भजन संहिता 18:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूँगा; इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊँगा।

भजन संहिता 18:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 18:3 पर टिप्पणी — संदर्भ में समझ

यह पद भजन संहिता में डेविड द्वारा अपनी संकट-घड़ी में परमेश्वर की आराधना और विश्वास की पुख्ता पुष्टि है। इससे पहले के अंशों में शत्रुओं के दुर्बलता-उत्पादन और परमेश्वर की मित्रता का अनुभव वर्णित है; अब व्यक्तिएक सच यह है कि परमेश्वर ही सुरक्षा का स्रोत है। डेविड कहता है कि वह यहोवा को पुकारेगा—यही उसका भरोसा है—और इस पुकार के पीछे उसका अनुभव है कि वह अपने शत्रुओं से बचा लिया जाएगा। यह पद यह सिखाता है कि संकट के समय आराधना और विश्वास का संपर्क ईश्वर के साथ सुरक्षा की कुंजी है।

मुख्य अर्थ

पद यह दर्शाता है कि आंतरिक शांतिदायिनी ऐश्वर्य के साथ प्रभु पर भरोसा देने से शत्रुओं के खतरे पर विजय मिलती है। यहोवा को स्तुति के योग्य मानना एक दिव्य सत्ता के सामने अपनी निर्भरता को स्वीकारना है। परिणामस्वरूप, संकट के समय ईश्वर की पयामद और सहायता स्पष्ट रूप से अनुभूति में आती है।

तीन प्रमुख विषय

  • आस्था और प्रार्थना: कठिन समय में परमेश्वर को पुकारना।
  • यथार्थ सुरक्षा: निश्चय कि शत्रुता से सुरक्षित रहना परमेश्वर की क्रिपा से है।
  • स्तुति का जीवन: परमेश्वर की महिमा के प्रति विश्वासपूर्ण स्तुति का व्यवहार।

संदर्भ-आकर्षण (Cross-references)

• अभियुक्त समय में पूजा और भरोसा: निर्गमन 14:13–14 के संदर्भ में यह दिखता है कि विश्वास में मोरचा बनता है, और ईश्वर युद्ध के क्षणों में सहायता करता है।

• परमेश्वर की सुरक्षा: भजन संहिता 46:1-2 के साथ समझ आती है कि परमेश्वर हमारी शरण और सुरक्षा है।

• स्तुति और आस्था का संयोजन: भजन संहिता 34:1 में यहूदा की स्तुति और परमेश्वर की सद्कृति को मिलाकर देखने का संदेश है।

इन सभी संदर्भों में एक बात समान है: प्रार्थना और स्तुति उसकी शक्ति को उद्धृत करती हैं और वह संकट से निबटने में समर्थ है।

व्यावहारिक विचार

जब डर या धमकी सताने लगे, तो भजन के रूप में ईश्वर को पुकारना और उसकी स्तुति शुरू करना मददगार रहता है। यह रास्ता भय को नियंत्रित कर देता है और एक शांत, विश्वास-प्रधान मन बनाता है। ईश्वर के प्रति निर्भरता बनाये रखना संकट के समय भी साहस देता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 18:3 हमें सिखाता है कि संकट के क्षणों में प्रभु को पुकारना और उसकी स्तुति करना सुरक्षा का मार्ग है। यहोवा ही वह सुरक्षा-स्रोत है जिसे हम परब्रह्म के भरोसे द्वारा अनुभव करते हैं, और इसी भरोसे से शत्रुओं के दबाव में भी दिव्य संरक्षण मिलता है।

नोट्स (नक़ल-उद्धरण समय)

इस पाठ के लिए नीचे दी गई प्रचलित टिप्पणी-लागतों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचार शामिल हो सकते हैं। नीचे बताए गए उद्धरण सिर्फ अर्थ-समझाने के लिए उद्धृत हैं; पूर्ण अनुवाद के लिए संदर्भ देखें।

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भजन संहिता 18:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूँगा; संकट में मैं उसके संग रहूँगा, मैं उसको बचाकर उसकी महिमा बढ़ाऊँगा।

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भजन संहिता 62:8 (HINIRV) »
हे लोगों, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने-अपने मन की बातें खोलकर कहो*; परमेश्‍वर हमारा शरणस्थान है। (सेला)

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भजन संहिता 145:3 (HINIRV) »
यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है।

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