भजन संहिता 136:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो ईश्वरों का परमेश्‍वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:2 का निर्गुण धन्यवाद—“जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करुणा सदा की है।”

यह वाक्य भजन 136 की संरचना में केंद्र बिंदु है: परमेश्वर के गुणों के सदा रहने वाले करुणामय स्वभाव की स्मृति और उसके प्रति आभार प्रकट करना। यह पाठक को परमेश्वर के स्थिर प्रेम, कर्तव्य-परायणता औरHistorical संदर्भ में साबित हुए कार्यों में आश्रय देता है।

साहित्यिक संदर्भ में यह पंक्ति

भजन 136 एक दयालु, हर घटना के समय-समय पर ईश्वर के उद्धारक प्रेम के चिह्नों का पुनरावर्तन है। हर आशीर्वचन के पीछे एक “क्यों” है: क्योंकि उसकी करुणा सदा है। यह गीतप्रतिपादन बार-बार “क्योंकि उसकी करुणा सदा” के स्वर के साथ होता है, ताकि श्रोताओं के मन में स्थायित्व और विश्वास सुरक्षित रहे।

धार्मिक महत्व

इस वाक्य का मूल संदेश यह है कि ईश्वर के प्रति आभार दर्शायें क्योंकि उसकी करुणा निरन्तर, अपरिवर्तनीय और हर परिस्थिति में उपलब्ध है। जब जीवन कठिन हो, तब भी यह स्मरण कराना कि परमेश्वर का प्रेम अचल है, संतोष और धैर्य देता है।

प्रमुख विचारों के साथ क्रॉस-रेफरेंसेज़

1) भजन 100:4 – “उसके द्वार में प्रवेश धन्यवाद से”। प्रभाव: धन्यवाद ही आराधना की पहली चाबी है और यह शक्ति देता है कि हम परमेश्वर के घर में सुरक्षित रहें।

2) लामोते 3:22-23 – “करुणा से हम जीवित रहते हैं”। प्रभाव: करुणा परमेश्वर की नई दया है जो दिन प्रति दिन ताज़ी रहती है और इसकी निरंतरता इस भजन के कथन का आधार है।

3) यशाय 54:10 – “पर्वत झुकेंगे पर उसकी करुणा मुळ से न हटेगी”। प्रभाव: करुणा का स्थायित्व परमेश्वर की सच्ची प्रतिज्ञा है।

आध्यात्मिक महत्त्व

- करुणा का अटूट स्रोत: हमारी निर्भरता ईश्वर की निरन्तर करुणा पर।

- आभार का धार्मिक परिणाम: धन्यवाद से मन स्थिर होता है, भय घटता है और विश्वास बढ़ता है।

पठन के प्रश्न

  • आप अपनी दैनिक जीवनचर्या में कितने समय तक ईश्वर के प्रति आभार के साथ शुरुआत करते हैं?
  • कौन-से हालात आज आपको यह स्मरण दिलाते हैं कि उसकी करुणा सदा है?
  • करुणा की अनुभूति किस तरह आपके परिवार, समुदाय या सेवा-कार्य को प्रेरित करती है?

छोटा निष्कर्ष

भजन 136:2 हमें सीधे-सीधे एक सरल, गहन सत्य की ओर ले जाता है: ईश्वर के निर्माता प्रेम, उसकी करुणा सदा रहती है। इस एक पंक्ति का पाठ हमें हर परिस्थिति में आभार और विश्वास का परिमार्जन करने की invitation देता है, ताकि जीवन में धैर्य और प्रसन्नता बनाम सके।

सूक्ष्म उद्धरण-संरचना (प्रमुख टिप्पणीकारों से):

Matthew Henry: “The Lord is good; His mercy endureth for ever.” (संक्षिप्त सार: परमेश्वर अच्छा है, उसकी करुणा सदा रहती है।)

Albert Barnes: “God’s mercy has no end; His faithfulness is eternal.” (संक्षिप्त सार: उसकी करुणा की सीमा नहीं, उसकी वफ़ा अनंत है।)

Adam Clarke: “Let us, therefore, with a grateful heart, ascribe all to the great mercy of God.” (संक्षिप्त सार: आभारपूर्वक ईश्वर की करुणा को ही माना जाए।)

नोट: उपरोक्त 3 उद्धरण पाठ-चलन के लिए संक्षेप में प्रयुक्त हैं; पूर्ण वाक्य ग्रंथ-पंक्तियों को यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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