Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 39:28 का संदर्भ और अर्थ
यहोवा के अद्भुत उद्धारकार्य के बाद यह वचन यह संकेत देता है कि कबूतर, बंधन और पुनः नि:संदेह देश-वास के माध्यम से परमेश्वर अपनी जागरूकता और निकटता को दिखाते हैं। इस अध्याय में יהוה यहूदियों के लिए निर्णायक रूप से उनके देश में पुनर्स्थापना का समय निर्धारित करते हैं, ताकि वे परमेश्वर के चमत्कारिक उद्धार का अनुभव करें और उसके उद्धारकर्ता के रूप में उसकी सत्ता को पहचानें।
मूल संदेश
“तब वे जान लेंगे कि यहोवा हमारा परमेश्वर है… मैंने उनको जाति-जाति में बँधुआ करके फिर उनके निज देश में इकट्ठा किया है”। यह उद्धार का उद्देश्य केवल भौतिक पुनर्स्थापना नहीं है, बल्कि धार्मिक जागरण और परमेश्वर की प्रभुता को मान्यता है। पुनः एकत्र किए गये लोगों के बीच परमेश्वर अपनी सत्ता और वादों की पवित्रता को प्रदर्शित करते हैं, ताकि वे उसकी महत्ता में गिरोहित न रहें बल्कि उसकी महिमा पर जयकार करें।
मुख्य थीम
कुंजी क्रॉस-रेफरेंसे
1) इजेह 37–39 में उद्धार और पुनर्स्थापना का केंद्रीकृत संदेश—जीवन के चक्र में परमेश्वर की सत्ता और कृपा स्पष्ट होती है।
2) यिर्मयाह 30–31 की नई व्यवस्था और फिर से बसने की प्रेरणा—वीराने से वापस आना और ईश्वर के साथ नया अनुबंध।
3) मुस्लिमियोल 11:11–12 के संदर्भ में जातियों के बीच से आकर एकजुट होना—यह भी यहोवा के सार्वभौमिक उद्धार का संकेत है।
प्रयोजन और व्यवहारिक अनुप्रयोग
ईश्वर का यह वचन हमें बताता है कि भटकाव और दासता के समय भी परमेश्वर अपने उद्देश्य में सदा स्थिर रहते हैं। आज के विश्वासियों के लिए इसका संदेश—याद रखें कि कठिनाइयों के बीच भी परमेश्वर उद्धार की राह बनाते हैं; हमारी प्रतिक्रिया होनी चाहिए कि हम उसकी महिमा के लिए जीवन जीएं और दुनिया को उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण दें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 39:28 एक प्रमाण है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों को जाति-जाति में बँधुआ करके पुनः निज देश में ইकट्ठा करते हैं—ताकि वे जान लें कि वही यहोवा उनका परमेश्वर है। यह वचन न केवल ऐतिहासिक पुनर्स्थापना के बारे में है, बल्कि परमेश्वर की वचनों के साथ मानव जीवन के पुनर्निर्माण की आशा भी देता है।
संक्षिप्त उद्धरण (संदर्भित अनुभाग)
कहावत-सा अभिलेख: “तब वे जान लेंगे कि यहोवा हमारा परमेश्वर है… मैंने उनको निज देश में इकट्ठा किया है”—यह अमिट तथ्य कि उद्धार परमेश्वर के नाम के कारण और उसकी जाँच-परख के साथ आता है (यदि किसी पद के विशिष्ट शब्दों के सीधे उद्धरण उपलब्ध हों तो वही सुरक्षित रूप से उद्धृत करें)।