Old Testament
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यशायाह 55:7 — संक्षिप्त संदर्भ
यह पद शेष यशायाह के उस आमंत्रण का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर अपनी कृपा और क्षमा का बुलावा दे रहा है (यशा. 55:1–3)। पूरे अध्याय में ईश्वर लोगों को मुफ्त अनुग्रह, सत्य व स्थायी मार्ग पर आने का निमंत्रण दे रहा है। पद 7 व्यक्तिगत और सामूहिक पश्चाताप की आवश्यकता पर जोर देता है: दुष्ट का लौटना तथा अनर्थकारी का अपने विचार बदलना।
मुख्य अर्थ
वचन स्पष्ट रूप से कहता है कि दुष्ट (जो अनैतिक कर्मों में लगा है) और अनर्थकारी (जो भ्रष्ट या विनाशकारी सोच रखता है) को अपनी राह छोड़कर यहोवा की ओर लौटना चाहिए। लौटने पर परमेश्वर दया करेगा और पूरी रीति से क्षमा देगा। यहाँ “दया” और “क्षमा” ईश्वर की दयालु प्रवृत्ति और अपराधों को मिटाने की शक्ति दोनों सूचित करते हैं।
प्रमुख विषय
संबंधित पद और उनका संक्षिप्त सम्बन्ध
- काननव्यवस्था की पुनरावृत्ति: यूहन्ना 6:37 में भी यह विचार मिलता है कि जो भी पिता दिएगा उसे परमेश्वर स्वीकार करेगा; दोनों स्थानों पर आमंत्रण और स्वीकृति का विचार मिलता है।
- प्रेरितों के उपदेश: प्रेरितों के कामों में (प्रेरितों के काम 3:19) भी मसीह की ओर लौटकर पापों से लौटने और ठीक किए जाने का आह्वान है; यह यशायाह के आमंत्रण के साथ साम्य रखता है।
- दाऊद का अनुभव: भजन 51 में दाऊद की पश्चाताप और परमेश्वर से क्षमा की याचना यशायाह 55:7 की भावभूमि से मेल खाती है—वह भी नयी जीवन की चाह रखता है।
व्यावहारिक ध्यान
यह पद आज के जीवन में प्रत्यक्ष चुनौती देता है: कहीं हमारी सोच-विचार या दैनंदिन व्यवहार में ऐसी आदतें तो नहीं जो परमेश्वर से अलगाव पैदा करती हों। वास्तविक लौटना केवल क्षमा माँगना नहीं, बल्कि उस ओर बढ़ना है जहाँ जीवन, न्याय और प्रेम की शिक्षा है। क्षमा का आश्वासन हमें भय रहित हृदय बनाने के लिए प्रेरित करता है ताकि हम सच्चे बदलाव को अपनाएँ।
छोटा समापन
यशायाह 55:7 एक सरल परंतु शक्तिशाली संदेश देता है: परमेश्वर के पास लौटने का मार्ग खुला है, और लौटने वालों के प्रति उसका उत्तर दया और पूर्ण क्षमा है। यह पद हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की मुक्ति आमंत्रण पर आधारित है—आइए, अपने विचार और व्यवहार में वास्तविक परिवर्तन लाएँ और दया में आश्रित हों।
संदर्भों का संक्षिप्त उद्धरण
Matthew Henry ने सरल शब्दों में कहा है कि परमेश्वर के पास लौटने का आश्वासन पापियों के लिए जीवन का मार्ग खोलता है; Albert Barnes ने भी इस पद को पश्चाताप और दया के व्यावहारिक परिणामों पर प्रकाश डालते हुए समझाया है। (उपरोक्त वाक्यांश संक्षेप हैं; कोई लंबा उद्धरण शामिल नहीं किया गया।)