Old Testament
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जकर्याह 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो अन्य जातियाँ सुख से रहती हैं, उनसे मैं क्रोधित हूँ*; क्योंकि मैंने तो थोड़ा सा क्रोध किया था, परन्तु उन्होंने विपत्ति को बढ़ा दिया।
जकर्याह 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 25:12 (HINIRV) »
“परमेश्वर यहोवा यह भी कहता है : एदोम ने जो यहूदा के घराने से पलटा लिया, और उनसे बदला लेकर बड़ा दोषी हो गया है,

यिर्मयाह 51:24 (HINIRV) »
“मैं बाबेल को और सारे कसदियों को भी उन सब बुराइयों का बदला दूँगा, जो उन्होंने तुम लोगों के सामने सिय्योन में की है; यहोवा की यही वाणी है।

यशायाह 54:8 (HINIRV) »
क्रोध के आवेग में आकर मैंने पल भर के लिये तुझसे मुँह छिपाया था, परन्तु अब अनन्त करुणा से मैं तुझ पर दया करूँगा, तेरे छुड़ानेवाले यहोवा का यही वचन है।
जकर्याह 1:15 का संदर्भ और उसका अर्थ
परिस्थितियों के बीच यह वचन यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगो के साथ कैसे व्यवहार करता है, जब वे उसकी योजना की कसौटियों से गुजरते हैं। जकर्याह के समय, यह पैगंबर यह बतला रहे हैं कि जिन जातियों के साथ पृथ्वी पर अराजकता और दुष्कर्म का व्यवहार हुआ, उन्हें परमेश्वर अभी भी जवाबदेह ठहराते हैं। वह क्रोध से देखता है कि कब्र में पड़े कार्यों के परिणाम कैसे फैलते हैं; तथा यह भी कि उसकी दया और न्याय कितनी सावधानी से संतुलित हैं। इस वचन में यह संकेत है कि प्रभु का क्रोध किसी एक समुदाय पर नहीं स्थिर रहता, बल्कि वह उन कारणों से क्रोधित होता है जो बाकी दुनिया के लिए चुनौती बनते हैं।
मुख्य अर्थ
यहां भगवान विशेष रूप से दिखाते हैं कि उनकी क्रोध तब होता है जब अन्य जातियाँ अपने सुख में रहते हैं और वे भी उनकी न्याय के अधीन आते हैं—परन्तु उन्होंने विपत्ति को बढ़ा दिया। इसका तात्पर्य यह है कि दया की सुरक्षा में भी जवाबदेही है: परमेश्वर अपने लोगों को संरक्षण देते समय भी अन्य जातियों के ठहराव और दुराचार की सीमा को नहीं भूलते।
मुख्य विषय
सूचनात्मक क्रॉस-रेफरेंस
1) यूहन्ना 3:16-18— प्रेम और उचित क्रोध की दिशा: प्रेम के साथ न्याय कैसे जुड़े।
2) नीतिवचन 29:2— जब धर्मी शासन पाते हैं तो लोग प्रसन्न होते हैं; अन्यथा धैर्य की मांग।
3) मैकहेरि-उद्धरण: यह विचार प्रकट करता है कि देवता न्याय के साथ संरक्षण भी देते हैं, और राष्ट्रों के उपयोग और दुष्कर्म पर उनका निर्णय क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों ही है।
व्यावहारिक विचार
हम अपने जीवन में यह देख सकते हैं कि अनुशासन और दया एक साथ कैसे चलती है। जब हम अपने व्यवहार में ईमानदारी, न्याय और करुणा का संतुलन बनाए रखते हैं, तब यह दर्शाता है कि परमेश्वर के तरीके हमारे मानवीय दृष्टिकोण से उच्च और व्यापक हैं। यह वचन हमें प्रेरित करता है कि हम दूसरों के दोषों पर दया और सुधार की दृष्टि रखें, न कि संहार की।
संक्षिप्त निष्कर्ष
जकर्याह 1:15 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर का क्रोध तब उठता है जब असामाजिकता और दुष्कर्म बढ़ते हैं, परन्तु वह साथ-ही-साथ सुधार और दया की राह भी दिखाते हैं। यह हमें विश्वास दिलाता है कि परमेश्वर का न्याय उद्देश्य है—न कि मनोरोगी दमन, बल्कि पथभ्रष्ट लोगों के लिए सचेतक और परिवर्तन का अवसर।
उद्धृत टिप्पणीकारों से संक्षेप:
मैथ्यू हेेनरी और अल्बर्ट बार्न्स के प्रवचनों से यह तत्व सुसंगत रहता है कि परमेश्वर का क्रोध और उसकी करुणा एक साथ संचालित होते हैं, ताकि लोगों में विनयं और सुधार की प्रवृत्ति बने।