यशायाह 55:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और जिससे पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएँ खाने पाओगे और चिकनी-चिकनी वस्तुएँ खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।

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यशायाह 55:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 55:2 पर हिन्ही में साधारण तात्पर्य

सीधे अर्थ का निष्कर्ष: परमेश्वर कहता है— तुम बिना眞 भोजन के लिए धन क्यों लगाते हो? जो भोजन नहीं देता, वह छोड़कर मुझे सुनो, तब तुम अपने मनचाहे आहार के बजाय उत्तम वस्तुओं से सन्तुष्ट होगे। यहाँ आत्मिक और सांसारिक भयभीत माँग के बीच चयन की पुकार है: केवल भौतिक खुराक नहीं, बल्कि ईश्वर का वचन और उसकी कृपा ही सच्चे खाद्य हैं।

पर्श्वभूमि और संदर्भ

यशायाह का यह भाग परमेश्वर की दयालु बुलाहट का भाग है, जब इज़राइल के बुरे समय में भी वह आस्था और निर्भरता के पुनर्निर्देशन की बात कहते हैं। शास्त्रों में यह आग्रह है कि लोग दुष्प्रभावी उपासना और सांसारिक लाभ में लिप्त न रहें, बल्कि परमेश्वर की ओर ध्यान दें और उसकी राह पर चलें। यहां “भोजनवस्तु” से तात्पर्य केवल भोजन तक नहीं, बल्कि हर वह चीज है जो मनुष्य को शांति और संतुष्टि देती है, मगर जो सत्य में ईश्वर की कृपा के बिना बच नहीं सकती।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • प्रलोभन बनाम प्रसाद: लोग अक्सर सांसारिक संपत्ति, स्वादिष्ट पदार्थ या सुविधाओं के पीछे दौड़ते हैं, परन्तु वे आध्यात्मिक आस्थाओं से वंचित रहते हैं। परमेश्वर कहता है— असली आहार तो मेरी कृपा और वचन में है।
  • दिल की दिशा: “मेरी ओर मन लगाकर सुनो” से संकेत मिलता है कि वास्तव में भोरी शक्ति का आह्वान भक्त की आंतरिक प्रेरणा से जुड़ना है, न कि बाहरी भोग के लिए.
  • उत्तम वस्तुएँ: यह वाक्य तभी स्वादिष्ट और टिकाऊ होंगे, जब वे परमेश्वर के मार्ग के अनुरूप हों। शास्त्र में संतुष्टि का आधुनिक रूप शारीरिक भोजन नहीं, बल्कि ईश्वर की नित नई करुणा और कृपा का अनुभव है।

संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका छोटा नोट

  • यशायाह 55:1— आह्वान: आओ, जो कुछ भी बिना पैसे के पाने को तैयार हो, वह सभी समानता में भाग लें; यह परमेश्वर के दयालु बुलावे की पृष्ठभूमि है।
  • मत्ती 4:4— ईश्वरीय वचन से भोजन की वास्तविकता: मनुष्य केवल अन्न से नहीं जी सकता, बल्कि हर शब्द जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, वह जीवित है।
  • यूत 2:13— उद्धारकर्ता के आह्वान में भोजन और आह्वान का संगम: विश्वासियों को आत्मिक आहार देकर संतुष्टि मिलती है।

इन क्रॉस-रेफरेंस से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के वचन के साथ हमारी सहभागिता सबसे गहरी संतुष्टि और स्थायी आहार देती है, न कि केवल सांसारिक वस्तुएँ।

ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से एक-एक उद्धरण (संक्षेप)

मैथ्यू हेनरी ने कहा है कि परमेश्वर की सेविका संतोष तभी मिलती है जब हमारी भूखें केवल भौतिक पदार्थों पर नहीं, बल्कि उसके वचनों पर टिके।

एलबर्ट बर्न्स ने संकेत किया है कि परमप्रभु का आह्वान शरीर के भोजन से ऊपर मन의 आत्मिक भोजन पर केंद्रित है, ताकि हमारे हृदय को उसकी कृपा से भरा जा सके।

एडम क्लार्क ने समझाया कि “मेरी ओर listen” का अर्थ है सही आस्था से प्रभु के पास लौटना, जिससे वास्तविक संतुष्टि और शांति मिलती है।

संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यावहारिकtakeaway

हमारी प्राथमिकता वही हो जहाँ ईश्वर की वाणी, उसकी कृपा और उसकी सामर्थ्य सबसे ऊपर हों। यदि हम केवल भौतिक सुखों के पीछे भागते हैं, तो अंतःमन खाली रहता है; परन्तु यदि हम प्रभु की ओर मोड़कर उसकी राह पर चलते हैं, तो वे “उत्तम वस्तुएँ” और “चिकनी-चिकनी वस्तुएँ” भी हमारे लिए वास्तविक संतोष बन जाती हैं—आत्मा को स्थायित्व, और जीवन में नई freshness देते हुए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 55:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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