भजन संहिता 37:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दाऊद का भजन कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करनेवालों के विषय डाह न कर!

भजन संहिता 37:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 37:1 — संदर्भ में परिचय

इस व verse में दाऊद चेतावनी देते हैं कि कुकर्मियों के कारण मन को मत विचलित/उसी में धैर्य खोना चाहिए और उनके साथ प्रत्यक्ष डाह नहीं करना चाहिए। यह psalmic कविता उन कठिन परिस्थितियों में है जब नीचे की जाति पर अन्य लोग अत्याचार करते हैं या विपरीत परिस्थितियाँ बनती हैं। दाऊद צדक रूप से बताता है कि परमेश्वर का सावधानतापूर्ण राजा-सा मार्ग ही शांति और स्थिरता लाता है; न्याय और विश्वास के मार्ग पर टिके रहने से मानव अंतःकरण शांत रहता है।

मुख्य विचार: दाऊद का exhortation

भजन 37:1 में ‘कुकर्मियों के कारण मत कुढ़’ कहना यह है कि ईश्वर के लोग अपने दुश्मनों की गतिविधियों से प्रेरित होकर अपने नैतिक धैर्य और विश्वास को न गंवाएं। कुटिल कर्म करने वालों की सफलता देख कर भी मन को क्रोध या डाह से उथल-पुथल नहीं होना चाहिए; बल्कि परमेश्वर के न्याय के समय पर भरोसा करना चाहिए। यह जीवन के प्रति एक स्थिर, भक्तिमय रवैया सिखाता है।

केंद्रीय विषय (two–three themes)

  1. दाऊद हमें इतना स्मरण कराते हैं कि समय के साथ परमेश्वर न्याय करेगा; धैर्य बनाए रखना ईमानदारी से जीवन जीने की कुंजी है।
  2. प्रत्यक्ष या मन-चाह के कारण दूसरे के भाग्य पर ईर्ष्या करना भीतर के उद्ध्वल को बढ़ाता है; इसके बजाय आस्था से आगे बढ़ना बेहतर है।
  3. यह अध्याय बताता है कि परमेश्वर के न्याय की परेड समय-अनुसार रहती है, इसलिए हम तुरंत परिणाम न चाहें।

संदर्भित पठन-सम्बन्धी अंश

यह हिस्सा अन्य स्थानों से भी जुड़ता है जहाँ धैर्य और विश्वास की परीक्षा बताई गई है:

  • भजन संहिता 37:7 — निष्क्रिय होकर परमेश्वर के साथ शांति बनाए रखना; क्रोध न करना।
  • नीतिवचन 24:19 — दुष्टों के कारण ईर्ष्या न होने की शिक्षा, बल्कि धीरज और विश्वास की राह पकड़ना।
  • रोमियों 12:19 — ईश्वर को न्याय के लिए स्थान छोड़ना, स्वयं का बदला लेने से पहले उन्हें साक्षात्कार करना।

इन Cross-References में एक साथ दिया गया संदेश यह है कि परमेश्वर पर भरोसा तब ही मजबूत होता है जब मानव विकट परिस्थितियों में भी अपने आचरण को शुद्ध बनाए रखे।

व्यावहारिकReflection

जीवन में जब लोग कान-कान बातों में सफल होते दिखते हैं, तब भी अपने आचरण को काइयां रखने की कोशिश करें। अपने नैतिक लक्ष्य, और परमेश्वर के निर्देश पर टिके रहें। यदि क्रोध उभरे, तब गहरी साँस लें, भजन-उच्चारण करें, और ईश्वर से सहायता माँगें। इससे भीतर शांति बनी रहती है और निर्णय स्पष्ट होते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 37:1 कहता है—कुकर्मियों के कारण मत कुढ़ो; डाह से बचो। यह सतर्कता नहीं, बल्कि विश्वास और धैर्य कीड़ी है। परमेश्वर के न्याय के समय-क्रम को स्वीकारते हुए, शांत मन से सत्य-जीवन जीना ही परमेश्वर-आर्दश के अनुकूल है।

छोटो cross-reference उल्लेख

1) भजन 37:7 — शांत रहें, और प्रभु की सहायता पर निर्भर रहें। 2) नीतिवचन 24:19 — दुष्ट से ईर्ष्या न करें, पराक्रम से अलग रहें। 3) रोम 12:19 — अपने आप को न डालें विवेकहीन बदला लेने में।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 37:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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