भजन संहिता 136:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह अपनी प्रजा को जंगल में ले चला, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु

भजन संहिता 136:16 में यह कड़वा सच उद्घृत है कि परमप्रभु अपने लोगों को जंगल में ले गया — एक स्थान जहाँ कठिनाईयां, असुरक्षा और निर्भरता उभरती है — फिर भी उसकी करुणा अनंत है। वचन बताता है कि यह मार्गदर्शन और देखरेख उसकी अटूट कृपा के कारण है, जो सदा बनी रहती है। यह भजन हमारे लिए विश्वास की धुरी है: कठिन परस्थिति में भी परमेश्वर की करुणा और नेतृत्व ध्यान देने योग्य है।

साहित्यिक संदर्भ

यह भजन का एक भाग है जिसमें यज्ञ-स्वरूपता और स्मरण के क्रम से परमेश्वर के गुण गाए जाते हैं: उसने अपने लोगों को जंगल में ले जाकर परीक्षण किया, पर उसकी करुणा सदा रहती है। यह विषय 136वें अध्याय के प्रारूप में बारम्बार दोहराव के साथ प्रस्तुत होता है — प्रत्येक अंत के लिए “क्योंकि उसकी करुणा सदा रहती है” (כי־הָלֹךְ) का उद्घोष।

धर्मशास्त्रीय महत्व

- निर्भरता की दशा: जंगल जैसी असुरक्षित परिस्थितियाँ मनुष्य के लिए आत्म-निर्भरता के विरुद्ध एक परीक्षण होती हैं; परंतु पराक्रम के स्थान पर परमेश्वर की करुणा, सुरक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

- करुणा की सततता: “करुणा सदा की है” का आशय यह है कि परमेश्वर का प्रेम और सहानुभूति निरंतर है, चाहे अवस्था कैसी भी हो। यह विश्वासघाती समय में भी आश्वासन देता है कि ईश्वर ने अपने लोक को ठोकरों से बचाने और पथ दिखाने के लिए नियत किया है।

पूर्व-पश्चात सम्बन्ध (Cross-references)

  • यहोवा की करुणा के स्थायित्व के बारे में अन्यत्र स्मरण: यह संकेत देता है कि परमेश्वर का प्रेम सीमाओं से परे है, और उसका रेखाचित्र हमें हर परिस्थिति में उसकी निष्ठा की याद दिलाता है।
  • युगांतर की स्मृतियाँ: अतीत में उसकी उद्धारक कार्यों का स्मरण कराना भक्तों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
  • प्रभु के विश्वासयोग्यता के साथ सम्बद्ध अन्य गीत-ग्रंथ: करुणा का स्वर हर पीढ़ी के लिए एक स्थिर आश्वासन है।

विचार के लिए प्रश्न

  • यदि आप किसी जंगल/कठिन समय में हों, तो किस प्रकार परमेश्वर की करुणा की सच्चाई आपके मन में विश्राम देती है?
  • कैसे स्मरण और आभार के अभ्यास से हमारा विश्वास अधिक गहरा होता है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 136:16 हमें बताता है कि परमेश्वर अपने प्रेरित लोगों को कठोर निर्भरता के क्षणों से गुजरते हुए भी नहीं छोड़ता। जंगल में नेतृत्व को वह प्रेमपूर्ण करुणा का मार्ग बनाते हैं, ताकि उनका विश्वास मजबूत हो और स्मरण रहे कि उनकी करुणा सदा रहती है। यह संदेश हर पीढ़ी के लिए एक स्थिर आश्वासन है: चाहे राह कठिन हो, परमेश्वर का प्रेम अटल है।

उद्धरण-नोट

यदिwaard सामग्री में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलित उद्धरण मिलते हैं, तो उन्हें प्रोट्रस के तौर पर संक्षेप में उद्धृत किया जाएगा; पूर्ण वाक्यों के स्वतंत्र पुनरुद्धरण के बजाय केवल संकुचित हिस्से दिए जाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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निर्गमन 15:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 15:22 (HINIRV) »
तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नामक जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला।

निर्गमन 13:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 13:18 (HINIRV) »
इसलिए परमेश्‍वर उनको चक्कर खिलाकर लाल समुद्र के जंगल के मार्ग से ले चला। और इस्राएली पाँति बाँधे हुए मिस्र से निकल गए।

व्यवस्थाविवरण 8:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 8:15 (HINIRV) »
और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहाँ तेज विषवाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्टान से जल निकाला,

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