भजन संहिता 37:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

बुराई को छोड़ भलाई कर; और तू सर्वदा बना रहेगा।

भजन संहिता 37:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 37:27 का स्पष्ट अर्थ

इस पद का स्पष्ट संदेश है: जो बुराई छोड़कर善ी कर लेता है, वही स्थिति में आता है कि ईश्वर उसे बने रहने का आशीर्वाद देता है। सत्यान्वेषी जीवन की राह पर चलना—जो नास्तिक नहीं, बल्कि सत्य और अच्छाई से भरी हो— वही दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता प्राप्त करता है।

पृष्ठभूमि एवं संदर्भ

भजन संहिता 37 समूचे त्योहार-राजजीव के विरूद्ध नहीं, बल्कि ईश्वर की सत्ता और बुराई से जीत की आशा पर केन्द्रित है। यह मौन, धैर्य और विश्वास के साथ बुराई का सामना करने की प्रेरणा देता है। भजनकार यहाँ दिखाता है कि अधर्मी सफलता पाते दिखने पर भी, डर सके नहीं; बल्कि समय-समय पर अपने मार्ग को छोड़कर ईश्वर की राह पर चलना चाहिए।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • व्यक्तिगत परिवर्तन: “बुराई छोड़” का तात्पर्य है इरादे और व्यवहार में फर्क, जिसमें है पीछे हटना और सत्य के अनुरूप जीवन जीना।
  • दायित्वपूर्ण आचरण: “भलाई कर” से वह कर्म सामने आते हैं जो दूसरों के लाभ के लिए हों और ईश्वर की इच्छा के अनुरूप हों।
  • स्थिरता की गारंटी: “तू सर्वदा बना रहेगा” का आश्वासन ईश्वर के संरक्षण और निरंतरता के बारे में है; जो सही रास्ते पर चलता है, उसे टिके रहना संभव होता है।

महत्वपूर्ण विचार

  1. निराशा में आशा: उलझन और अन्याय के बीच भी विनम्रता और धैर्य बनाए रखना चाहिए।
  2. न्याय के साथ कृतज्ञता: हर अच्छाई ईश्वर के कारण है; इसलिए भलाई के कर्मों में ईश्वर की+mहिमा दिखे।
  3. निगरानी का संकेत: कर्मों की निगरानी और आत्म-सत्यापन आपको बुरे रास्तों से बचाता है।

संबद्ध स्थलों के निष्कर्ष-चिह्न

1) पवित्रता और धैर्य की प्रतिज्ञा — उदाहरणतः अन्य भजन जहाँ ईश्वर की प्रतिज्ञा स्थायित्व का आधार है।

2) न्याय और करुणा का संतुलन — भलाई केवल खुद के लिए नहीं, दूसरों के लिए भी है।

3) आचरण और आशीर्वाद का संबंध — सही मार्ग पर रहने से ईश्वर का संरक्षण मिलता है।

अनुमनित पुराने टिप्पणीकारों से संयोगित निचोड़

Matthew Henry और Albert Barnes ने यह संकेत किया है कि बुराई छोड़कर善ी कर लेने से व्यक्ति की दशा उन्नत होती है और ईश्वर की कृपा लगातार साथ रहती है। Adam Clarke ने संकेत किया कि यह क्रमिक परिवर्तन है—अव्यवस्था से सुगम जीवन की ओर वृद्धि—जो विश्वास में दृढ़ता देता है (संस्कृत में संक्षेप: “बुराई छोड़” से मति रूपांतरण, “भलाई कर” से कर्म का सञ्चित परिणाम)।

यद्यपि इन आधुनिक पाठों के शब्द सीधे उद्धृत नहीं हैं, पर इन प्राचीन टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि यह पद आचरण-परिवर्तन पर जोर देता है जिससे विश्वासयोग्य जीवन स्थिर और सुरक्षित बनता है।

छोटा संदर्भ-यात्रा

- अन्य संदर्भ: परमेश्वर के राज्य के लिए धैर्य और न्याय; - द肖य के नियमों के अनुरूप जीवन; - क्रोध-घृणा के बजाय प्रेम का व्यवहार।

व्यावहारिक निष्कर्ष

आज भी यह उपदेश उपयोगी है: किसी भी परिस्थितियों में बुराई को न अपनें; सत्य और प्रेम के कर्म करें; और विश्वास रखें कि ईश्वर निरंतर मार्गदर्शन दे रहा है। इससे जीवन में स्थिरता और आशीष बनी रहती है।

Cross-reference- नोट्स: नीचे तीन संकेतक संदर्भ हैं जिनमें इस विचारधारा का मिलान मिलता है—(1) क्रिया से पूर्व विचार: ईश्वर-आज्ञा के अनुरूप निर्णय; (2) दया और न्याय का संतुलन; (3) दीर्घकालिक सुरक्षा का आश्वासन।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 37:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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