यशायाह 61:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पर तुम यहोवा के याजक कहलाओगे*, वे तुमको हमारे परमेश्‍वर के सेवक कहेंगे; और तुम जाति-जाति की धन-सम्पत्ति को खाओगे, उनके वैभव की वस्तुएँ पाकर तुम बड़ाई करोगे। (1 पत. 2:5,9, प्रका. 1:6, प्रका. 5:10)

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यशायाह 61:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 61:6 का व्याख्यात्मक सार: याजकों की बुलाहट और दायित्व

मूल वाक्य यह कहता है कि भविष्य के उद्धारकर्ता के समय लोग यहोवा के याजक कहलाएंगे और परमेश्वर के सेवक के रूप में जाति-जाति की धन-सम्पत्ति के भागीदार बनेंगे। यह कथन एक महिमा-पूरित रोजगार और दायित्व की ओर संकेत करता है: परमेश्वर के लोगों के भीतर एक आंतरिक श्रद्धा-सेवा जो जाति-जाति के श्रोतों से समृद्ध होगी, ताकि याजकत्व और सेवाकृत दायित्व प्रकट हों।

साहित्यिक संदर्भ

यह वाक्य पहले ईश्वर की अनुग्रहकारी पुनरुत्थान-कार्य का उद्घोष है, जहाँ उद्धारकर्ता के आने पर लोग “याजक” बनते हैं। इसे पवित्रजीवन का एक नया आयाम माना गया है—यद्यपि पुराने विधान में याजकत्व विशेष प्रकार के लेवीय परिवार के लिए निर्दिष्ट था, पर भविष्य के समय में वह आंतरिक, आध्यात्मिक और सार्वभौमिक याजकत्व की ओर इशारा करता है। इस इशारे को 1 पतरस 2:5,9 और प्रकाशितवाक्य 1:6 और 5:10 जैसी शास्त्रगत अभिभाषितियों से जोड़ा गया है, जो यह दर्शाती हैं कि विश्वासियों का समुदाय इसे ग्रहण करेगा: परमेश्वर के सेवक, रचना के उद्धार के भागीदार।

पवित्र ग्रंथीय निहितार्थ

1) यहोवा के याजक कहलाने का मतलब है कि प्रार्थना, सेवा और न्याय के कार्यों के लिए धार्मिक जीवन की उच्च भूमिका; 2) “जाति-जाति के धन-सम्पत्ति को खाओगे” से आशय यह है कि वे राष्ट्र-राष्ट्र से अंश-वस्तु प्राप्त करेंगे—परमेश्वर की देनें उनके लिए उपयोगी होंगी, न कि केवल भौतिक संपत्ति का प्रदर्शन। 3) “हमारे परमेश्वर के सेवक” के रूप में यहूदी-जाति से बाहर के लोग भी उद्धार-ग्रहण में समान भागीदार बनते हैं, जो नई सच्चाई का संकेत है।

ऐतिहासिक-ग्रेस के साथ theological significance

यह वाक्य क्षण-निम्न नहीं, बल्कि एक नई व्यवस्था की घोषणा है: ईश्वर का राज्य केवल विधान-पालन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके लोगो की आंतरिक और सामाजिक भूमिका सर्वोच्च है—यह उद्धार के संदेश को साझा करना, दयालुता और न्याय के कामों में भागीदारी करना और दूसरों के लिए पवित्रता के नमूने बनना है। पुराने पाठ में याजकत्व विशेष था, पर नया आकाशीय लक्ष्य यह है कि सभी विश्वासियों में परमेश्वर के समान गुण और सेवक-चित्तत्ता विकसित हो।

अन्य ग्रंथों के साथ संबंध

- 1 पतरस 2:5,9: विश्वासी समूह को आत्मीय याजकत्व के रूप में संबोधित करता है, जो प Baptism और विश्वास के द्वारा आंतरिक पवित्रता से सज्जित होते हैं।

- प्रकाशितवाक्य 1:6; 5:10: जो दृश्यमान शासन के साथ प्रयोग होते हैं—विश्वासियों को राजसी याजकत्व और देव-सेवा के भागीदार के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

प्रतिबिंब के लिए प्रश्न

  • मेरे दैनिक जीवन में मैं किस प्रकार परमेश्वर के सेवक के रूप में व्यवहार कर रहा/रही हूँ?
  • क्या मैं समुदाय-सेवा और दान-तुष्टि के क्षेत्र में उद्धार से प्राप्त अधिकार का उपयोग कर रहा/रही हूँ?
  • युधिष्ठरित शक्ति के साथ मुझे कौन-सी नई चीज़ें करनी चाहिए जो लोगों की भलाई में सहायता दें?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 61:6 यह संकेत करता है कि उद्धार और नया राज्य एक सामूहिक, दयालु और सेवक-चित्त समाज का निर्माण करेगा। याजकत्व की शब्दावली पुराने विधान के भीतर प्रयुक्त थी, पर यहाँ यह एक व्यापक, आंतरिक और समावेशी दायित्व बन जाती है जिसमें विश्वासियों को परमेश्वर के सेवक के रूप में प्रतिष्ठा मिलती है और वे जाति-जाति की धन-सम्पत्ति के साक्ष्य से अपने उद्धार के प्रमाण को जगाते हैं।

84 शब्दों में स्रोत-स्वरूप उद्धरण (महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ)

प्रतीत होता है कि यहाँ इतिहास-भाषा में “याजक” और “सेवक” के समानार्थी प्रयोग से एक तब्दीली की ओर संकेत है: पुराने याजकत्व की सीमाओं से ऊपर उठकर शाश्वत याजकत्व विश्वासी समुदाय में व्याप्त होता है। मैथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की टिप्पणियों में इस उच्चारण को इसी आंतरिक-धार्मिक परिवर्तन के रूप में पढ़ा गया है। उनके स्पष्ट कथनों के संक्षिप्त सार नीचे उद्धृत हैं:

“प्रभु की सेवा में उपयुक्त जीवन ही सच्ची याजकता है; दयालुता और सत्य को व्यवहार में लाने वाला हर विश्वासी इस पद पर है।”

नोट: केवल संभावित ठीक शब्द-उद्धरण उपलब्ध हैं; यदि उनके निश्चित शब्द-उद्धरण मिलते हैं, वे नीचे दिए गए संदर्भों के साथ संकेतित किए जाएँगे।

cross-reference सहज प्रयोग

1) 1 पतरस 2:5,9 — विश्वासियों का आंतरिक याजकत्व; 2) प्रकाशितवाक्य 1:6 — सेवक-राजाओं के रूप में सम्मान; 3) प्रका. 5:10 — उद्धार के समुदाय की भूमिका और प्रभु-सेवा की स्थिति।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 61:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 पतरस 2:5 (HINIRV) »
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तब तू इसे देखेगी और तेरा मुख चमकेगा, तेरा हृदय थरथराएगा और आनन्द से भर जाएगा; क्योंकि समुद्र का सारा धन और जाति-जाति की धन-सम्पत्ति तुझको मिलेगी। (यिर्म. 33:9, योए. 2:26, यशा. 61:6)

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