भजन संहिता 18:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मृत्यु की रस्सियों से मैं चारों ओर से घिर गया हूँ*, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया; (भजन 116:3)

भजन संहिता 18:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

आर्थप्रधान सार: भजन संहिता 18:4 का सरल अर्थ

इस पद में दाऊद अपने भयग्रस्त अनुभव को शब्दों में व्यक्त करते हैं: मृत्यु की रस्सियाँ उसे चारों ओर से घेर लीं, और गम्भीर संकट ने उसे डरा दिया। यह संकेत है कि परमेश्वर के विश्वास में भी विश्वासी कठिन समयों से गुज़रते हैं, जहाँ मौत और पाप की ताक़तें सामने आ जाती हैं, परन्तु वे प्रभु की सहायता के भरोसे स्थिर रहते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह भजन डॉ. दाऊद का है; उसने आतुर संकट के समय प्रभु से प्रत्यक्ष सहायता माँगी। भजन 18 में दाऊद ने अपनी प्रत्यक्ष उद्धारककथा को रचा है, जिसमें परमेश्वर के साथ अपनी लड़ाई का विवरण है। संदर्भित तीव्र अनुभूति बताती है कि भक्ति-मुक्तिवादी आस्था भी भय-आवृत स्थितियों से होकर गुजरती है, परन्तु परमेश्वर की रक्षा अटल रहती है।

interpretación के संकेत

- मृत्यु की रस्सियाँ: यह दर्शाता है कि मृत्यु-भय और असुरक्षा एक वास्तविक अनुभूति है, जो हमारी प्रकृति के अनुरूप है।
- अधर्म की बाढ़: समाज-व्यवस्था और आचार-व्यवहार के विरुद्ध उभरता अवरोध और भय को तात्पर्यित करता है।
- उद्धार की आशा: verse 4 के आरम्भ में घिराव दिखाते हैं कि किस प्रकार संकट अपने चरम पर भी प्रभु की पवित्रता और सहायता की आशा को नष्ट नहीं कर पाता।

प्रमुख विचार—संक्षिप्त सूची

  • कठिन समय में आत्म-विश्वास की परख
  • परमेश्वर के हाथ में सुरक्षा की यकीनन स्थिति
  • भय और आशा के बीच संतुलन बनाये रखना

अन्वेषणीय cross-refs (संदर्भ जो इस पय को जोड़ते हैं)

1) भजन 116:3 — अस्तु यह निश्चय कि मृत्यु की दूरी कभी विश्वासी के करीब आ सकती है, परन्तु मृत्यु-घटना की भयावहता के बीच उद्धार की आशा स्थिर रहती है। यह समान अनुभूति देता है कि मौत की डोर से डरना स्वाभाविक है, पर पराक्रमपूर्ण प्रभु ही उद्धार देता है।
2) भजन 27:1 — प्रभु जो हमारे जीवन की रोशनी और उद्धारक है, वह भय के समय में भी डर को हटाने का आधार बनता है।
3) दान 3:17–18 — जोखिमपूर्ण परिस्थिति के बीच भी दृढ़ विश्वास देता है कि परमेश्वर हमारी सुरक्षा और उद्दीपन है।

प्रायः उद्धृत तत्व (मथ्यू हेनरी, अलाईन Barnes, Adam Clarke से संक्षेप)

नोट: नीचे दिये गये संकेत उनके सार्वजनिक-डायपरोट पंक्तियों से लिए गये संक्षेप उद्धरण हैं, ताकि पाठ में उनके विचारों का एकीकृत सार प्रस्तुत हो सके।

Matthew Henry के संदर्भ में सामान्यतः ऐसी धारणा है कि संकट के समय परमेश्वर के उद्धारक कदम पहले आते हैं, ताकि मनुष्य की आशा पुनः DNA बन सके।

Albert Barnes ने नाजुक परिस्थितियों में प्रार्थना और विश्वास की सरलता की ओर संकेत किया है—क्योंकि उद्धार पहले विश्वास के कदम पर निर्भर करता है।

Adam Clarke भी इस प्रकार के पथ पर विचार करते हैं, कहकर संकट के क्षणों में परमेश्वर के न्याय और दया की एक साथ उपस्थिति होती है।

संकेतित उद्धरण (यदि उपलब्ध) और उनकी भूमिका

“ईश्वर के हाथों में मेरी सुरक्षा है, भय नहीं” जैसे संक्षेप विचार, जो मार्मिक रूप से डाले जाते हैं, लेकिन पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

कठिन समय में-prayerful reflection, भरोसा और प्रभु की_helpers पर निर्भरता बनाए रखें। भय के समय में भी परमेश्वर की सुरक्षा का विश्वास, और आशा की किरण निकालना ज़रूरी है। यह भजन-रेखा यह सिखाती है कि संकट की घड़ियाँ भी परमेश्वर के उद्धार के अवसर बन सकती हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 18:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मृत्यु की रस्सियाँ मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा*। (भज. 18:4-5)

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मरकुस 14:33 (HINIRV) »
और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया; और बहुत ही अधीर और व्याकुल होने लगा,

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2 कुरिन्थियों 1:9 (HINIRV) »
वरन् हमने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की सजा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन् परमेश्‍वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।

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