यशायाह 55:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपये और बिना दाम ही आकर ले लो*। (यूह. 7:37, प्रका. 21:6, प्रका. 22:17)

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यशायाह 55:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 55:1 पर टिप्पणी — पूरी दृष्टि

यह पद राजा-प्रधानसी के समय के लिए नहीं, बल्कि हर प्यासे और भूखे परमेश्वर के आमंत्रण के रूप में ख्याति पाता है। यशायाह 55:1 सभी लोगों के लिए एक खुला निमंत्रण है— न तो आर्थिक स्थिति और न ही सामाजिक स्थान बाधक बनना चाहिए। यहाँ ईश्वर अपनी अनुदान-पूर्ण कृपा को खुला कर देते हैं: प्यासे आओ, मोल लो और खाओ; दाममुक्त दूध- दाखमधु।

पद के भीतर का अर्थ

पानी, दूध और दाखमधु—ये सभी प्रतीकात्मक रूप से जीवन, संतुष्टि और आनंद के स्रोत हैं। प्यासे (आत्मिक प्यास) और रुपया न हो (आर्थिक बाधा) दोनों को पंक्ति में एक साथ रखा गया है ताकि यह स्पष्ट हो कि परमेश्वर की कृपा सबके लिए है। यह उद्धार का प्रवेश द्वार है जो विशुद्ध कृपा पर टिका है, न कि मानव-योग्यता पर।

परिचयात्मक अध्यायिक संकल्पना

55वां अध्याय ईश्वर के प्रेम-घोषणा से आरम्भ होता है: प्यासे आओ, उद्धार पाओ, जो कुछ भी चाहो उसे मुक्त पा लो। यह अध्याय उद्धार के गहरे संबंध-निर्देशन का परिचय देता है— भली-भांति जिसमें से यीशु का आना और परमेश्वर का घर लोगों के साथ स्थिर संबंध बनाता है। इस संदर्भ में 55:1 एक कड़ी है जो पुराने नियम से नए पर पहुंचने की राह दिखाती है: ईश्वर की कृपा बिना शर्त और बिना शर्त के भीतर समान रूप से है।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा

  • ईश्वर की कृपा सभी के लिए है — यह दाम-रहित है और सभी प्यासों के लिए है।
  • आत्मिक भुगतान-शुल्क की चिंता नहीं; आकर खाओ और जीवन पाओ।
  • ईश्वर के उद्घोषण और उसकी योजनाओं में भागीदारी सक्रिय है— भला आप क्यों पीछे रहें?

अन्य बाइबल पाठों के साथ तुलना

यह उद्धरण यूह 7:37 के अभिमुखी भोजन-आयतन से मेल खाता है, जहाँ यीशु कहते हैं कि व्यक्ति से भेजे गए आत्म-जीवन के स्रोत में प्यासे पानी के स्रोत से पिलेंगे। साथ ही प्रका 21:6 और 22:17 में भी परमप्रभु की यह उद्घोषणा मिलती है कि चाहने वाला कुछ भी मुक्त पALS्कया जा सकता है—यह एक अंतर्निहित क्रिया है जो ईश्वर की कृपा की सार्वभौमिकता को पुष्ट करती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

- जिनके पास संसाधन नहीं भी हैं, वे भी ईश्वर के निमंत्रण में भाग ले सकते हैं; आस्था का पहला कदम हाेना चाहिए।

- आत्मिक प्यास को पहचानना और उसे ईश्वर के पास ले जाना हमारे दैनिक जीवन में संतुष्टि लाता है।

- दया और साझा-समुदाय के साथ सेvā में वृद्धि होती है, क्योंकि उद्धार केवल व्यक्ति-व्यक्ति के लिए नहीं, समुदाय के लिए भी है।

संदर्भ-क्रॉस-रेफरेंसेस

- यूहन्ना 7:37: यीशु के जीवन-आशीर्वचन का पूर्ण संदर्भ। यह बताता है कि आत्मा-जीवन कैसे खुलता है जब कोई यीशु के निमंत्रण पर विश्वास करता है।

- प्रकृति 21:6; 22:17: परमेश्वर की इच्छा और उसके वचन की उपलब्धता के संकेत देते हैं कि लेने वाला स्वयं उत्तर-क्रिया में भागीदार बनता है।

संक्षेप निष्कर्ष

यशायाह 55:1 में परमेश्वर का निमंत्रण स्पष्ट है: प्यासे आओ, बिना दाम, बिना बाधाओं के, और जीवन की सत्य-परिणति पाओ। यह शाश्वत उद्धार की शुरुआत है, जहाँ कृपा मानव-योग्यता से ऊपर है और जहां हर किसी के लिए खुला द्वार है।

कहनी: यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि ईश्वर की कृपा का स्रोत सदा खुला है; हमें केवल आकर अपनी प्यास को स्वीकारना है और समस्त जीवन-भार उसे सौंप देना है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 55:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यूहन्ना 7:37 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यूहन्ना 7:37 (HINIRV) »
फिर पर्व के अन्तिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकारकर कहा, “यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए। (यशा. 55:1)

प्रकाशितवाक्य 21:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 21:6 (HINIRV) »
फिर उसने मुझसे कहा, “ये बातें पूरी हो गई हैं। मैं अल्फा और ओमेगा, आदि और अन्त हूँ। मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंत-मेंत पिलाऊँगा।

यशायाह 44:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 44:3 (HINIRV) »
क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर धाराएँ बहाऊँगा; मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी सन्तान पर अपनी आशीष उण्डेलूँगा। (प्रका. 21:6, योए. 2:28)

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