भजन संहिता 136:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:5 — छोटे से चिह्न, बड़ा विश्वास

पद्य: उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करुणा सदा की है।

घटना-परिसर (Immediate setting)

भजन संहिता 136 एक चमत्कार-गान है जिसमें हर पंक्ति के साथ कहा गया है, “यहोवा की करुणा सदा की है”। यह गीत प्राकृतिक सृष्टि के नवीन-आकाश के निर्माण और उसकी व्यवस्था के पीछे ईश्वर की बुद्धि की महानता को उद्घाटित करता है। इस पंक्ति में "आकाश" के निर्माण की बात प्रकृति के ब्रह्मांडीय क्रम को संकेत देती है—ऐसे क्रम के पीछे एक बुद्धिमान निर्माता की योजना है।

पाठ में क्या दिखता है: परमेश्वर और विश्वास के बारे में

यह छंद परमेश्वर की बुद्धि और उसकी करुणा को एक साथ जोडता है। “अपनी बुद्धि से आकाश बनाया” से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर ने सृष्टि को योजनाबद्ध ढंग से बनाया है—नहीं, अंधे भाग्य के हवाले; बल्कि सक्षम, विचारवान करार-पूर्वक। और “करुणा सदा की है” बताता है कि उसकी प्रेरणा केवल निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि हर समय, हर परिस्थिति में यथार्थ, निरंतर है। विश्वासियों के लिए यह दो-तरफा प्रेरणा है: प्रथम, ईश्वर की बुद्धि के द्वारा संसार की व्यवस्था समझ में आती है; द्वितीय, उसी करुणा के कारण हमारा संबंध सुरक्षित रहता है।

महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्रों की स्पष्टता

  • — यहाँ का तात्पर्य केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं, बल्कि चित्त-योजना, सृष्टि-चालित व्यवस्था, और जीवकर्म के पीछे की योजना से है।
  • — निर्मल आकाश का संकेत है जो ब्रह्मांड की विशालता और ईश्वर के महानता का प्रतीक है।
  • — ईश्वर की दयालु, स्थिर और ईमानदार सच्चाई; वह अपने लोगों के साथ भोजन, सुरक्षा और आशा बाँटता है।

अन्य सन्दर्भ—Related Passages

• उद्देश्य-परक संदर्भ: “यहोवा की ऊँचाई और उसकी करुणा” अन्य पवित्र ग्रंथों में भी बार-बार उभरती है, जहाँ सृष्टि-निर्माण के पीछे उसकी बुद्धि, और उसके भरोसेमंद प्रेम की पुष्टि होती है।

• निर्माण और प्रेरणा: आकाश की रचना के बारे में विचार-विमर्श भक्तों को यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के विचार शाश्वत और उन्नत हैं; हमारी उम्मीद उसकी करुणा पर अविश्वासी नहीं हो सकती।

• करुणा के मोड: कठिन समय में भी ईश्वर की करुणा निरंतर रहती है—यह इस पाठ का प्रमुख ध्वनि है जिसके कारण विश्वासियों में आस्था बनी रहती है।

प्रेजेंट-डे एप्लीकेशन

1) हर दिन एक नई योजना के रूप में देखें—हमारे जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं में भी ईश्वर की बुद्धि की उपस्थिति हैं; यह विचार भय को कम करता है और भरोसा बढ़ाता है।

2) कठिन परिस्थिति में भी करुणा को पकड़ें—ईश्वर की करुणा हमारे साथ है, उसे अनुभव करें, और दूसरों के प्रति दया दिखाने का आह्वान लें।

3) प्रकृति के साथ आशयपूर्ण रहते हुए प्रीत-बंधनों को मजबूत करें—आकाश की विशालता ईश्वर के महान प्रेम की स्मृति दिलाती है।

उद्धरण और दृष्टांत (Authority insights)

एचपी उद्धरण: “उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया”—यह सरल दृश्यात्मक वाक्य है जो भू-आकाशीय व्यवस्था के पीछे की योजना की दृढ़ता को दिखाता है।

एडैम क्लार्क/मैथ्यू हेनरी/अल्बर्ट बार्न्स के सार तत्व: यह पंक्ति अत्यंत संक्षिप्त है परन्तु गहरी समझ देती है कि सृष्टि की रचना एक बुद्धिमान Designer का परिणाम है और उसकी करुणा हर समय सक्रिय है।

सार-संयोजन

भजन 136:5 परमेश्वर की बुद्धि और करुणा का संयुक्त प्रमाण है। आकाश की निर्माण प्रक्रिया यह बताती है कि विश्व-व्यवस्था ईश्वर की विचारशील योजना पर आधारित है, और उसकी करुणा प्रत्येक दिन हमारे लिए एक नया नमूना है। विश्वासियों के लिए इसका अर्थ है—गुण-गुणान्वित सृष्टि के बीच डर-शिथिल नहीं होगा; एक प्रेम-गाथा जो हर परिस्थिति में स्थिर रहती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस: नीचे दिए गए संदर्भ सतह-नज़र से समझ में सहायता करते हैं: - प्रकृति की व्यवस्था पर भगवान की योजना को पुष्ट करने वाले उद्धरण: आकाशीय मौसम और सृष्टि की व्यवस्था के बारे में भिन्न पुस्तकों में दी गई दृष्टियाँ, जो विश्वास को दृढ़ बनाती हैं। - करुणा का निरंतरता: पवित्र-पदों में ईश्वर की करुणा के सतत रहने का विश्वसनीय संकेत।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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