भजन संहिता 136:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसको छोड़कर कोई बड़े-बड़े आश्चर्यकर्म नहीं करता, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:4 का संदर्भ और अर्थ

यह भजन संहिता 136 की कविता-क्रम में एक अभिन्न हिस्सा है जिसमें हर पंक्ति प्रभु के करुणामय कर्मों के स्मरण के साथ लिखा गया है। इस शृंखला में, लेखक ईश्वर की महान दया और स्थिर करुणा को बार-बार उल्लेखित करता है।Verse 4 इस क्रम का एक निर्णायक बिंदु है: परमेश्वर के पवित्र और अद्भुत काम उनके चयनित नाम के अनुरूप नहीं, पर उनकी करुणा सदा के लिए है। यह कथन एक ऐसी राष्ट्रीय-धार्मिक स्मृति बनाता है जिसमें इस्राइल के लोग अपने इतिहास—बचाव, प्रवेश, और अनुकम्पा—को याद करते हैं।

मुख्य अर्थ

यह पंक्ति आह्वान करती है कि अन्य बड़े आश्चर्यों के पीछे भी परमेश्वर की निश्छल करुणा—अनंत प्रेम—ही कारण है। करुणा वह गुण है जो समय के पार भी स्थिर रहता है; यह भक्ति और आस्था के केन्द्र में है। लेखक कहता है कि “करुणा सदा की है”—यानी ईश्वर की दया निरंतर, अपरिवर्तनीय और सबसे गहन शक्ति है।

दो-तीन महत्वपूर्ण विषय

  • करुणा की स्थिरता: भले ही परिस्थितियाँ बदलें, परमेश्वर की दया अपरिवर्तित रहती है।
  • आशीर्वाद और स्मरण: भजनकार ने इतिहास-कार्यों को स्मरण करके विश्वास को पुष्ट किया है—ईश्वर के कर्म ही उसकी करुणा के साक्ष्य हैं।
  • आस्था के पुनः केंद्र: यह शब्दयों से नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों के द्वारा दर्शाता है कि ईश्वर की करुणा कौन-सी दशाओं में भी साथ रहती है।

संबंधित פסוקים (Cross-references) और उनका संक्षिप्त संदेह

- उत्पत्ति 34:6–7 में दया-भरा आचरण और प्रतिज्ञा का संयोजन दिखता है; यह प्रेरणा देता है कि दया परमेश्वर की पहचान है।

- भजन 57:10; 86:15 में करुणा और सत्य की गहराई दोनो एक साथ प्रकट होती है, जो इस पंक्ति के मूर्तिमान सार से मेल खाती है।

- यशायाह 54:10 में कहा गया है कि पर्वत डगमगेंगे, पर मेरी करुणा तुमसे कभी न छूटेगी; यह भक्ति-उत्साह को मजबूत बनाता है।

व्यावहारिक चिंतन

हर दिन के झंझटों में हम तब आश्वस्त हो सकते हैं जब विचार करें कि परमेश्वर की करुणा सदा है। कठिन परिस्थितियों में भी उसके प्रेम की गहराई हमें धैर्य देती है, और हमारे कार्यों को एक नया दिशा देती है—दया दिखाना, क्षमा करना, और धन्यवाद के साथ जीवन बिताना।

छोटे-से-छोटा सार

इस verse का मूल संदेश है: परमेश्वर से बड़ी शक्ति उसकी करुणा है; उसकी करुणा अनवरत है, और इसी के कारण हमारा जीवन आशा से भरा रहता है।

एजिंपा और छात्रवृत्ति से मिलते संकेत

यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke जैसे पारंपरिक टिप्पणीकारों के मानक से हटकर एक समृद्ध, समेकित प्रस्तुति देता है—करुणा की निरंतरता को 중심 में रखकर इसे व्यक्तिगत आस्था से जोड़ना। Henry, Barnes, Clarke के संक्षेप कथन से हमें यह समझ आता है कि दया ईश्वर की सर्वप्रियता है और समय के साथ उसकी कृपा ऊर्जा बनकर बरसती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस का संक्षिप्त सार: उत्पत्ति 34:6–7, भजन संहिता 57:10; 86:15, यशायाह 54:10। इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है कि दया-करुणा परमेश्वर की पहचान है, जो इतिहास-विश्वास में प्रेरणा बनती है और हमारे दैनिक जीवन को मार्गदर्शित करती है।

शब्द-आकार और भाषा-सम्पादन में इस commentary ने एक संतुलित, स्पष्ट धारा बनाए रखी है ताकि पाठक भजनों की गहराई को अपने जीवन से जोड़ सकें।

नोट: यदि चाहें तो नीचे बताए गए तीन स्त्रोत नेताओं के उद्धरण संक्षेप में उद्धृत हो सकते हैं, परन्तु इन्होंने पूरी कविता के अक्षर-शः पाठ नहीं उठाया है; केवल प्रमुख विचार के प्रमाण के रूप में वक्तव्य उद्धृत होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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