भजन संहिता 100:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

निश्चय जानो कि यहोवा ही परमेश्‍वर है उसी ने हमको बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं*।

भजन संहिता 100:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 100:3 – संदर्भगत परिचय

गीत 100 एक परमपुरोहित, आशीर्वाद और धन्यवाद के गीत के रूप में किया गया है जो इस बात को केंद्रित करता है कि परमेश्वर हमारा निर्माता है, वही हमारा अधिकार और हमारा पालनहार है। वह यहोवा है—एक ऐसा परमेश्वर जिसे जानना, उसका उपासना-योग्य बनना और उसकी कृपा में आना चाहिए। इस तथ्य पर बल देत हुए भजनकार यह बतलाते हैं कि हमारा जीवन उसका है और हम उसकी प्रजा हैं, यानी उसका चयनित समूह जो उसकी भेड़-ब crराहता है।

मुख्य अभिप्राय

यह Verse संसार की मोल-तोल के बीच एक ठहराव देता है: हमें यकीन है कि परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है, और हमने उसी से प्राप्त जीवन को स्वीकार किया है। यह आत्म-स्वीकृति भक्ति का पहला चरण है—स्वीकारना कि हमारी संपत्ति नहीं बल्कि उसकी है; हमारा अस्तित्व और हमारी सुरक्षा उसकी कृपा पर निर्भर है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  1. “यहोवा ही परमेश्वर है” बताता है कि ईश्वर का अधिकार ब्रह्माण्ड की रचना से लेकर हर परिस्थिति तक पूर्ण है।
  2. “हम वही के हैं” यह संकेत देता है कि ईश्वर ने हमें अपनी संतान, अपनी गायन-भेड़ें के रूप में पहचाना है—हम उसकी सरपरस्ती में हैं।
  3. “हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं”—यह एक साहचर्य और कर्तव्य का बोध कराता है कि हम उसकी नीतियों के अनुसार चलें और उसकी देखरेख में रहें।

संबंधित बाइबल संदर्भ

इन बिंदुओं को गहराई से समझने में नीचे के कुछ क्रॉस-वर्से लाभदायक हैं:

  • यूहन्ना 10:14-15 से—वह बताता है कि ईश्वर का चरवाहा बनना क्या है और उसकी सुरक्षा कैसे मिलती है; यह भजन के “चराई की भेड़ें” के रूपक को व्यवहारिक रूप देता है।
  • 1 कुरिन्थियों 6:19-20—हमारे शरीर और जीवन का ईश्वर के लिए होना; उसकी प्रजा होने की जिम्मेदारी।
  • उत्पत्ति 1–2—ईश्वर द्वारा सृष्टि का निर्माण और उसका अधिकार, जो “यहोवा ही परमेश्वर है” के विश्वास को आधार देता है।

व्यावहारिक विचार

कल-परसों की चिंता के बीच यह Verse हमें स्मरण कराती है कि हमारे अस्तित्व का स्रोत एक परमेश्वर है—जो हमें बनाते हैं, रखते हैं और रास्ता दिखाते हैं। प्रतिदिन के निर्णयों में यह विचार रखें: क्या मैं उसका स्वरूप बनकर चल रहा हूँ? क्या मेरा व्यवहार उसकी प्रजा जैसी मांगों के अनुरूप है? आवश्यकता हो तो अपने दैनंदिन आदतों—समय व्यवस्थित करना, आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त करना, तथा किसी की सेवा में सहभागिता—ये तीनों रूप में अपने जीवन को समेकित करें।

संक्षिप्त समापन

भजन 100:3 एक स्पष्ट उद्घोषणा है: परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता और पालनहार है; हम उसकी रचना हैं, उसकी प्रजा हैं और उसकी चराई की भेड़ें हैं। इसका संदेश हमें आत्म-स्वीकृति, भक्ति और समुदाय के प्रति सच्चे उत्तरदायित्व की याद दिलाता है।

शब्दार्थ और उद्धरण (संक्षेप)

यहाँ तीन प्रमुख प्राचीन टिप्पणीकारों के सारांश निष्कर्षों का संयुक्त प्रभावः

  • Matthew Henry: परमेश्वर के साथ संबंध में आस्था और नियंत्रण मानना—हमारी सुरक्षा उसका संरक्षण है।
  • Albert Barnes: ईश्वर के स्वामित्व की मान्यता से जीवन के उद्देश्य का स्पष्ट होना; हमारी पहचान उसकी संतान के रूप में।
  • Adam Clarke: रचना-स्वामीत्व पर जोर, और भक्ति के लिए सम्मानित जीवन की आवश्यकता।

कृपया ध्यान दें: ऊपर के संबंध-व्याख्यात्मक बिंदु सामान्य टिप्पणी के रूप में प्रस्तुत हैं; उद्धरणपूर्ण शब्द-शब्द अंश केवल उद्देश्य हेतु नहीं, बल्कि विचार के मार्गदर्शन के लिए संक्षेपित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 100:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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