भजन संहिता 136:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उनके देश को भाग होने के लिये, उसकी करुणा सदा की है;

भजन संहिता 136:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 136:21 — संदर्भ और अर्थ

यह पद भजन संहिता 136 के समूह-प्रशंसाओं का भाग है, जिसमें यह परमेश्वर के असीम करुणा और औरंग-हेतु चमत्कारों के स्मरण के साथ हर दयालु कार्य की स्थाई व्यवस्था बताता है। वीरेष में यह याद दिलाया गया है कि परमेश्वर ने उनके देश को अधिकारपूर्वक देन के रूप में दी, और उसकी करुणा सदा की है। यह संतुष्टिदायक ध्यान है कि परमेश्वर की कृपा समय के साथ एक सतत, अखंड धारा बनकर बनी रहती है—उसकी करुणा हर चुनौती और हर आशा के बीच मापनीय है।

मुख्य अभिप्राय

यह पवित्र गान यह दर्शाता है कि परमेश्वर के चरित-करुणा (mercy) का स्तर स्थिर और अटल है, भले ही लोग अन्याय या कठिनाई में फंसे हों। विशेष रूप से "उसके देश को भाग होने के लिये" कहकर यह बताता है कि उसका आशीर्वाद निवास-भूमि को भी सुरक्षित और स्थिर बनाता है—यह एक ऐसी प्रेरणा है जो यहूदी-युग से लेकर आज तक विश्वासियों को यह सिखाती है कि प्रभु की करुणा उनकी स्थायित्व पथ में मार्गदर्शक है।

दो-तीन प्रमुख थीम

  1. करुणा की स्थिरता: "करुणा सदा की है" बताता है कि परमेश्वर की दया एक अनंत धारा है, जिसका मूल्य और गहराई समय के पार है।
  2. विकास और संरक्षण: उनके देश को भाग होने के लिये देना एक उदाहरण है कि परमेश्वर अपने लोगों के जीवन-क्षेत्र और पहचान को बनाए रखता है।
  3. कृतज्ञता की प्रकृति: यह पद जनता को अपने उद्धार-कार्य के लिए निरंतर धन्यवाद-अनुवं जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।

संदर्भ-नुक्ते (cross-references) और उनके संबंध

  • उद्धार की याद: Psalm 103:17— परमेश्वर की क्रपा दृढ़ रहती है, जो पीढ़ियों तक बनी रहती है। यह देखते हुए यहां भी करुणा की निरंतरता पर जोर है।
  • संरक्षण की गारंटी: Deuteronomy 7:9— जो अपने वचन के पालनकर्ता हैं, उनके घर-परिवार पर उसकी आशा और वादा स्थिर रहता है।
  • कृतज्ञता का गीत: Psalm 136 के पूरे समूह के शब्द— प्रत्येक चरण के अंत में 'क्योंकि उसकी करुणा सदा है' जैसा उद्घोष पक्का एकत्रित आस्था को जोड़ता है।

इन संदर्भों में वही प्रमुख विचार उभरकर आता है कि परमेश्वर की करुणा न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि समुदाय के जीवन और इतिहास के ठहराव का स्रोत है।

व्यावहारिक चिंतन

आज के जीवन में भी यह शब्द हमें यह सिखाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की करुणा पर टिके रहें। अपने अस्तित्व, परिवार, और समुदाय के लिये उसके अटल वादे को स्मरण करें, और चरणबद्ध तरीके से उसकी कृपा के प्रति आभार प्रकट करें। यह स्मरण रोम-उद्धार और स्थिर विश्वास की दिशा देता है, विशेषकर जब परिवर्तन और चुनौतियाँ सामने हों।

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 136:21 में कहा गया है कि "उसकी करुणा सदा की है"—यह परमेश्वर की स्थिर दया का घोषणात्मक प्रमाण है जो उनके देश के भाग-स्वत्व के साथ जुड़ा है। यह संदेश आज भी एक साथ रहने, विश्वास बनाए रखने और कृतज्ञता के साथ प्रभु की आशीषों को याद करने के लिए प्रेरित करता है।

टिप्पणी-उद्धृत अंश (पिछले स्रोतों से समाहित)

जहां तक उद्धृत वाक्यों की बात है, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायमंड टिप्पणी-उद्धरण उपलब्ध होने पर उनके मूल शब्दों के संक्षिप्त उद्धरण वास्तव में प्रयोग में लाए जाते हैं:

उद्धृत विचार:

  • मैथ्यू हेनरी: "करुणा" के स्थायित्व पर बल—यह परमेश्वर की निरंतर दया का प्रमाण है।
  • Albert Barnes: करुणा के निरंतरत्व पर—यही है जो वंश-परंपरा और देश के प्रति वचन की प्रकृति को दृढ़ करता है।
  • Adam Clarke: दया की सततता पर व्याख्या—परमेश्वर के चरित से यह स्पष्ट है कि उसकी कृपा कभी समाप्त नहीं होती।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 136:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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