भजन संहिता 96:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जाति-जाति में कहो, “यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं; वह देश-देश के लोगों का न्याय खराई से करेगा।”

भजन संहिता 96:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 96:10 — संदर्भ और संदेशक संदेश

जाति-जाति में कहो, “यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं; वह देश-देश के लोगों का न्याय खराई से करेगा।”

तत्काल संदर्भ ( Immediate setting )

96:10 भजन संहिता के एक उत्कंठित महिमा-गान का हिस्सा है जिसमें प्रजा-जातियाँ परमेश्वर की प्रभुता को मानती हैं। यह पंक्ति परमेश्वर के राजकीय अधिकार को विश्व-परिपाटी के केंद्र में रखती है—हर राष्ट्र को यह स्मरण है कि वही न्यायी सिंहासन पर है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में बताने वाला पाठ

यह पद two मुख्य विचार देता है: परमेश्वर राजा है और वह राजा के रूप में सार्वभौमिक और अपरिवर्तित है—जगत स्थिर है, टलने योग्य नहीं। साथ ही, वह देश-देश के लोगों के लिए न्याय करता है, जो उसकी सत्यनिष्ठा और पवित्रता का प्रदर्शन है। भरोसा यही है कि विषमताओं के बीच भी परमेश्वर का न्याय और वचन समर्थ है।

महत्वपूर्ण शब्दों एवं प्रतीकों की व्याख्या

  • यहोवा राजा हुआ है—यह साम्राज्य-विश्वास का उत्साहपूर्ण उद्घोष है; परमेश्वर सत्ता के केन्द्र में है, न कि मानव-योजनाओं में।
  • जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं—समय-समय पर परिस्थितियाँ परिवर्तनशील होती हैं, पर परमेश्वर का राज्य हर समय अचल है।
  • न्याय खराई से करेगा—न्याय का मानदंड नहीं केवल ताकत पर, बल्कि सत्य और धर्मपरायणता पर है; यह सभी राष्ट्रों के लिए निष्पक्ष निर्णय का आश्वासन देता है।

अनुरूप संदर्भ (Cross-references)

- यशायाह 9:6-7: “क्योंकि एक शिशु हमारे लिये जन्म लेगा…”—यह संकेत देता है कि राजा का शासन परमपवित्र और स्थायी है।

-gut: यूह 1:5 (आदि) — रोशनी अंधकार के विरुद्ध और सत्य के मार्ग में प्रकाशित होती है, जैसे परमेश्वर न्याय के स्रोत के रूप में स्थिर रहते हैं।

- भजन 93:2: “यहोवा राजा हुआ है, पर्वतों से ऊँचा है”—परमेश्वर की राज्य सत्ता और स्थिरता का और दृढ़ संकेत।

प्रस्तुत-युग में उपयोगी व्यावहारिक अर्थ

  1. विश्वास के रास्ते पर स्थिरता मांगें: परिस्थितियाँ कितनी भी अस्थिर हों, परमेश्वर के नियंत्रण को याद रखें।
  2. न्याय के मानक को समझें: सामाजिक-नैतिकता में निष्पक्षता और करुणा—यह परमेश्वर के न्याय का मूल है।
  3. कूट-नीति से ऊपर सत्य पर टिके रहें: एकजुटता और सत्यनिष्ठा से राष्ट्र-विदेशी संबंधों में भी शांति बनी रहती है।

सूक्त उद्धरण और समान विचार (आवश्यक उद्धरण)

यह पंक्ति Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के ठीक शब्दों से उद्धृत नहीं है, पर उनके सम सामर्थ्य विश्लेषण के सार नीचे समाहित हैं:

कथन-नोट

इस पवित्र पाठ में प्रभुता का घोषणात्मक स्वर है—जात-जात के हर क्षेत्र में यह आज भी सच है कि परमेश्वर ही सत्ता के केन्द्र में है और उसका न्याय निष्कलंक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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यहोवा राजा है; उसने माहात्म्य का पहरावा पहना है; यहोवा पहरावा पहने हुए, और सामर्थ्य का फेटा बाँधे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का।

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और वह जगत का न्याय धर्म से करेगा, वह देश-देश के लोगों का मुकद्दमा खराई से निपटाएगा। (भज. 96:13, प्रेरि. 17:31)

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राज्य-राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश-देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य-राज्य के लोगों की अगुआई करेगा*। (सेला)

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