भजन संहिता 37:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह तो दिन भर अनुग्रह कर-करके ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है।

भजन संहिता 37:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 37:26 — संदर्भात एक आशीर्वादजनक चित्र

यह पद भक्तजन से जुड़ी एक स्थिर, विश्वसनीय धारणाओं को सामने लाता है: ईश्वर एक प्रिय और धीरजपूर्ण संरक्षक हैं जो निरंतर कृपा करते रहते हैं। यहाँ कहा गया है कि वह “दिन भर अनुग्रह कर-करके ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है।” यह बताता है कि दयालु, स्थिर प्रभु के कार्य का मर्म क्या है: उनकी कृपा हर दिन, हर समय उपलब्ध है और यह आने वाले पीढ़ियों के लिए आशीष बनकर रहती है।

ईश्वर के बारे में साक्ष्य जो इस पाठ से उभरते हैं

यह पाठ ईश्वर की सेवाभावी प्रवृत्ति को केंद्र में रखता है—उनका धैर्य, निरंतरता और करुणा। भजनकार एक विश्वासयोग्य व्यक्ति के अनुभव को प्रकट करता है कि परमेश्वर न केवल क्षणिक मदद देते हैं, बल्कि जीवनभर के लिए ऋण-सीता करुणा बाँटते हैं, ताकि वंश उनकी कृपा से लाभ पाते रहें। यह चित्र ईश्वर की विश्वसनीयता, स्थायित्व और बंधुत्व को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता

  • अनुग्रह कर-करके— बारम्बार, बिना थके, प्रेम-पूर्वक सहायता देना; इसका आशय है कि ईश्वर हर परिस्थिति में कृपा का व्यक्त करता रहता है, कभी-कभी हमारी योग्यता के अनुसार नहीं, पर अभिलाषित प्रेम के अनुसार।
  • ऋण देना— यहाँ एक रूपक है कि परमेश्वर अपने आशीर्वादों को हमारे ऊपर अग्रसारित करते हैं, ताकि हम न केवल अपनी जरूरतें पूरी करें, बल्कि दूसरे के लिए भी सक्षम बनें।
  • वंश पर आशीष— यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाला कृपा-चक्र है, जिसमें परिवार, समुदाय और धार्मिक जीवन में ईश्वरीय निवेश का परिणाम दिखाई देता है।

सम्बद्ध बाइबल अंश (संकेतित संदर्भ)

1) भजन संहिता 103:8-12 — ईश्वर की दयालुता, उद्धार और क्षमा बारम्बारता के बारे में।

2) मलाकी 3:10 — यीशु के निवेदन के अनुसार ईश्वर की व्रत-करुणा और आशीष का प्रभाव उन तक सीमित नहीं रहता—उच्चस्थ अन्याय में भी उसकी करुणा बनी रहती है।

3) मत्ती 7:11 — जैसा पिता अपने बच्चों के लिए शुभ वस्तुएं देता है, वैसा ईश्वर भी उन पर आशीर्वाद बरसाते हैं जो उनसे माँगते हैं।

प्रेजेंट-डे एप्लिकेशन

व्यावहारिक दृष्टिकोण से यह पद हमें विश्वसनीयता और धैर्य सिखाता है: जीवन के कठिन समय में भी ईश्वर की नित्य कृपा पर निर्भर रहे। दुर्बलता या ऋण-सीमा की कमी के क्षणों में भी याद रखें कि परमेश्वर के आशीर्वाद का लय-क्रम चिरस्थायी है—यह हमारे और हमारे बच्चों के लिए स्थायी प्रेरणा बन सकता है। साथ ही, हमारी आशीषें दूसरों के लिए भी खुली होनी चाहिए—ताकि समाज में करुणा और साझा-सहायता का चक्र बना रहे।

चित्रणीय सार

ईश्वर वास्तविक, जीवंत साथी है who दिन-भर कृपा बनाये रखते हैं और जो उनके वंश तक बढ़ती रहती है—यह विश्वास का एक स्थिर वचन है कि उनका प्रेम न कभी समाप्त होता है, न ही रुकता।

नोट्स ऑन उद्धरण

उल्लेखित तीन सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों में से अगर कोई वाक्य सीधे उद्धृत होता है, तो यह यहाँ दिखाया गया है:

— Matthew Henry: कुछ स्थानों में “अनुग्रह कर-करके” जैसी भाषा के साथ उनकी धारणा प्रकट होती है कि परमेश्वर की निरंतर कृपा हमारे दैनिक जीवन के व्यावहारिक हिस्सों को ढालती है।

— Albert Barnes: कृपा और आशीर्वाद के क्रम को परिवारों पर फैलाने की उसकी समझ सामान्य रूप से ईश्वर के वचनों के अनुरूप है।

— Adam Clarke: आशीष का “वंश पर” प्रभाव, पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैला हुआ परिणाम, Clarke की टिप्पणियों में अक्सर नैतिक-धार्मिक विरासत पर केंद्रित है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 37:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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