भजन संहिता 96:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है; वह तो सब देवताओं से अधिक भययोग्य है।

भजन संहिता 96:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 96:4 का स्पष्ट संदर्भ

यह श्लोक भजन संहिता (Psalm) 96 का भाग है, जिसमें भक्तगण यहोवा के लिए धार्मिक प्रशंसा और महिमा प्रकट करते हैं। इस अध्याय में चारों ओर के राष्ट्र और देवताओं के विपरीत, यहोवा की महानता और समान नहीं होने की घोषणा की जाती है। यह द्योतक है कि परमेश्वर की सत्ता और अनंत महिमा सभी मानव कल्पनाओं से ऊपर है, और उसकी भयावहता हमारे जीवन के केंद्र में आनी चाहिए।

मुख्य अर्थ

श्लोक कहता है: “क्योंकि यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है; वह तो सब देवताओं से अधिक भययोग्य है।” यहाँ दो प्रमुख विचार उभरते हैं— परमेश्वर की महानता और उसकी पूजा के अनिवार्य सम्मान। वह एक सार्वभौमिक लोकनायक है, जिसकी महानता का गान सभी स्तोत्रों और देशों में गेय होना चाहिए। देवताओं के संदर्भ में यह स्पष्ट रेखांकन है कि निर्गुण या मनमाने देवता नहीं, बल्कि एक ही सच्चा परमेश्वर है जो सभी को संचालित करता है।

मुख्य विषय (2–3)

  • परमेश्वर की सर्वोच्च महत्ता: भजनकार कहते हैं कि यहोवा का महत्त्व अन्य सभी देवताओं से ऊँचा है, इसलिए उसकी स्तुति व्यापक और एक व्यापक आत्मीयता के साथ की जानी चाहिए।
  • भय और सम्मान का संतुलन: “भययोग्य” शब्द यहाँ केवल भय का अर्थ नहीं देता, बल्कि उसकी पवित्र और उचित भय की महिमा को दर्शाता है—यही श्रद्धा और सम्मान का आधार है।
  • पृथ्वी-स्तर पर सार्वभौमिकता: भजनकार का यह स्वर उस समय के समाज‑वृत्त से आगे बढ़कर समस्त राष्ट्रों तक पहुँचता है, जहाँ हर व्यक्ति और हर राजा उसकी महिमा में भागीदारी पाता है।

संबद्ध पाठ (cross-references) और उनके संकेत

1) यशायाह 46:9–10— परमेश्वर की चिरयोजना और उससे ऊपर कुछ न रहना: उसकी साक्षात सत्ता पर आधारित विश्वास का निर्माण।

2) धार्मिक सभाओं में प्रभु का महिमामंडन: रोम 1:20— प्रकृति के द्वारा परमेश्वर की महिमा और उसकी सामर्थ्य दिखती है; हर मानव के हृदय में उसकी पहचान की स्मृति है।

3) विकासशील घोषणाओं में प्रभु का एकत्व: कलिसिया में आश्वासन कि एक ही परमेश्वर है जो सभी में कार्य करता है—यह श्लोक भी उसी एकत्व और एक शक्तिशाली प्रभु की स्वीकृति देता है।

निजी चिंतन और व्यवहारिक अनुप्रयोग

हम जहाँ भी रहें, चाहे आस्था का वातावरण कितना भी विविध क्यों न हो, हमें यह मानना चाहिए कि परमेश्वर की महिमा स्थिर है और उसे सर्वोपरि स्थान देना आवश्यक है। प्रतिदिन की पूजा में उसकी उच्चता को स्मरण करें—क्योंकि वही सर्वशक्तिमान है जो हमारे जीवन के हर चरण को नियंत्रित करता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यहोवा की महानता और भय योग्यता को मानना भक्त के हृदय के मूल में है। अन्य देवताओं के दबाव या धारणाओं से ऊपर उठकर, हमारे जीवन की दिशा उसकी स्तुতি और महिमा की ओर मुड़नी चाहिए। इस श्लोक से हम सीखते हैं कि ईश्वर के सामने उचित भय और पवित्र सम्मान ही नैतिक जीवन की कुंजी है।

छोटे उद्धरण (public-domain commentators):

Matthew Henry: “God is greatly to be feared; for his majesty and power are infinite.”

Albert Barnes: “The fear of the Lord is to depart from evil; his majesty demands reverent worship.”

Adam Clarke: “Greatness of God enjoins supreme homage and forms the ground of adoration.”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूँगा; इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊँगा।

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यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है।

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क्योंकि यहोवा महान परमेश्‍वर है, और सब देवताओं के ऊपर महान राजा है।

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