भजन संहिता 37:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

विपत्ति के समय, वे लज्जित न होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे।

भजन संहिता 37:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 37:19—स्थितिप्रकटन

विपत्ति के समय, वे लज्जित न होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे।

कथन का तात्परिक सेटिंग

यह भजन में परमेश्वर के विश्वसनीय भरोसे पर दृढ़ आश्रय लेने की स्मृति देता है। शास्त्री लोग इसे दुष्कालों में ईमानदार के लिए सुरक्षा और सतत आहार के प्रतिफल के रूप में समझते हैं। विपत्ति और अकाल—यानी कठिन समय और आवश्यक संकट-स्थिति—के बीच भी परमेश्वर के लोग नहींं हतोत्साहित होते; वे न लज्जित होते हैं न भूखे रहते हैं, बल्कि उनकी आवश्यकता में भी परमेश्वर की कृपा सक्रिय रहती है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से क्या उभरता है

- परमेश्वर की विश्वासयोग्यता: कठिन समय में भी वह अपने भक्तों की देखभाल करता है और उनके पक्ष में रहता है।

- आत्म-विश्वास बनाम भय: विपत्ति के बीच भी विश्वासियों के पास स्थिरता और संतोष होता है, क्योंकि उनकी रोशनी परमेश्वर की कृपा से आती है।

महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता

  • विपत्ति के समय—जीवन के कठिन दौर, जिसकी चुनौती में सांसारिक सुरक्षा कमजोर पड़ती है।
  • लज्जित न होंगे—शुभ-निर्णय और नैतिकता में पीछे न हटना; परमेश्वर के साथ उनकी पहचान बनी रहती है।
  • अकाल के दिनों—भूख-मिटाने वाले समय, रोटी-बासी जैसी καθημεριν आवश्यकताओं की कमी।
  • तृप्त रहेंगे—आत्मिक और आवश्यक खाते-पीते के साथ संतुष्टि; परमेश्वर की कृपा से सतोष।

संबद्ध पवित्र ग्रंथ के cross-references

1) स्रोत के समान विश्वास की आस्था के लिए योहन्ना 6:35 का संकेत: ईसा मसीह कहते हैं, मैं जीवन की रोटी हूँ; जो मेरे में रहता है, वह कभी भूखा नहीं रहेगा। यह संकेत करता है कि परमेश्वर के साथ संबंध ही वास्तविक तृप्ति है।

2) फिलिप्पियों 4:19—प्रभु वही पूरे आवश्यकताओं को अपनी महिमामय दिशा में पूरा करेंगे; यह दर्शाता है कि संकट के समय भी प्रभु की विस्तार और स्थिति में संतोष आता है।

3) भजन 34:10—जो भक्त हैं, उन्हें न भूखा रहना पड़ेगा; प्रभु उन सभी की रक्षा करते हैं।

क्या यह आज के दिन हमें कहता है?

- कठिन时期 में भी ईश्वर पर भरोसा बनाए रखें; उनका सामर्थ्य आपके आवश्यक वस्तुओं से आगे है।

- भय के बिना विश्वास के साथ जीवन की रोजमर्रा की कठिनाइयों का सामना करें; लज्जित होना नहीं, बल्कि प्रभु की कृपा से समर्थ रहना है।

संयुक्त व्याख्या — एक संक्षिप्त सार

विपत्ति के समय ईश्वर अपने लोगों को सुरक्षा देता है और अकाल के दिन भी उनकी तृप्ति बनी रहती है, क्योंकि उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति परमेश्वर की विश्वसनीय कृपा से होती है। यह पाठ बताता है कि ईमानदारी और विश्वास एक ऐसी आंतरिक आश्रय प्रदान करते हैं जो भौतिक असुरक्षा के बावजूद टिकाऊ रहता है।

योगदान

Matthew Henry (संक्षेप): कठिन समय में विश्वास और धैर्य से आगे बढ़ना चाहिए; परमेश्वर के साथ स्थिर संबंध नैतिकता की रक्षा करता है।

Albert Barnes (संक्षेप): ईश्वर की देखरेख में रहने पर भूख या शर्म का भय नहीं रहता; उनकी कृपा सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है।

Adam Clarke (संक्षेप): सत्य यही है कि परमेश्वर भक्तों को उनकी जरूरत से अधिक नहीं डालता; वे संतुष्ट रहते हैं, क्योंकि उनकी आशा प्रभु में है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 37:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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