भजन संहिता 97:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा राजा हुआ है, पृथ्वी मगन हो; और द्वीप जो बहुत से हैं, वह भी आनन्द करें! (प्रका. 19:7)

भजन संहिता 97:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 97:1 पर टिप्पणी

यह छंद परमेश्वर की राजगद्दी की प्रधानता और संसार-भर के सामर्थ्य-निष्ठ pembक संकेत देता है। יהוה के राजस्व की घोषणा से वातावरण में एक नई रोशनी भर जाती है: पृथ्वी मगन होती है, सारे द्वीप भी आनन्दित होते हैं। यह संदेश हमें यह बताता है कि भय या अशांति नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्ता में स्थिरता और खुशी पाई जा सकती है।

पाठ का संक्षिप्त परिचय (छात्रवृत्ति) – अध्याय के भीतर क्या दिखता है

भजन 97 एक लौह-आकाश वाले प्रभु के दिव्य साम्राज्य की घोषणा करता है। संसार के भू-भाग जो कभी-कभी अस्थिरता और अराजकता में डूबे रहते हैं, अब परमेश्वर के न्याय और विजय के प्रकाश में नया स्वरूप ग्रहण करते हैं। यह छंद गर्मजोशी से कहता है कि ईश्वर राजा हो गए हैं; इसलिए हर प्राणी को परमस्तित्व की आनंद-घोषणा में सम्मिश्रण करना चाहिए।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा

मुख्य संदेश है— परमेश्वर ही सर्वोच्च शासनकर्ता हैं और उनके राज्य की महिमा विश्वभर में चलचित्रित है। इसके कारण प्रकृति भी अपने आप में परिवर्तनशील नहीं रह पाती; पृथ्वी और उसके निवासी परमात्मा की महान उद्धार-कार्य में भागीदार बनते हैं। हमारे लिए यह सीख है कि जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर के शासकत्व को मानना और उसकी महिमा में खुशी ढूंढ़ना चाहिए।

अनुसंगत अन्य बाइबल अंशों से तुलना

  • यशायाह 6:1 – परमेश्वर की महिमा का उद्घोष मानव-दृष्टि को ऊँचा स्थान देता है, जिससे भय-शमन और स्तुति का भाव जागता है।
  • प्रकाशितवाक्य 19:7 – भविष्य के अनुभव में ईश्वर के राज्य की महिमा और उद्धार की खुशी को नवीन रूप में व्यक्त किया गया है।
  • भजन 95:1–2 – स्वागत-गान और प्रसन्नता, परमेश्वर के साथ आनन्दित रहने की जीवनशैली का परिचय देता है।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर के राज्य का आनंद केवल वर्तमान घटनाओं की खुशी नहीं, बल्कि उसकी दिव्यता, न्याय और उद्धार-कार्य के स्थिर प्रमाणों पर टिकता है।

आचरण-आधार: कैसे लागू करें

  • ईश्वर की प्रभुता पर भरोसा बनाए रखें; कठिन समय में भी प्रभु के राजा होने की पुष्टि में स्थिर रहें।
  • दैनिक जीवन में खुशी के कारण को खोजें— चाहे काम, परिवार या ईश्वर के साथ आराधना— और उसे परमेश्वर के राज्य की महिमा में समर्पित करें।
  • सृष्टि के हर हिस्से में परमेश्वर की महानता की याद दिलाने वाले छोटे-छोटे अहसानों को मान दें, ताकि आंतरिक आनंद सतत बने रहे।

फुटनोट्स: कुंजी उद्धरण और cross-references

इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के बिल्कुल छोटे-परिभाषित उद्धरण का उपयोग नहीं किया गया है; यदि आवश्यक हो तो निम्नलिखित संजीव पाठ-प्रतिवेदन में बोले जा सकते हैं।

सार

भजन 97:1 यह बताता है कि परमेश्वर का राज संसार की वास्तविक सत्ता है— पृथ्वी और समुद्र के किनारे मौजूद सभी लोग उसकी महिमा से आनंदित होते हैं। आज भी यह संदेश प्रेरणा देता है कि हम हर परिस्थिति में उसकी सर्वोच्च सत्ता को मानें और उसके राज्य की खुशी से अपने जीवन को रंग दें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 97:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जाति-जाति में कहो, “यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं; वह देश-देश के लोगों का न्याय खराई से करेगा।”

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यहोवा राजा है; उसने माहात्म्य का पहरावा पहना है; यहोवा पहरावा पहने हुए, और सामर्थ्य का फेटा बाँधे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का।

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