Old Testament
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जकर्याह 1:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर यह भी पुकारकर कह कि सेनाओं का यहोवा यह कहता है, मेरे नगर फिर उत्तम वस्तुओं से भर जाएँगे, और यहोवा फिर सिय्योन को शान्ति देगा; और यरूशलेम को फिर अपना ठहराएगा'।”
जकर्याह 1:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 2:12 (HINIRV) »
और तू जानेगी कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तेरे पास भेज दिया है। और यहोवा यहूदा को पवित्र देश में अपना भाग कर लेगा, और यरूशलेम को फिर अपना ठहराएगा।

यशायाह 51:3 (HINIRV) »
यहोवा ने सिय्योन को शान्ति दी है, उसने उसके सब खण्डहरों को शान्ति दी है; वह उसके जंगल को अदन के समान और उसके निर्जल देश को यहोवा की वाटिका के समान बनाएगा; उसमें हर्ष और आनन्द और धन्यवाद और भजन गाने का शब्द सुनाई पड़ेगा।

नहेम्याह 11:20 (HINIRV) »
शेष इस्राएली याजक और लेवीय, यहूदा के सब नगरों* में अपने-अपने भाग पर रहते थे।
तत्काल संदर्भ: जकरयाह 1:17 (HINIRV)
यहोवा के दूतों के चेतावनी-परेडों के बीच यह वाणी आती है कि नगर और यरूशलेम को फिर से शांति और समृद्धि मिलेगी। यह वाक्य हक़ीक़तन यहूदियों के पुनर्निर्माण के समय की आराधना-आह्वान है, जब परमेश्वर ने उनके दिलों को प्रेरित किया कि वे इधर-उधर नहीं, बल्कि सच्चे दिल से लौटें और उसे नगर-राज्य के केंद्र में रखें।
पुकारना और परमेश्वर की प्रतिज्ञा: देवता की प्रमुख धारणा
यह वचन बताता है कि परमेश्वर अपने शहर को शांत करेगा और उसका वातावरण उत्तम वस्तुओं से भरेगा। यह शांति और समृद्धि का परिधान है—एक ऐसी स्थिति जहाँ यरूशलेम और उसकी सभ्यता सुरक्षा, स्थिरता और धार्मिक-आनंद से परिपूर्ण होंगे। यह केवल भौतिक समृद्धि नहीं, बल्कि एक भारतीय अर्थपूर्ण शांति है जो परमेश्वर के पुनर्स्थापना-कार्य का भाग है।
प्रमुख शब्दों और imagery की स्पष्टता
- “नगर फिर उत्तम वस्तुओं से भर जाएँगे”: यहाँ ‘नगर’ सिर्फ भौतिक नगर नहीं, परंपरा, समाज और उपासना-केन्द्रित जीवन-रेखा का प्रतीक है। ‘उत्तम वस्तुएँ’ से आशय जीवन-आनंद, फल-फूल, और परमेश्वर की कृपा से भरे अवसर हैं।
- “यראוशलेम को फिर अपना ठहराएगा”: यह परमेश्वर की राज्य-व्यवस्था और उसके निवास की स्थिरता को दर्शाता है—येरूशलेम एक ऐसा केन्द्र बनेगा जहाँ परमेश्वर का शर्म-रहित निवास होगा और वहां शांति-युक्त शासन चलेगा।
अन्य संदर्भ और उनके संदेह-रोश
- यह वाक्य दूसरे भविष्यवाणियों के साथ सामंजस्य रखता है जहाँ पालन-पोषण और पुनर्निर्माण से जुड़ी आशाओं को बार-बार दोहराया गया है (उदा. हिजाक/यशयाह के समान संदेश)।
- मथ्यू Henry, Barnes, Clarke जैसे.PUBLIC-डोमेन टिप्पणियों में यह विचार पाया जाता है कि परमेश्वर का पुनःस्थापना-कार्य मानव-समर्थन, नैतिक सुधार और सामाजिक शांति के साथ जुड़ा है।
“Matthew Henry”, “Albert Barnes” और “Adam Clarke” से संकेतन
इस प्रस्तुति में इन तीनों के शब्दों का संक्षेप सचित्र समेकन नीचे दिया गया है ताकि पाठक उनके प्रवचन-शैली की भावना को एक साथ समझ सकें:
इन विचारों से एक तथ्य स्पष्ट होता है: परमेश्वर जब अपने लोकों को फिर से एक करता है, तब उनका वर्तमान जीवन भी बदल जाता है—न केवल बहिर्मुखी आशीष, बल्कि आंतरिक भक्तिकरण और सामाजिक न्याय का पालन।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में, 2-3 लिंक के साथ)
- यिर्मियाह 33:9: यह बताता है कि नगरों का शांति से रहने का अर्थ प्रेरित-समुदाय की स्थिरता है।
- ज़कर्याह 2:4-5: यरूशलेम और नगर-परिसरों की सुरक्षा का धार्मिक प्रतीकात्मकता स्पष्ट होती है।
- उनके आमने-सामने के आशय: यहोवा की शांति और जय-गान के साथ नगर-जीवन की पुनर्क्रमणा।
आज के समय के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
- विश्वास और प्रार्थना के साथ अपने समुदाय, नगर और समाज को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और मुक्त बनाने का प्रयास करें।
- रोजगार, पर्यावरण, सामाजिक न्याय—इन सभी क्षेत्रों में परमेश्वर के शांति-राज्य के मानक को अपनाएँ।
इस पद से मिलने वाला संदेश साफ है: जब परमेश्वर लौटकर अपने नगर को बनाए रखने का वादा करते हैं, तो हमारी भूमिका है—विश्वास, परिश्रम और एक दूसरे के लिए प्रेम।