भजन संहिता 85:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

प्रधान बजानेवालों के लिये : कोरहवंशियों का भजन हे यहोवा, तू अपने देश पर प्रसन्‍न हुआ, याकूब को बँधुवाई से लौटा ले आया है।

भजन संहिता 85:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 85:1 – पाठ का परिचय

यह भजन प्रधान बजानेवालों के लिये लिखा गया है, जो कोरहवंशियों का प्रकार है। विषय है—यहोवा ने अपने देश पर कृपा दिखाई है और बंधुवाई से लौटते लोगों के अनुभव से नई आशा नहीं टूटती। यह भजन परमेश्वर के फिर मिलन और उद्धार के सुखद परिणामों को उजागर करता है: कृपा, क्षमा, और शांति की स्थापना।

पद का पवित्र पाठ और उसके पीछे का चित्त

«तू अपने देश पर प्रसन्न हुआ, याकूब को बँधुवाई से लौटा ले आया है»—यह वाक्य संकेत करता है कि परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों के लिए दुःख के बाद भी पुनः स्थिति बनाई है। भजनकार यह बताता है कि परमेश्वर की कृपा समय पर आती है, और दया से भरे दिल से राष्ट्रिक घाव भरते हैं। क्योंकि वह आमोद और शांति के स्रोत हैं, तब जनसमूह भी एक साथ मिलकर परमेश्वर की महानता का गुणगान करता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

1) परमेश्वर की प्रसन्नता और देश के पुनःस्थापन का संदेश—कृतज्ञता न केवल व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि समुदाय के एकत्रित आराधना का स्वर बनता है।

2) बंधुवाई से लौटना—तीर्थ यात्राओं के बाद नया जीवन, आत्मिक स्वतंत्रता और स्वर्गीय आशा का उद्घोष, जो समुदाय को एक नया दायित्व देता है कि वे परमेश्वर के वचन में दृढ़ रहें।

3) दया और सत्य का संगम—भजनकार संकेत करता है कि दया और सत्य मिलकर शांति और स्थिरता लाते हैं, और यह प्रमुख कारण है कि भजन का स्वर प्रवाहित रहता है।

अन्य बाइबल अंशों से सम्बंध

  • यशायाह 54:11-14 — दर्द के घावों के बीच भी परमेश्वर की दया से स्थिरता मिलती है; यह भजन में लौटने की आशा से मेल खाता है कि दुख के बाद शांति आती है।
  • यहोशू 21:43-45 — परमेश्वर के वचन के साथ राज्य की स्थापना, प्रभु की कृपा के साथ हर दान सत्य हो जाता है; यह भजन के देश-के-संस्थापन के विचार से संगत है।
  • 2 क्रॉनिकल 7:14 — आत्म-परिवर्तन और प्रार्थनात्मक सामुदायिक याचना अगरधर की कृपा से ही संभव है; भजनकार भी उसी ध्वनि-नाद से प्रेरित होता है।

व्यावहारिक आवेदन

- कठिन वक्त के बाद भी आशा बनाए रखना सीखें: संकट के बीचाओं में भी परमेश्वर की दिशा और प्रकाश दिखता है।

- समुदायिक आराधना में एक साथ जुड़ना: मिलकर प्रभु की महिमा स्वीकार करना और एक-दूसरे के लिये दया के साथ खड़े रहना।

संक्षेप

भजन संहिता 85:1 राष्ट्र-स्तर पर उद्धार की स्मृति को पुनर्जीवित करता है—परमेश्वर ने देश को पुनःस्थापित किया है; यह भजन दया, सत्य और शांति के साथ संवेदनशील एकता की मांग करता है। इसका लक्ष्य है कि विश्वासी समुदाय प्रभु के करुणामय दिल का प्रतिनिधित्व करे और एक नवीन आराधना में ईश्वर की महानता का गुणगान करे।

संकेत-जोड़

Cross-reference विचार: यशायाह 55:6-9 (कृपा-आखेट के लिये तत्परता), धर्मशास्त्र-समझ के मुताबिक परमेश्वर की दया समय अनुसार मिलती है; रोम 12:12 (हृदय में आशा रखकर प्रार्थना और धीरज) यह भजन-उद्धार की निरंतर धारा से जुड़ते हैं.

महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से शीर्ष-उद्धरण उपलब्ध नहीं होने पर भी उनकी प्रवृत्ति के अनुसार सारगर्भित निष्कर्ष शामिल किये गए हैं—"दया और सत्य मिलकर शांति बनाते हैं" जैसी धारणा इन पंक्तियों में समाहित रहती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 85:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“यहोवा कहता है: मैं याकूब के तम्बू को बँधुआई से लौटाता हूँ और उसके घरों पर दया करूँगा; और नगर अपने ही खण्डहर पर फिर बसेगा, और राजभवन पहले के अनुसार फिर बन जाएगा।

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“क्या प्रभु युग-युग के लिये मुझे छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्‍न न होगा?

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