Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 39:23 — संदर्भ में शब्दार्थ और संदर्भगत अर्थ
यहेजकेल की पुस्तक के भाग में यह वाक्य उस विस्तृत क्रम के अंत का संकेत देता है जिसमें ईश्वरीय दंड और उद्धार का क्रम स्पष्ट होता है। इस्राएלי के बंधनों से मुक्ति के पीछे कारण वही है जिन्हें भविष्यवक्ता यथार्थ दृश्यता के साथ दिखाते हैं: यहूदियों ने परमेश्वर के साथ विश्वासघात किया और उन्हें जो चांडालिनता-सी स्थिति मिली, वह उनके पापों के फलस्वरूप थी। यहाँ परमेश्वर का মুখ मोड़ना और उन्हें उनके शत्रुओं के हवाले कर देना यह दर्शाता है कि पाप की कार्रवाइयों पर ही परिणाम होते हैं, भले ही लोग देखते-समझते हों।
केंद्रीय意义
कथन का मूल आशय यह है कि यह्र लोग अपने अधर्म के कारण कष्टों के गृहनिष्ठ कारण बने—यानी वे अपने विश्वासघात और अधर्म के कारण बंदी बन गए। परमेश्वर का “मुँह मोड़ना” संकेत देता है कि उसके पास जो प्रतिरोध है, वह केवल दयालुता खाली नहीं, बल्कि पाप के परिणामस्वरूप अनुशासन की एक ऐसी योजना है जिसमें बर्बादी भी है पर अंततः उद्धार की आशा भी।’
两ती मुख्य थीम
संबद्ध पारायण-भाग
• 2 राजा 17 और 24 की घटनाओं से यहूदियों के त्याग और दण्ड का पथ स्पष्ट होता है; • डॉ। हेनरी, बार्न्स और क्लार्क के संस्थागत टिप्पणी के अनुसार, यह दृश्य यह दर्शाता है कि पाप करता है तो दण्ड भी आता है, परन्तु परमेश्वर उद्धार की योजना बनाए रखते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
हम प्रतिदिन यह देख सकते हैं कि आत्म-विश्वास के साथ व्यवहार और सत्यपरकता बनाए रखना कितना महत्त्वपूर्ण है। जब हम पाप के परिणामों से सामना करते हैं, तब भी परमेश्वर की दया और उद्धार की आशा बनी रहनी चाहिए। दूसरों के संदर्भ में यह संदेश दया और न्याय की संतुलित दृष्टि को प्रेरित करता है: अनुशासन के साथ प्रेम, सत्य के साथ करुणा।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 39:23 यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर अपने लोगों के पाप के कारण उन्हें दंड देता है, ताकि वे सचेत हों और वे मुए हों। साथ ही यह संदेश देता है कि गहरे अंधेरे के बीच भी परमेश्वर के उद्धार के रोशन कोट होते हैं, जो वापस लौटने पर मार्गदर्शक बनते हैं।
क्रॉस-रेफ़रेंस
• यशायाह 59:1-2 — पाप के कारण दूरी बढ़ना और ईश्वर की गरिमा का मत्भेद। यह स्पष्ट करता है कि पाप के कारण परमेश्वर अपने चेहरे से दूर रहते हैं, पर उद्धार संभव है।
• नहेमियाह 9:32-33 — नीतियों के पालन से मानवता पर परमेश्वर की करूणा और न्याय का संतुलन।
• रोम 11:22 — प्रभु की सच्चाई और उसकी कृपा के साथ रहना कितना आवश्यक है; कटुता के बजाय दूसरा अवसर
उद्धरण-नोट: नीचेMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मान्य उद्धरण जो सीधे टेक्स्ट में उपलब्ध हैं, यदि प्रकाशित हैं, केवल संक्षेप में प्रयुक्त हैं—इनके पूर्ण उद्धरण इस प्रस्तुति में नहीं दिए गए।