भजन संहिता 85:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर, हमको पुनः स्थापित कर, और अपना क्रोध हम पर से दूर कर*!

भजन संहिता 85:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 85:4 का तत्कालीन संदर्भ और संदेश

पद यह एक इकबाल है जो परमेश्वर के लोगों के बीच उद्धार और पुनःस्थापना की मांग करता है। उस समय ईश्वर की प्रार्थना है कि वह अपने चुणे हुए राज्य को पुनर्जीवित करे और उनका क्रोध दूर करे। यह भजन संहिता एक खुले दिल से लगे हुए विश्वास और पुनःस्थापना की आशा को प्रकट करता है, जिसमें प्रभु परमेश्वर के अनुग्रह के कारण ही संकट के बादल छँटते हैं।

ईश्वर के बारे में प्रकाश और विश्वास का संदेश

यह पद स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ही उद्धारकर्ता और पुनःस्थापना का कारण हैं। भक्ति और प्रार्थना के साथ, विश्वासियों के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर अपने आप उद्धार और शांति देता है, न कि मानव गरिमा से। साथ ही यह बतलाता है कि God’s anger दो प्रकार के अनुभव दे सकता है—कठोर चेतावनी और फिर विनय–कृपा।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या

  • पुनः स्थापित करना – पूर्व स्थिति में कमजोर या बिखर गई स्थिति को पुनः मजबूत और संगठित करना। यह भक्तों के समुदाय के लिए साझा उद्धार का आश्वासन है।
  • अपना क्रोध दूर कर – परमेश्वर के चिढ़ने के भाव को कम करना, ताकि उनके लोग शांति और संतोष अनुभव कर सकें। यह क्षमा और कल्याण की दिशा में संकेत है।

सापेक्ष मार्गदर्शक प्रमुख passagem

कुछ संबंधित गद्य-उद्धरण इस प्रकार हैं जो इस भाव को आगे बढ़ाते हैं:

  • भजन 80:7—“कृपया हमें फिर से उगाए, हे परमेश्वर… और हमारा उद्धारकर्ता बना।”
  • न्यास 2:4—“यहोवा के_day परम सत्य का राज्य स्थापित होगा।”
  • नीतिसूत्र 3:31—“तू अपने परमेश्वर के साथ बल और विश्वास में चल।”

कक्षा और प्रचलित अनुवाद के साथ व्याख्या

यह संदेश हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची पुनःस्थापना परमेश्वर के हाथों में है और हमारी भागीदारी केवल विनती, आत्म-स्वीकृति और विश्वास से है। भक्ति-संयम, नम्रता, और आपसी क्षमा के साथ, समुदाय आम तौर पर फिर से एक स्वस्थ दिशा में लौट सकता है।

आज की उपयोगिता

आज के पाठक इस verse से यह सीख लेते हैं कि संकट के समय भी ईश्वर की कृपा से आशा बना रह सकता है। शिकायतों के बीच Praises का चयन करना, एक-दूसरे के लिए क्षमा और सहयोग बनाए रखना, और प्रार्थना की निरंतरता बनाए रखना—ये सब उसी पुनःस्थापन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करते हैं।

सूक्ष्म cross-references

  • यशायाह 57:15 — परमेश्वर जो ऊँचाई में रहता है, और जो नम्र आत्मा के साथ रहते हैं, उन्हें जीवन देता है। यह बतलाता है कि परमेश्वर दयालु और कोमल भी है।
  • भजन 126:4 — हमारा उद्धारकर्ता फिर से लौट आए; तब हम दुख के बदले आनंद पायेंगे।
  • नीतिसूत्र 28:13 — जो अपने पाप को छिपाता है, वह नहीं बचता; परन्तु जो उसे उगले और नम्रतापूर्वक विश्वास करता है, वह उद्धार पाएगा।

इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पुनःस्थापना के लिए ईश्वर-आग्रह, आत्म-स्वीकृति और समाज-निर्माण आवश्यक हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 85:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 80:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 80:3 (HINIRV) »
हे परमेश्‍वर, हमको ज्यों के त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा!

भजन संहिता 80:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 80:7 (HINIRV) »
हे सेनाओं के परमेश्‍वर, हमको ज्यों के त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा।

भजन संहिता 25:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 25:2 (HINIRV) »
हे मेरे परमेश्‍वर, मैंने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएँ।

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