भजन संहिता 136:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 136:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:8 पर तात्परिक अर्थ

इस पद में कहा गया है कि सूर्य प्रभु ने दिन की राजगाथा के लिए बनाया है; उसकी करूणा सदा बनी रहती है। इसका सीधा संकेत है—ईश्वर की रचना-प्रकृति और उसकी कृपा एक साथ रहते हैं: उसने वातावरण और प्रकाश का क्षेत्र दिया ताकि दिन-रात का क्रम चलता रहे, और उसकी करुणा निरंतर गतिविधिमान बनी रहे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भजन 136 एक धन्यवाद-पत्र है जिसमें हर चरण में “क्योंकि उसकी दया सदा बनी रहती है” जैसा अनुच्छेद के साथ किस अवसर पर उसे बार-बार स्मरण किया गया है। संदर्भ के अनुसार सूर्योदय के साथ Creator की क्रिया दिखाई देती है—दिन-रात्रि के क्रम और जीवन के चक्र की अस्थिरता में भी परमेश्वर की स्थिर करुणा प्रकट होती है। यह भजन समुदाय के आराध्य गीतों की शृंखला है जहां हर पंक्ति में परमेश्वर के कर्मों का सार दोहराया गया है।

व्यাখ्या के अहम बिंदु

  • सूर्य बनना एक ठोस रचनाCompact है—दिन-चक्र का स्पष्ट संरचना देता है, ताकि जीवन सुचारु रूप से चले।
  • “सदा की करुणा” परमेश्वर की स्थिर प्रेम-व्यवहार की गवाही है, जो हर दिन नए अवसर देकर जीवन को बनाए रखती है।
  • भक्ति के क्रम में यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर का कार्य और उनकी करुणा समय की सीमा से परे हैं।

थीमैटिक सार

  1. दिन-चक्र में ईश्वर की व्यवस्था और नियोजन का संरक्षण।
  2. प्रेम-करुणा का निरंतर आगमन और पुनर्निर्माण।
  3. निर्भरता कि हमारा दैनिक जीवन उसकी कृपा पर टिका है।

संबद्ध पद और संक्षिप्त व्याख्या

0-63 संदर्भ: सूरज-निर्माण का तथ्य, दिन-रात की रौशनी और जीवन की प्रकृति को संकेत देता है कि ईश्वर की सत्ता स्थिर और दयालु है।

प्रेम और निर्माण का संयोजन: रचना-कार की करुणा एक निरंतर धारा की तरह है जो हर दिन को उद्देश्यपूर्ण बनाती है।

टिप्पणी-युक्त उद्धरण (संक्षेप)

यहां का यह सरल संकेतMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की स्पष्ट प्रबल उद्धरणों का प्रत्यक्ष टेक्स्ट नहीं देता; पर उनके प्रकाश में समान विचार मिलते हैं कि सूर्य का निर्माण और करुणा की निरंतरता दोनों ईश्वर की स्थिरता का प्रमाण हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस के संकेत

1) रोमी 11:33-36 — ईश्वर की योजनाओं की गहराई और उनकी करूणा के असीम स्वरूप की स्मृति।

2) भजन 104:19 — सूर्य और चंद्र की रचना के पीछे की व्यवस्था, जो जीवन के चक्र को बनाये रखती है।

3) यशायाह 64:8 — हे प्रभु, हम तेरे लोग और तू हमारा पिता; तेरा दयालु संरक्षण हमारे जीवन-निर्धारण का आधार है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हर दिन की शुरुआत सूर्य के प्रकाश से होती है—यह हमारी आत्मा के लिए संकेत है कि ईश्वर की करुणा न केवल अतीत की स्मृतियों में, बल्कि हर दिन के नवीन आरम्भ में भी है। इसलिए हमें daily dependence और gratitude के साथ आगे बढ़ना चाहिए, और अपने दृष्टि को इस स्थिर करुणा की ओर बनाए रखना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो!

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तब परमेश्‍वर ने दो बड़ी ज्योतियाँ बनाईं; उनमें से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया; और तारागण को भी बनाया।

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जिसने दिन को प्रकाश देने के लिये सूर्य को और रात को प्रकाश देने के लिये चन्द्रमा और तारागण के नियम ठहराए हैं, जो समुद्र को उछालता और उसकी लहरों को गरजाता है, और जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है, वही यहोवा यह कहता है:

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