और विधियों के पालन करने में जो मैं आज सुनाता हूँ चौकसी नहीं करेगा, तो ये सब श्राप तुझ पर आ पड़ेंगे।

यहेजकेल 12:25 (HINIRV) »
क्योंकि मैं यहोवा हूँ; जब मैं बोलूँ, तब जो वचन मैं कहूँ, वह पूरा हो जाएगा। उसमें विलम्ब न होगा, परन्तु, हे बलवा करनेवाले घराने तुम्हारे ही दिनों में मैं वचन कहूँगा, और वह पूरा हो जाएगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।”
जकर्याह 1:6 का संदर्भ और उसका सार
परन्तु मेरे वचन और मेरी आज्ञाएँ जिनको मैंने अपने दास नबियों को दिया था, क्या वे तुम्हारे पुरखाओं पर पूरी न हुईं? तब उन्होंने मन फिराया और कहा, सेनाओं के यहोवा ने हमारे चालचलन और कामों के अनुसार हम से जैसा व्यवहार करने का निश्चय किया था, वैसा ही उसने हमको बदला दिया है।
पद का दो-तीन स्तरों पर पढ़ना
यह पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के वचन और आज्ञाओं के पालन या उल्लंघन से भविष्य की घटनाओं पर असर पड़ता है। यहूदियों के पुराने इतिहास में बार-बार देखा गया कि असफलता के समय वे अपराध का ठीकरा भाग्य और दूसरों पर नहीं, बल्कि अपने ही पुराने तरीकों पर डालते रहे। लेकिन यहाँ भगवद् वचनों की अवहेलना के परिणाम सीधे उनके अपने अनुभव से दिखते हैं: उन्होंने मन फिराया, और यहोवा ने उन्हें उनके कर्मों के अनुसार बदला।
ईश्वर के चरित्र और विश्वास की बातें
कथन स्पष्ट करता है कि ईश्वर एक निष्ठावान न्यायी हैं जो अपने वचनों के अनुसार भक्तों के साथ व्यवहार करते हैं। उनकी योजनाएँ स्थिर हैं, और मानव निष्क्रियता या दैनंदिन कर्मों के कारण परिणाम बदलते हैं। इसके साथ यह भी दिखता है कि ईश्वर अपने दासों के माध्यम से संवाद करते हैं—नबियों के वचन के रूप में—ताकि इतिहास में इन्पुट और प्रतिफल हो सके।
कुंजी शब्दों के परिचय
संबद्ध क्रॉस-रेफरेंसेस
1) इब्रानियों 4:12—ईश्वर के वचन की धार तेज है और हृदयों की मंथन करता है; यह दिखाता है कि प्रभु के वचन सक्रिय हैं और हमारे आचरण को पहचानते हैं।
2) द्यूतन 28—अनुदेश और निर्भरताओं के परिणाम: आशीष या शास्त्र के पालन पर निर्भर फले-फूले परिणाम।
3) इवन्नी 3:7-9—पूर्व पुरखाओं के कर्मों का हिसाब; इतिहास के प्रति जवाबदेही और ईश्वर की योजना की पुनरावृत्ति।
व्यावहारिक आज की शिक्षा
- अपने जीवन के आचरण की समीक्षा करें: क्या मैं परमेश्वर के वचनों के अनुसार चल रहा हूँ? अगर नहीं, तो उद्धारकर्ता के कार्य के आलोक में नया आरम्भ संभव है।
- संकट या विपदा के समय भी हम भरोसा बनाए रखें कि परमेश्वर की चॉइस और मार्ग सही हैं; वचन में उभरी हिदायतें ही जीवन को दिशा देती हैं।
एजेंसी-और संपूर्ण सार
इस पद से समझ आता है कि परमेश्वर के वचन और आज्ञाओं के साथ दायित्वपूर्ण संबंध बनाये रखना ही सुरक्षा और जीवन का मार्ग है। नबियों के संदेश और अपने पथ पर दृढ़ रहने से ही इतिहास की दिशा सुधरती है।
यह पाठ स्पष्ट करता है कि बुरे परिणाम अक्सर हमारे अपने चुनावों का प्रकटीकरण होते हैं; किन्तु ईश्वर की दयालु नीति हमें बुलाती है कि हम लौटकर उसकी राह पर चलें, ताकि उसके वचनों के अनुरूप हमारी जिंदगी सुधरे।
महत्वपूर्ण उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से उपलब्ध शाब्दिक वाक्य): यह पाठ इन के तात्पर्यों के संग संग, नीचे के विचारों के अनुसार पढ़ने के लिए उपयुक्त है—उद्धरण सीधे पाठ में उद्धृत नहीं हैं, केवल उनके विचारों की प्रेरणा के रूप में समाहित है।