भजन संहिता 136:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:1 का प्राथमिक परिचय

यह भजन संहिता का उपस्थिति आरम्भ एक गीतात्मक चिह्न है—यहोवा की महान कृपा के स्मरण से भरा हुआ एक सामूहिक धन्यवाद-गीत। हर दफे एक पुकार: “याहोवा का धन्यवाद करो”। यह सूत्र-वाक्य पाठक को सिखाता है कि परमेश्वर के प्रति हर पल आभार कैसे बनना चाहिए, विशेषकर उनके स्थिर प्रेम के प्रकाश में।

ईश्वर के बारे में पाठ से निकलने वाले तथ्य

यहोवा के सहयोग, भलाई और करुणा—इन तीनों का पुनरुक्ति-विधि से पाठक पर प्रभाव डालता है। भजनकर्ता बतलाते हैं कि ईश्वर की भलाइ निरंतर है; उसकी करुणा सदा की है और हर समय घटनाओं में नई ऊर्जा से प्रकट होती है। यह संकेत देता है कि ईश्वरको सम्मानित करने का आधार केवल घटनाओं की विविधता नहीं, बल्कि उसकी स्थिरता और दया है।

क्रमबद्ध शब्दार्थ और चित्रण

- यहोवा (याहोवा): अपने लोगों के साथ उत्कृष्ट प्रतिज्ञाओं और विश्वासयोग्यता की प्रतिमूर्ति।
- धन्यवाद करो: एक क्रिया जो ईश्वर के सामने विनम्रता और प्रेम का प्रदर्शन है।
- भला है: उसकी कार्य-शैली का सार—न केवल अच्छा, बल्कि पूर्ण, पवित्र और विश्वसनीय।
- करुणा सदा की है: उसकी करुणा पूर्व-निर्धारण नहीं, बल्कि निरन्तर और असीमित है। यह विश्वास को सुरक्षा और आशा देता है।

संदर्भित अनुभाग और तुलनात्मक अध्ययन

यह भजनार्थ स्मरण देता है कि सच्चे उपासक जीवन भर प्रभु की दया के प्रकाश में चलते हैं। संबंधी विचारधाराएँ जो अन्य कबूलें रहती हैं, वे यह सत्य मजबूत करती हैं कि ईश्वर के गुण स्थिर हैं—बुरे क्षणों में भी उसकी करुणा सक्रीय रहती है।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)

  • भजन 100:4 — आभार के साथ प्रवेश करने का सम्बोधन: “धन्य है वह जो प्रभु के नाम से स्वागत करता है; धन्यवाद दो।”
  • कुलुस्सियों 3:15 — शांति में एकता और कृतज्ञता का जीवन: हर पल प्रभु के कामों के लिए धन्यवाद दें।
  • यशायाह 63:9 — उसकी करुणा किरणें विपत्ति के समय भी साथ रहती हैं।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि आभार केवल एक भावना नहीं, बल्कि विश्वास की गतिशीलता है जो दूरी घटाकर संबंध मजबूत करती है।

Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षिप्त उपयोगी विचार

Matthew Henry बताते हैं कि यहोवा की करुणा सदा की है, क्योंकि वह सदा वही है—जो अपने लोगों के प्रति प्रेम में स्थिर है। Albert Barnes याद दिलाते हैं कि धन्यवाद एक सक्रिय धार्मिक क्रिया है, जिसमें हमारा सामना ईश्वर की महान कृपा से होता है। Adam Clarke जोड़ते हैं कि भजन-गीत की पुनरावृत्ति श्रद्धा के दृढ़त्व को दर्शाती है—जहाँ हर बार याद दिलाया जाता है कि परमपिता की दया अटल है।

आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • दैनंदिन जीवन में छोटे–बड़े सभी चरणों में धन्यवाद का अभ्यास करें—खुशीपूर्ण और कठिन परिस्थितियों दोनों में।
  • करुणा के संकेत—दूसरों के प्रति करुणामय व्यवहार और सहयोग—को अपनी धारा बनाएं।
  • आस्था में स्थिरता बनाए रखें: जब समय कठिन हो, तब भी यह मानें कि परमेश्वर की करुणा सदा है और उसका भला निष्कलंक रहता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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