Old Testament
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यशायाह 43:1 पर टिप्पणी
सीधी बात का अर्थ परमेश्वर यह कहता है: तू डर मत, क्योंकि मैं तुझे पहचानकर बुलाने वाला हूँ; तू मेरा है, मैं तेरा हूँ। यह वचन परम विश्वास और सुरक्षा की दृढ़ गारंटी है कि ईश्वर अपने पहचाने हुए लोगों के साथ है और वे उसके नाम से पहचाने जाते हैं।
पृष्ठ भूमि और संदर्भ
यशायाह 40–66 के भाग को सामान्यतः “यशायाह के निरीह-उद्धार” के खण्ड के रूप में जाना जाता है। यहाँ यहूदा के लोगों को बंधन से लौटने और भविष्य में ईश्वर के आशीर्वाद के लिए प्रेरित किया गया है। 43:1 विशेष रूप से पुनरुत्थान-आशा देता है: यह बताता है कि परमेश्वर का चुनाव और बुलावा व्यक्तिगत है—नाम लेकर पुकारना और अपनापन-बोध। यह जोर देता है कि दर्द-पूर्ण वर्षों के बाद भी उद्धारकर्ता के साथ संबंध बना रहता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
मूल संदेश के प्रमुख संकेत
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
यहोवा के नाम से बुलाने की पुष्टि अन्य पुस्तकों में भी मिलती है—उद्धार और पहचान पर बल देती है। उदाहरणार्थ, परमेश्वर ने दूसरे स्थानों पर भी अपने लोगों को उनके नाम से बुलाने की बात कही है ताकि उनके आतुर विश्वास को प्रेरणा मिले।
व्यावहारिक निष्कर्ष
व्यक्ति के रूप में आप किसे संबोधित मानते हैं, यह आपकी आत्म-विश्वास की दिशा तय करता है। जब आप कठिन समय में खुद को ईश्वर के नाम में पहचाने हुए देखते हैं, तब डर कम होता है और भरोसा बढ़ता है कि आप उनके उद्धार में सुरक्षित हैं।
सूचना और उद्धरण संकेत
यहां दिये गए विचार Yशायाह 43:1 के संदर्भ में विशिष्ट सार्वजनिक डोमेन टीका-योग्य टिप्पणीकारों से समेकित हैं। नीचे उल्लेखित चारित्रिक उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं:
संक्षिप्त संदर्भ
यशायाह 43:1 से जुड़े स्पष्ट क्रॉस-रेफरेंसेज: (1) परमेश्वर का बुलावा और पहचान; (2) उद्धार का व्यक्तिगत दायित्व; (3) भय-रहित भरोसे की प्रेरणा। यह सभी बिंदु प्रायः वरना-प्रेरणा के साथ एक ही कथन में समाहित होते हैं कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ है और वे उसके नाम से पहचाने जाते हैं।