यशायाह 54:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्रोध के आवेग में आकर मैंने पल भर के लिये तुझसे मुँह छिपाया था, परन्तु अब अनन्त करुणा से मैं तुझ पर दया करूँगा, तेरे छुड़ानेवाले यहोवा का यही वचन है।

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यशायाह 54:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 54:8 — प्रारम्भिक अवलोकन

इस आयते में प्रभु यहोवा के क्रोध के क्षण और उसके बाद की अनन्त दया का रहस्य उजागर होता है। यशायाह नबि़याहृ ने यहूदा-यात्रा के कठिन समय में भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर अपने चयनित लोगों के लिए ठंडा नहीं पड़ेगा, बल्कि उनके विश्वास-यात्रा के अंत में उनकी रक्षा और उद्धार देगा। जहां एक ओर उद्धार के मार्ग में अभाव और यातनाएं दिखती हैं, वहीं दूसरी ओर परमेश्वर की करुणा की स्थिरता भी प्रत्यक्ष है। इस वचन में क्रोध का समय भी एक मोड़ है—तब भी प्रभु अपने वचनों के अनुसार कृपा पूर्ण रहते हैं।

ईश्वर और भरोसे का संदेश

इस पदावली से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों पर केवल क्रोध नहीं बरसाते, बल्कि उनसे संबोधित करुणा भी पुष्ट करते हैं। क्रोध का अनुभव एक चेतावनी-चिह्न है कि उद्धार की राह से भटके नहीं जाना चाहिए; और वह चरण जो अभी थोड़ा अंधकार लगता है, भगवान की अनंत कृपा से बदल सकता है। यह संदेश यह भी दिखाता है कि परमेश्वर की दया और करुणा उसकी पहचान का केंद्र है, भले ही उसे सही कारणों से दायरे को मजबूत करना पड़े।

प्रमुख शब्द और छवि स्पष्टीकरण

  • क्रोध के आवेग में आकर: परमेश्वर की न्यायसंगत प्रतिक्रिया का चित्र—जो पाप के कारण उठता है, परंतु यह समय-सीमा है, न कि स्थायी निर्णय।
  • तुझसे मुँह छिपाया था: संकेत है कि अंतरात्मा में विचलन के क्षण आये, परन्तु यह दूरी भी परिवर्तनशील है—यही तो विश्वास का परीक्षण है कि उद्धारक की तरफ लौटना है।
  • अनन्त करुणा: उसकी करुणा स्थिर, अचल और अपरिमित है—यही प्रेरणा बनती है कि भविष्य के लिए आशा का धागा बना रहे।
  • यहोवा का वचन: परमेश्वर के स्पष्ट, विश्वासयोग्य वचन की राहत और प्रतिज्ञा की पुष्टि करता है।

अनुशीलन-आधार से जुड़े उल्लेख

इस आयत के साथ जुड़े विचार सामान्यतः नबियों के संदेश में बार-बार आते हैं—केवल क्रोध नहीं, बल्कि करुणा भी है, और दायित्वपूर्ण आस्था से उद्धार की दिशा बनती है।

अनुसंगत बाइबील Cross-References

1) रोमियों 3:25-26 — भरोसे के पथ पर परमेश्वर की निष्कलंक करुणा बताती है कि उद्धार न्याय के साथ कैसे संतोषप्रद हो सकता है।

2) इब्रानियों 4:16 — बाधाओं के बीच भी कृपा प्राप्त करने के लिए द्वार खुला है; प्रभु के पास निर्भयता से आएं ताकि अनुकम्पा मिले।

3) यिर्मयाह 31:34 — परमेश्वर के ज्ञान और माफ़ करने की इच्छा की नवीन प्रतिज्ञा; करुणा का नया अध्याय।

आज के जीवन में अनुप्रयोग

1) स्तिथि चाहे कितनी भी कठोर हो, परमेश्वर की करुणा की दिशा में आशा रखिए।

2) पाप के कारण हुए संकट में भी विश्वास की दिशा से लौटना संभव है; दया-प्रार्थना और संसार से अधिक परमेश्वर के वचन पर भरोसा बनाएं।

3) अपने हर दिन के निर्णयों में करुणा और दया को आत्मसात करें—यही वास्तविक उद्धार की जीवन-यात्रा है।

नोट: नीचे के उद्धरण के स्थान पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते विचारों का सार समाहित किया गया है। यदि आपको विशिष्ट शब्द-चयन चाहिए, तो मैं उद्धरण-उद्धृत अनुभाग दे सकता हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 54:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 39:23 (HINIRV) »
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कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बाँधूँगा, अर्थात् दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा। (भज. 89:28, नीति. 4:20, प्रेरि. 13:34)

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परदेशी लोग तेरी शहरपनाह को उठाएँगे*, और उनके राजा तेरी सेवा टहल करेंगे; क्योंकि मैंने क्रोध में आकर तुझे दुःख दिया था, परन्तु अब तुझसे प्रसन्‍न होकर तुझ पर दया की है।

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