Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 61:9 का संदर्भ और अर्थ
यशायाह 61 अध्याय में मसीह के आगमन की घोषणा है, जिसमें वह दिव्यता, उद्धार और स्वतंत्रता का संदेश लेकर आता है। 61:9 भय-संकेत करता है कि जो लोग परमेश्वर के साथ जुड़े हैं, उनकी संतति, उनके नाम और उनके वंश संसारभर में प्रसिद्ध होंगे। यह वचन किस प्रकार यदेव परमेश्वर के लोगों के लिए आशीष से भरे भविष्य का संकेत देता है, इसे समझना आवश्यक है।
केन्द्रित अर्थ
यह वचन परमेश्वर के लोगों के लिए एक आश्वस्ति है: उनकी सन्तान और वंश गौरवान्वित होंगे; वे देश-देश के लोगों के बीच प्रसिद्ध होंगे। पहचान का आधार है—“यह वह वंश है जिसको परमेश्वर ने आशीष दी है।” यह प्रसिद्धि आत्मिक पहचान—धार्मिक आशीष और दया-नम्रता के प्रतीक के साथ जुड़ी है, न कि merely राजनीतिक या सांसारिक प्रभाव के कारण।
मुख्य थीम
दो-तीन प्रमुख विषय
1) आशीषित वंश की पहचान: परमेश्वर के चुने हुए लोगों की सच्ची पहचान उनकी आन्तरिक परिवर्तनशील जीवनशैली में दिखती है—Purer दिल, दयाभाव, और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता।
2) विश्व-स्तर पर प्रभाव: यह प्रसिद्धि सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्रों के बीच साक्ष्य देती है कि परमेश्वर की इच्छा और आशीष विश्व स्तर पर फैली है।
3) उद्धारक सिद्धांत: यशायाह की यह घोषणा मसीह के आगमन के साथ पूर्णता पाती है—मसीही समुदाय में आशीष का प्रसार और उद्धार का प्रभाव फैलना।
अन्य समान संदर्भ
— मत्ती 5:14-16: जो लोग परमेश्वर की आज्ञाओं पर चलते हैं, वे संसार के लिये प्रकाश बनते हैं, ताकि दूसरों को देवयोजना दिखे।
— गैलेतीयों 3:29: जो मसीह में हैं, वे परमेश्वर के वंश की हैसियत में प्रवेश पाते हैं; उनके लिए आशीष की धारा खुली रहती है।
— प्रकाशित वाक्य 7:9: सब जातियाँ और लोग परमेश्वर के सिंहासन के सामने एकत्र होंगे; यह विश्वव्यापी आशीर्वाद की सूचक है।
व्यावहारिक विचार
1) अपनी पहचान पर विचार करें: क्या मेरी आचरण और जीवनशैली इस उद्देश्य से परखती है कि मैं परमेश्वर की आशीष का भागीदार हूँ? 2) समुदाय के भीतर निष्ठा: क्या मैं अपने समुदाय में प्रेम, करुणा और न्याय को बढ़ाने में योगदान दे रहा हूँ? 3) विश्वसनीय अवसर: क्या मैं अपने जीवन के छोटे-छोटे कार्यों से दूसरों को ईश्वरीय आशीष की तरफ आकर्षित कर रहा हूँ?
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 61:9 बताता है कि परमेश्वर के 선택े हुए लोगों की आशीष और परिचय वैश्विक स्तर पर मान्यता पाते हैं। यह पहचान आत्मिक परिवर्तन, सामाजिक सहभागिता, और उद्धार के संदेश से जुड़ी है। परमेश्वर का आशीषित वंश हर देश में प्रकाशित हो, यही आशा है, जो मसीह के आगमन और हमारी धारणाओं में एकता का संदेश देती है।
पवित्र संदर्भ-आख्यान
यहाँ कुछ वरिष्ठ टिप्पणीकारों के संकेतित विचार समाहित किए गए हैं:
– मैथ्यू हेनरी का सार: आशीषित बंधन और विश्व व्यापी पहचान का सबूत यह है कि परमेश्वर ने समूह को विशेष दया दी है।
– आलबर्ट बार्न्स का संकेत: यह वचन परमेश्वर की करुणा का सार्वभौमिक वितरण दर्शाता है और यशायाह के उद्धार के साथ जुड़ा है।
– एडम क्लार्क का निष्कर्ष: धार्मिक आशीष से परे, यह वचन लोगों के बीच एक समाज-निर्माण का दर्पण है।