भजन संहिता 85:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तूने अपने रोष को शान्त किया है; और अपने भड़के हुए कोप को दूर किया है।

भजन संहिता 85:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 85:3 पर टिप्पणी — context में दृष्टि

यह पद भजनकार की प्रार्थना के प्रकाशन/नवीकरण के साथ जुड़ा है: परमेश्वर ने अपने लोगों के पाप के कारण उनके सन्निकट बने रोष को शान्त किया है और उनके कोप को दूर किया है। संदर्भ में भजन 85 परमेश्वर की दया और सत्य की व्यवस्था के पुनःस्थापन के लिए प्रार्थना का एक गीत है, जो देखता है कि परमेश्वर अपने लोगों के अपराधों के बाद फिर से कृपा और शांति की स्थिति स्थापित कर देता है। यह पंक्ति विशेष रूप से बल देती है कि परमेश्वर का रोष क्षणिक है और उसका प्रेम गहरी, स्थायी राहत देता है।

मुख्य विचार (Central Meaning)

यह पद दो पहलुओं को उजागर करता है: पहला, परमेश्वर ने अपनी क्रोध-रोष को शांत किया है; दूसरा, उसने आफ्नो कोप को दूर किया है। इसका मतलब यह है कि दोष के परिणाम—यानी विभाजन, संदेह और भय—अब पीछे छूट गये हैं, क्योंकि परमेश्वर के साथ फिर से मेल मिला है और उसकी कृपा से उद्धार की उम्मीद बनी है। यह आत्म-सन्तोष और विश्वास की स्थिति का संकेत है, जिसमें भले ही मानवता के पापों का प्रभाव पहले दिख रहा हो, परमेश्वर की दया उसे पुनः मजबूत बनाती है।

दो-तीन प्रमुख विषय (Key Themes)

  • परमेश्वर की कृपा बनाम उसका कोप: भजनकार बताता है कि कोप के बाद भी परमेश्वर की करुणा अधिक स्थिर है; विश्वासियों के लिए आशा की कुंजियाँ यही होती हैं कि कोप शांत हो सकता है जब पाप के परिणाम पर पछतावा होता है।
  • विश्वास की पुनःस्थापना: शान्ति का अनुभव तब होता है जब पश्चाताप और ईमानदारी से परमेश्वर की ओर कदम बढ़ते हैं।
  • नीतिगत प्रेम और पश्चाताप के साथ राहत: भजनकार यह दिखाते हैं कि शांती केवल बाहरी स्थिति नहीं, आत्मिक बदलाव का परिणाम है जो परमेश्वर की उपस्थिति में आता है।

अनुशीलित cross-references (Cross-References)

1) कश्मीरी भागों में दिल की शांति के लिए: रोम 5:1 से प्रेरणा मिलती है कि व्यवस्था के बाद शांति न केवल स्थिति बल्कि आत्मा की स्थिरता है।

2) भक्ति में पुनःस्थापना: यशाय 54:10 बताता है कि पृथ्वी के पहाड़ हिलेंगे लेकिन परमेश्वर की वाचा नहीं टूटी; इसलिए विश्वास की स्थिति पुनःस्थापना योग्य है।

3) कृपा का पुनर्निर्माण: 2 कुरिन्थियों 5:17 में कहा गया है कि जो मसीह में है, नई सृष्टि है; पुरानी बातें निकल गयीं, देखिए सब कुछ नया हो गया है।

व्यावहारिक विचार (Practical Reflection)

हम अपनी जिंदगी में तब शांति अनुभव कर सकते हैं जब अपने घृणा और क्रोध को छोड़कर परमेश्वर के सामने सचेत पश्चाताप करें। यह पंक्ति प्रेरणा देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की दया हमारे भीतर की उथल-पुथल को शांत कर सकती है—यदि हम उसकी कृपा के अनुसार व्यवहार करें और विश्वास बनाए रखें।

संक्षिप्त निष्कर्ष (Brief Closing Summary)

भजन संहिता 85:3 दिखाती है कि परमेश्वर ने अपने रोष को शांत किया है और उनके कोप को दूर किया है, जिससे विश्वासियों के लिये शांति और नई आशा का मार्ग खुलता है। यह संदेश संकेत देता है कि पाप के परिणामों से मुक्त होकर हम परमेश्वर की निष्ठा और दया में नयी जिंदगी जी सकते हैं।

नोट्स (Quotations from Early Commentaries)

यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के ऐतिहासिक चिंतन से समेकित किया गया है। नीचे उनके पारंपरिक संकेतों के शाब्दिक अंश नहीं दिए जाते, पर उनके देखे हुए दृष्टिकोण का समेकित सार प्रस्तुत किया गया है:

• Henry के अनुसार: परमेश्वर की शान्ति वह ढाल है जो भक्त के मन में डर को नहीं रहने देती।

• Barnes के अनुसार: कोप शांत होकर क्रोध से राहत मिलती है जब पाप का पश्चाताप होता है और विश्वास गहरा होता है।

• Clarke के अनुसार: दया पूर्णता से समर्थित है—परमेश्वर की स्पष्ट कृपा के कारण भय दूर होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 85:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और कोई सत्यानाश की वस्तु तेरे हाथ न लगने पाए; जिससे यहोवा अपने भड़के हुए कोप से शान्त होकर जैसा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाई थी वैसा ही तुझ से दया का व्यवहार करे, और दया करके तुझको गिनती में बढ़ाए।

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भजन संहिता 106:23 (HINIRV) »
इसलिए उसने कहा कि मैं इन्हें सत्यानाश कर डालता यदि मेरा चुना हुआ मूसा जोखिम के स्थान में उनके लिये खड़ा न होता ताकि मेरी जलजलाहट को ठण्डा करे कहीं ऐसा न हो कि मैं उन्हें नाश कर डालूँ।

भजन संहिता 78:38 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 78:38 (HINIRV) »
परन्तु वह जो दयालु है, वह अधर्म को ढाँपता, और नाश नहीं करता; वह बार-बार अपने क्रोध को ठण्डा करता है, और अपनी जलजलाहट को पूरी रीति से भड़कने नहीं देता।

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