Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 61:1 पर टिप्पणी (HINIRV)
यह पद भविष्यवाणी करता है कि यीशु मसीहा ने आत्मा-प्रधान सेवा के लिए अपना अभिषेक पाया है और वे दयालु, उद्धारकारी कार्य को शुरू करने को भेजे गए हैं। यह संदेश विश्वामित्र की तरह अन्दर-बाहर परिवर्तन का संकेत है: खेदित मनों के लिए शांति, बंदियों के लिए स्वतंत्रता, और कैदियों के लिए छुटकारा।
पंक्तियों का संक्षेप और अध्याय के भीतर स्थान
61:1 में प्रभु यहोवा का आत्मा ऐसा अभिषेक दर्शाता है जो मसीह के लिए पर्याप्त और प्रभावशाली है। अभिषेक का लक्ष्य है: सुसमाचार सुनाने, दुखी लोगों को सांत्वना देना, बंधनों और कैद से मुक्ति का उद्घोष करना। यह समय-सीमा और कार्य की प्रकृति तालमेल से भरी है; यह यहूदियों के उद्धार के साथ-साथ सभी जातियों के लिए प्रकट होने वाले उद्धार का आरम्भ भी है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य सीख यह है कि ईश्वर का आत्मा अनुग्रहपूर्ण कर्म के लिए भेजता है, ताकि कमजोर, दयनीय और शोकग्रस्त को राहत मिले। न सिर्फ मन का दुख, बल्कि सामाजिक-आर्थिक-आत्मिक बंधनों से भी मुक्ति संभव हो। यह संदेश यीशु मसीह के प्रचार-कार्य के मूल में है; उद्धार केवल व्यक्तिगत पाप-छूट नहीं, बल्कि सामाजिक विभेद और दमन के विरुद्ध भी जीत है।
अन्य आयतों से तुलना
इन संबंधित प्रवचनों से स्पष्ट होता है कि उद्धार का प्रसार व्यक्तिगत चंगाई के साथ-साथ सामाजिक न्याय की दिशा में भी अग्रसर है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संकेत
1) लूका 4:18 – मसीह का म subsistence: “खुशखबरी… दूँ” का स्पष्ट उद्घोष; उद्धार की यह आचार-व्यवस्था सभी लोगों तक पहुंचती है।
2) मत्ती 11:5 – आंखों से पढ़े जाने वाला प्रतिफल: शान्ति, रोग-चंगा, कैद से मुक्ति की पुष्टि।
3) प्रेरितों के काम 10:38 – पवित्र आत्मा के प्रभाव से सेवक-कार्य की पुष्टि और प्रचार।
संक्षेप
यशायाह 61:1 यह बताता है कि परमेश्वर का आत्मा प्रेषित है ताकि उद्धार, शांति और स्वतंत्रता का उद्घोष हो। यह संदेश न केवल व्यक्तिगत पाप-छूट का आश्वासन है, बल्कि समाज-न्याय के लिए भी बुलावा है। मसीह के आगमन के साथ यह घोषणा पूरी होती है कि ईश्वर की राज्य-योजना दुखित मनों के लिए विश्राम और बंधनों के लिए छुटकारा लाने की है।
मुख्य उद्धरण (आवश्यक उद्धृत): “यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया…” (यशायाह 61:1) — Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के व्याख्या-उद्धरणों के समेकन पर आधारित विश्लेषण में प्रयुक्त विचार हैं।