भजन संहिता 136:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने प्रतापी राजाओं को भी मारा, उसकी करुणा सदा की है'

भजन संहिता 136:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:18 पर दृष्टिकोण

यह पद कुल 136वें अध्याय का हिस्सा है, जिसे भजनकार ने प्रभु की निरंतर कृपा और His अद्भुत न्याय के स्मरण के साथ मिसाल के रूप में शब्दबद्ध किया है। हर आस्था-सम्मेलन के अंत में यही संदेश है: परमेश्वर ने शक्ति और पराक्रम से विश्व को बनाये रखा है, पर उसकी करुणा सर्वकाल टिके रहने वाली है। यहाँ उस पठन-पंक्ति का तात्पर्य है कि जो भी शक्तिशाली निर्णय लेते हैं, उसका वास्तविक प्रभाव परमेश्वर की करुणा के सामने तिरोहित हो जाता है; क्योंकि उसकी करुणा कभी समाप्त नहीं होती।

पद का महत्त्व अध्याय के संदर्भ में

यह अध्याय हर एक कड़वी घटना के पीछे भी परमेश्वर की करुणा की निरंतर स्मृति देता है। 136:18 में भजनकर्ता बताता है कि प्रभु ने उन शक्तिशाली, प्रतापी राजाओं को भी मारा-यह दर्शाता है कि शक्ति के स्रोत वही है जो दया और न्याय दोनों को संचालित करता है। यह संदेश आश्वासन देता है कि निर्बल नहीं, प्रभु का प्रेम और न्याय पूरे संसार पर प्रभाव डालता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

मुख्य सीख यह है: अनुभव करें कि परमेश्वर की करुणा इतिहास-चर्या में एक स्थिर धारा है, जो शक्तिशाली के प्रभाव से भी ऊँची है। भजनकर्ता यह कहता है कि चाहे दुनिया में कितनी भी सत्ता क्यों न हो, उसकी करुणा बार बार स्मरणीय है और वही स्थिर आधार है जिस पर विश्व टिके रहता है। इस पंक्ति में आक्रमणकारी राजाओं के साथ भी—जिसके बारे में प्रीति से कहा गया है—करुणा की सत्ता पराक्रम से अधिक स्थिर है।

पवित्र शास्त्र के साथ तुलनात्मक अवलोकन

- यशायाह 54:10 में परमेश्वर की करुणा और स्थायित्व का संगम मिलता है, जहाँ बताया गया है कि उसकी करुणा कभी दूर नहीं जाती।

- न्याय के सिंहासन के संदर्भ में यह दर्शाता है कि उसका निर्णायक न्याय और करुणा एक दूसरे के पूरक हैं; जैसे इब्रानी धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि प्रभु प्रेम में कृपालु और न्याय में दृढ़ है।

- पुराने नियम के अन्य भजन भी बार-बार करुणा की निरंतरता पर जोर देते हैं, जिससे यह संदेश पुष्ट होता है कि शक्तिशाली घटनाओं के बावजूद परमेश्वर की करुणा सर्वत्र विजयी रहती है।

व्यावहारिक आध्यात्मिक आवेदन

  • प्रतीत हो कि शक्तिशाली स्थिति में भी प्रभु की करुणा नित नई रोशनी देती है। कठिनाई में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि उसकी दया ऊँचाइयों तक पहुँचेगी।
  • ईमानदार प्रार्थना करें कि हमारा दृष्टिकोण प्रशंसा और भरोसे की तरफ बढ़े—धरती की सत्ता से नहीं, परमेश्वर की करुणा से।

क्रस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप संबंध

1) यशायाह 54:10 — परमेश्वर की करुणा और स्थिरता का संदेश; यह पक्का करती है कि करुणा न्याय से अधिक स्थायी है।

2) भजन 103:8-11 — भगवान की करुणा और दया के गुणों का गहरा वर्णन; यह दिखाता है कि करुणा उसकी प्रकृति है, न कि केवल कार्य।

3) राजा-उत्पत्ति 20:13-14 — जब परमेश्वर ने सत्ता-शक्तियों के बीच मार्ग दिखाए, तो उसकी करुणा और वचन की शुद्धता प्रमुख बनीं।

निष्कर्ष-सार

भजन संहिता 136:18 हमें याद दिलाता है कि संसार की शक्तियाँ कितनी भी formidable हों, परमेश्वर की करुणा उनसे ऊपर और स्थिर है। प्रतापी राजाओं को हारना उसकी करुणा की विराटता का प्रमाण है—यह दर्शाता है कि इतिहास की हर घटना के पीछे उसकी दया की धारा प्रवाहित है। यह संदेश हमें आंतरिक विश्वास, प्रार्थना और जीवन के हर क्षेत्र में भरोसा देता है कि परमेश्वर का करुणा-स्वर सच है, और उसकी करुणा सदा के लिए बनी रहती है।

ध्यान दें: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के किसी भी सटीक शब्द उद्धरण केवल उपलब्ध होने पर ही उल्लेखित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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और जब तुम इस स्थान पर आए, तब हेशबोन का राजा सीहोन और बाशान का राजा ओग, ये दोनों युद्ध के लिये हमारा सामना करने को निकल आए, और हमने उनको जीतकर उनका देश ले लिया;

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