Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 39:7—इस्राएल के लिए परम पवित्र नाम की पुनः प्रतिष्ठा
यह वचन क्यों महत्वपूर्ण है? यह यहेजकेल के व्यापक उद्घोष का केंद्र बिंदु है: परमेश्वर अपने लोगों के बीच अपने नाम की महिमा, पवित्रता और पहचान को पुनः स्थापित करेगा। यह संदेश केवल भविष्य की आश्वस्ति नहीं, वरन यहूदियों के विभाजन के समय और बाबुल captivity के बाद एक नई पहचान की घोषणा है। जैसे-जैसे ईश्वरीय न्याय और उद्धार की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, वह अपने नाम के लिए मान-प्रतिष्ठा और अखंड पवित्रता के प्रति एक अचूक वचन देता है। यह कहता है कि उसके उपकार और निर्णय एक सतत सार्वजनिक प्रमाण होंगे; लोग जानेंगे कि वह यहोवा है, इस्राएल का पवित्र है।
संभव मूल संदर्भ और संदेश
इस章 में यहोवा अपने भविष्य के उद्धारकार्य का उद्घोष कर रहा है—रात के अंधकार के बीच भी वह अपने प्रभु-धर्म को प्रकट करने के लिए तैयार है। यह सूचीबद्ध घटनाओं के साथ जुड़ा है कि फिर यह्रून और अन्य राष्ट्रों के बीच यहोवा का नाम पृथ्वी भर में फैल जाएगा, और “मेरा पवित्र नाम फिर अपवित्र न होने दूँगा” का उद्घोष एक प्रकार की सार्वजनिक स्वीकृति है कि य_single_तत्व वही है जो अपने लोगों के साथ है।
मुख्य संदेश और थीम
पवित्र चरित्र पर आधारित क्रॉस-रेफरेंस
उद्धार और नाम की पवित्रता के विचार के साथ संबद्ध अन्य स्थलों से कुछ संयुक्त संकेत इस प्रकार हैं:
इस पाठ पर आधुनिक आध्यात्मिक अभिप्रेरणा
यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की पवित्रता और नाम की महिमा समुदाय के ऊपर न केवल theological तथ्य है, बल्कि जीवन-यात्रा की राह है। जब हम यह मान लेते हैं कि उनका नाम और पहचान सार्वजनिक महिमा के साथ जुड़ी है, तब हमारे जीवन की नैतिकता, चरित्र और समुदायिक व्यवहार में स्थिरता आती है। यह भी एक सतर्कता है कि किसी भी जीवन-यात्रा में यहोवा के नाम की प्रतिष्ठा-परकता सबसे ऊपर है—हम जो कुछ भी करें, उसे उनके नाम के अनुरूप समझें और करें।
छोटे-से सीखने योग्य बिंदु
संक्षिप्त devotional विचार
जब हम अपने व्यक्तित्व, व्यवहार और समुदाय में परमेश्वर के पवित्र नाम को उजागर करते हैं, तब हम उसके भीतर की सच्ची गरिमा को एक-दूसरे के जीवन में अनुभव कराते हैं। यहोवा का नाम केवल एक शब्द नहीं, वह एक जीवन-व्यवहार है: निष्ठा, दया, न्याय और उद्धार के प्रति आकर्षण। आज आप कौन-सा छोटा कदम उठाकर अपने जीवन को इस पवित्र नाम के अनुरूप बना सकते हैं?
यद्यपि यह प्रतिज्ञा एक ऐतिहासिक संदर्भ में है, परन्तु यह प्रेरणा आज भी है: हर क्षेत्र में जहां आप रहते हैं, वहां परमेश्वर को glorify करें—उसके नाम को अपवित्र न होने दें, और जहां भी आप जाते हैं, वहाँ लोग यह कहें कि यहोवा सचमुच पवित्र है.
निकट के क्रॉस-रेफरेंसों के साथ ध्यान दें कि कैसे अपने जीवन में आप यह विश्वास बढ़ा सकते हैं: अपने व्यवहार में सत्य-निष्ठा, दूसरों के प्रति दया, और परमेश्वर के नाम के सम्मान के लिए कदम उठाएं।