Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 2:1 — तत्काल संदर्भ और संदेश का प्रवेश
संकेत मिलता है कि भविष्यद्वक्ता यहेजकेल को परमप्रभु का स्पर्श प्राप्त हुआ है। वाक्य कहता है कि प्रभु ने उसे बुलाया, “हे मनुष्य के सन्तान, अपने पाँवों के बल खड़ा हो, और मैं तुझसे बातें करूँगा।” यह शुरुआत यह दर्शाती है कि מלא दिव्य संदेश की प्यास लेकर उठना है और दायित्व स्वीकारना है। यहेजकेल को एक अलग तरह के पथ पर धकेलता है—एक विश्वासयोग्य यात्री की तरह जो भविष्य के रहस्यों को सामने लाने के लिए समर्थ बनना पड़ेगा।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलती सीख
यहेजकेल 2:1 परमेश्वर के लिए एक मानवीय प्रतिक्रिया की मांग करता है: विश्वासपूर्वक खड़े होकर सुनना और आगे बढ़ना। स्तम्भित या भयभीत नहीं होना, बल्कि दिव्य वाक्य को ग्रहण कर निर्गत निर्देशों के अनुसार आचरण करना। यह संदेश प्रभु के मालिकाना अधिकार और निष्ठा की पुष्टि है— वह अपने दास से बातें करने और उसे निर्देश देने के लिए बुलाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दावली और चित्रार्थ
संबंधित आयतें
1) सेवान प्रेरित रूप से God’s commissioning दिखाने वाले अन्य दृश्य: भगवान यहेजकेल से स्पष्ट कहता है कि वह उसका पूर्वघोषक बनेगा और उसे विभिन्न दायित्व देंगे।
2) प्रेरितों के संदर्भ में भी प्रेरक संकेत मिलते हैं कि प्रभु अपने दासों के लिए नेतृत्व-आकार में बुलावा भेजते हैं, ताकि वे सत्य का प्रकाश प्रसार करें।
3) भविष्य के आघात और आशा की सुरक्षा के लिए परमेश्वर का आदेश सुनना और पालन करना- यह वही धुरी है जो यहेजकेल के संदेश को आगे बढ़ाती है।
पूर्वी और छाया संकेत—अन्वय
यहोत्सुक को विशेष रूप से एक “खड़े रहने” के चित्र के भीतर प्रस्तुत करता है—जहाँ भरोसा, प्रस्तुति और उत्तरदायित्व एक साथ चलते हैं। अगर हम इस क्षण को देखें, तो वह पहली बार का संपर्क है जहाँ एक नबी प्रभु के नये दायित्व की तैयारी में कदम बढ़ाता है, यह दिखाता है कि विश्वास व्यवहारिक मार्गदर्शन मांगता है।
आज के संदर्भ में उपयोगी आवेदन
संक्षिप्त समेकन
यहेजकेल 2:1 से यह स्पष्ट होता है कि प्रभु अपने दास से बातें करने के लिए बुलाते हैं और उसे “पाँवों के बल” खड़ा रहने की स्थिति में रखना चाहते हैं। यह संदेश विश्वास, आचरण और दायित्व की एक सामंजस्यपूर्ण शुरुआत है—जहाँ परमेश्वर के संवाद के अनुसार जीवन का मार्ग तय होता है।
संदर्भ पाठ: प्रेरितों के कार्य, और अन्य पुराने कर्मों में परमेश्वर का बुलावा और दायित्व स्वीकारने की धारणा मिलती है; भविष्य में आ रही आंशिक विपत्तियाँ भी प्रभु की सुरक्षा और मार्गदर्शन के आश्वासन के साथ जुड़ी रहती हैं।
क्लिप-नोट्स
यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचार अपेक्षित हैं यदि उपलब्ध हों, परंतु मौलिक पाठ को बनाए रखते हुए उनका पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है।