भजन संहिता 136:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

स्वर्ग के परमेश्‍वर का धन्यवाद करो, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:26 का अर्थ

इस पद में भजनकार परमेश्‍वर की असीम करुणा के लिए नहीं, बल्कि उसकी करुणा के अनंत स्थिरत्व के लिए धन्यवाद देने का आग्रह करते हैं। “स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करुणा सदा की है” से संकेत मिलता है कि ईश्वर के श्रेष्ठ गुणों में करुणा उसकी पहचान है और यह गुण हर समय, हर परिस्थितियों में नवीन है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह भजन-संहिता एक प्रार्थनात्मक चीत्कार नहीं, बल्कि एक सामुदायिक धन्यवाद-गान है जिसमें हर एक पंक्ति के साथ एक बार-बार कहा गया कहावत सम्मिलित है: “क्योंकि उसकी करुणा सदा रहती है।” सामूहिक स्मरण से लाभ यह है कि यह पीड़ा के बीच भी स्थिरता और विश्वास की पुष्टि देता है।

विश्लेषण के बिंदु

  • स्वर्गीय परमेश्वर की सृष्टि-और-कार्य की व्यापक सत्ता का acknowledgement; निःशुल्क करुणा की निरंतरता की अनुभूति।
  • करुणा एक ऐसी स्थिर गुण है जो समय-सीमा नहीं मानती; हर दिन और हर घटना के बीच उसकी कृपा दिखती है।
  • धन्य और उत्तम स्वर में धन्यवाद—व्यक्ति के मन को संभालना और समुदाय को एकता के बंधन में बाँधना।

संबद्ध पद और उनका संक्षिप्त अर्थ

यहोवा के करों में कीर्ति नहीं है: अन्य आयामों में भी करुणा का यह गुण ही जो राष्ट्र-यात्रा को संभाले।

करुणा सदा रहती है: यह एक दिव्य नियम है, जो नित्यकाल के साथ नहीं झुकता, बल्कि परंपराओं से ऊपर है।

क्रॉस-रिफरेंसेस (संवाद से जुड़ी सूचनाएं)

1) भजन 103:17— प्रभु के करुणा और प्रेम का स्थायित्व वर्णित है; यह भी कहता है कि उसकी करुणा उन पर निर्भर है जो उसे डरते हैं।

2) यूहन्ना 1:17— करुणा और सत्य का निर्वाह; पुराने नियम की करुणा नए नियम के प्रति भी निरंतर है।

3) रोम 12:12— आशा, धैर्य और सेवाभाव के साथ प्रभु की करुणा को निरंतर स्मरण करने की पालनाकांक्षा।

संक्षेप में यह दिखाता है कि करुणा परमेश्वर के नये और पुराने नियम दोनों में केंद्रीय स्थान पर है, और उसका प्रमाण भक्ति-जीवन के हर कदम में मिलता है।

सूक्ष्म-नोट्स (पौराणिक-पूर्व विश्लेषण से कम, व्यवहारिक समझ)

यह पद समुदाय के लिए एक अनुस्मारक है कि आन्तरिक विश्वास और सार्वजनिक आचरण दोनो में करुणा-युक्त जीवन आवश्यक है। समृद्धि-या-कमजोरी—करुणा की स्थिरता ही समय की कसौटी है।

चैलेंज और व्यावहारिक takeaway

  • हर दिन अपने भीतर की करुणा को जागृत रखें—किसी तकलीफ में सहायता देना एक प्रकार का धन्यवाद है।
  • बाहरी प्रदर्शन से अधिक आंतरिक समर्पण पर ध्यान दें; करुणा-सिद्धांत से संसार में स्थिरता आती है।

इस संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सुविचारित निष्कर्ष संक्षेप में यही संकेत देते हैं: करुणा परमेश्वर की सर्वदा-रहने वाली चर्या है, जो हमारे युद्धों और खुशियों दोनों में समान रूप से संरक्षक है. (उद्धरण के लिए आवश्यक पाठांश अभिप्रमाणित हैं।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करुणा सदा की है।

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ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कुछ दिनों तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्‍वर के सम्मुख उपवास करता और यह कहकर प्रार्थना करता रहा।

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उसने उनसे कहा, “मैं इब्री हूँ; और स्वर्ग का परमेश्‍वर यहोवा जिस ने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूँ।”

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