भजन संहिता 136:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:6 का भावार्थ और संदर्भ

यह पद विश्व की सृष्टि-निर्माण और पृथ्वी के अस्थिरता के बीच परमकृपालु प्रभु की गहरी करुणा को दर्शाता है। भजन 136 एक बार-बार उठती निष्ठा-गीत है जिसमें हर मधुर, हर आशीर्वचन के साथ यह दोहराया गया है कि “करुणा सदा की है”—यानी परमेश्वर की दया ब्रह्मांණ්ඩ के हर समय, हर स्थिति में बनी रहती है। यह भजन ईश्वर के विशाल रूप-रेखा के सामने मस्तक झुकाने और उसकी कृपा पर पुनः भरोसा स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

मुख्य अर्थ

पद का केंद्र यह है कि परमेश्वर ने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है—यही सृष्टि के आरंभ का निर्णायक सच है। इसके साथ जोड़ा गया “उसकी करुणा सदा की है”—यह बताता है कि निर्माण के हर क्षण में, हर चट्टान, हर समुद्र, हर अणु में उसकी दया सक्रिय है। यह दया न केवल भौतिक सुरक्षा देती है, बल्कि यह भरोसे के साथ यह बताती है कि परमेश्वर अपने चहेतों के साथ स्थिर है, उनकी जरूरतों का ध्यान रखता है और संकट के समय भी मार्ग दिखाता है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • परमेश्वर की सृजन-योद्धा עבר: पृथ्वी को जल से ऊपर फैलाना एक शक्ति-कार्य है जो उसके प्रेम की रचना-निष्ठा को दर्शाता है।
  • करुणा की निरंतरता: “करुणा सदा की है” पूर्वित शब्द के माध्यम से भगवान की दया का निरंतर, अपरिवर्तनीय स्वर उद्घोषित होता है।
  • विश्वास की मजबूती: भक्ति-भाव में यह मानना कि ईश्वर हर पल साथ है, हमारे विश्वास को ठहराव देता है और उम्मीद को बनाये रखता है।

सम्बन्धित पद और विचार

• ऋषियों के भजन में ईश्वरीय सृष्टि के बारे में बार-बार दया की याद दिलाई जाती है—यह प्रकृति के हर चक्र में परमेश्वर की निष्ठा का प्रमाण है।

• अन्य स्थान जहाँ परमेश्वर की दया और सृष्टि-नियोजन को समवय में दिखाया गया है, उनमें प्राकृतिकiders की रचना-योग्यता पर बल है, जैसे कि जल-स्थापना और आकाश-विस्तार।

• विश्वास के समुदाय के लिए, यह पद एक स्मरण-चिह्न है कि संकट की घड़ियों में भी प्रभु की दया सक्रिय रहती है, जिससे प्रार्थना और आस्था को बल मिलता है।

व्यावहारिक चिंतन

जब हमें जीवन के बहते waters जैसी परिस्थितियाँ मिलें, तब इस पद के साथ याद करें कि परमेश्वर ने पृथ्वी को स्थिर किया है और उसकी दया हर क्षण आपके साथ है। प्रतिदिन की छोटी-छोटी घटनाओं में भी उसकी निष्ठा देखिए—भोजन, श्वास, सुरक्षा—ये सब उसकी दया के संकेत हैं। प्रतिदिन दो बातें करें: उसके क्रियात्मक दया के लिए आभार व्यक्त करें, और किसी भी भय-गिरावट के समय उसकी सहायता माँगें।

सार

भजन 136:6 एक विश्वस्त-आवाज़ है जो ईश्वर की सृष्टि-रचना और उसकी अटूट दया को एक साथ गाती है। पृथ्वी की स्थापना उसकी करुणा की स्थिरता का प्रमाण है, और यह संदेश हमारे जीवन में भी वह स्थिरता और भरोसा स्थापित करता है कि परमेश्वर हर समय साथ है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

1) उत्पत्ति 1:9–10— पृथ्वी के जल से ऊपर फैलाने की ईश्वरीय क्रिया का प्रारम्भिक चित्र; यह वस्तुतः उसी सृजन-कार्य का पुख्ता आधार है कि परमेश्वर कैसे व्यवस्था बनाते हैं।

2) मरकुस 10:27— मनुष्य के लिये कठिन कार्य भी ईश्वर के साथ संभव है; दया और सृजन-शक्ति के संयोग पर बल देता है।

3) भजन संहिता 103:13–14— कुमार-करुणा का व्यक्तिगत अनुभव, जैसा पिता अपने पुत्र के प्रति करते हैं, वैसा ही प्रेम और दया परमेश्वर के लिए है।

संक्षेप

यह पद सृष्टि के आरम्भ से ही ईश्वर की दया की निरंतरता की स्मृति कराता है। पृथ्वी की स्थापना उसकी महिमा और प्रेम का प्रमाण है; उसकी करुणा हर क्षण हमारे जीवन में सक्रिय है, इसीलिए हमें भरोसा, आभार और आडंबर-रहित विश्वास से जीना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी*, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है।

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फिर परमेश्‍वर ने कहा, “आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे,” और वैसा ही हो गया। (2 पत. 3:5)

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उसी ने पृथ्वी को अपनी सामर्थ्य से बनाया, उसने जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया, और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।

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