भजन संहिता 148:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो!

भजन संहिता 148:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 148:3 — संदर्भ और तात्पर्य

पद के तत्काल सेटिंग में यह चमत्कारपूर्ण आह्वान भजन का एक प्रोत्साहक प्रोत्साहन है, जिसमें आकाश, सूर्य, चन्द्रमा और ज्योतिमय तारों को आत्मिक तौर पर परमेश्वर की स्तुति करने के लिए बुलाया गया है। इस अध्याय 148 में सृष्टि के सभी हिस्सों को एक साथ उठकर प्रभु की महिमा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है—आकाश, पृथ्वी, समुद्र और सब जीवित प्राणी।

ईश्वर या आस्था के बारे में पाठ से जो खुलासा होता है

यह पाठ बताता है कि परमेश्वर ही वह केन्द्रीय सत्ता है जिसकी संपूर्ण सृष्टि अभिवादन करती है। वह एक सुसंगत, समावेशी राज है जिसे हर प्राणी और हर स्रोत स्वीकार करता है। सांकेतिक रूप से सूर्य चन्द्रमा और तारों के ज़रिये उस महान प्रभु की महिमा का प्रकाश फैलता है, जो सृष्टि के नियमों और समय-सारिणी का सैकड़ों वर्षों से प्रवर्तक है। यह भजन बताता है कि परमेश्वर का आचार, उसकी महिमा और उसकी शक्ति सभी सृष्टि के हर कोने तक पहुँची रहती है; इसलिए विश्वासियों को भी सामूहिक गवाही में शामिल होना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या

  • — प्रभु की रचना की बाहरी रोशनी का द्योतक। यह साधारण प्रकाश नहीं, बल्कि उसकी कृपा, ऊर्जा और नियंत्रण की प्रतिच्छाया है।
  • — आकाशीय निकाय जो ब्रह्मांड के अनगिनत रंगों, समय और गति को दर्शाते हैं। इन सबका परमेश्वर के शासन के अधीन होना दर्शाता है कि ईश्वर की शक्तियाँ एक संग्रथित, व्यवस्थित व्यवस्था में बंधी हैं।

संबद्ध पाठ (छोटे संदर्भ, संक्षेप में)

हर एक निर्मित वस्तु की स्तुति का आह्वान अन्य जगहों पर भी मिलता है—यहोवा की रचना का पुकारना, जब प्रकृति उसकी महिमा के गान में सहभागी बनती है (उदा. भज 19:1; भज 103:22). साथ ही, पवित्रता और सामंजस्य के संदेश के साथ, भजन 147:7–11 में परमेश्वर की स्तुति और उसकी कृपा के आवेदन का संयोजन मिलता है।

वर्तमान संदर्भित अनुप्रयोग

आज के उपासना-जगत में यह पद हमें याद दिलाता है कि हमारी सामान्य गतिविधियाँ—दिन-रात, प्रकाश-छाया, सम्मिलन और सुंदरता—सब परमेश्वर की महिमा के लिए बनाए गए हैं। हम एक समुदाय के रूप में प्रकृति की सुन्दरता के ऊपर उसकी स्तुति करते हैं, परंतु व्यक्तिगत स्तर पर भी यह प्रेरणा देता है कि हमारा जीवन प्रकृति के साथ-साथ उसकी प्रचुर कृपा के लिए एक गान बने। दैनिक नियमों में, हम अपने परिवेश के हर स्रोत के प्रति कृतज्ञता और सम्मान दिखाते हैं—सूर्य की रोशनी से लेकर आकाशीय तारों तक।

कौर संदर्भ

1) भजन 19:1— आकाश की गवाही परमेश्वर की महिमा बखानती है; 2) भजन 103:22— सभी चर, प्रकृति और रचनात्मक क्रम पूरी तरह उसकी स्तुति करते हैं; 3) रोम 1:20— प्रकृति के प्रभाव से परमेश्वर की अकल्पनीय शक्तियों की पहचान संभव है।

इस पाठ का सार यह है कि सभी-कुछ, जो दिखाई देता है या नहीं दिख पाता, परमेश्वर के दिव्य शासन के साथ जुड़ा हुआ है। हमें अपनी दिनचर्या में प्रकृति के साथ ईश्वर की महिमा को देखते हुए उसकी स्तुति में भागीदारी करनी चाहिए, और एक ऐसी ज़िंदगी बनानी चाहिए जो आकाश के उन मार्गों की तरह पवित्र और संगत हो.

उद्धृत उद्धरण (केवल संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke में से सीधे पाठ का पूर्ण उद्धरण यदि उपलब्ध होंगे, तो वे यहाँ छोटे-छोटे उद्धरण के रूप में जोड़े जा सकते हैं—परन्तु पूर्ण पाठ नहीं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 148:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रधान बजानेवाले के लिये दाऊद का भजन आकाश परमेश्‍वर की महिमा वर्णन करता है; और आकाश मण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट करता है।

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फिर परमेश्‍वर ने कहा, “दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियों हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों;

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अब से जब तक पृथ्वी बनी रहेगी, तब तक बोने और काटने के समय, ठण्डा और तपन, धूपकाल और शीतकाल, दिन और रात, निरन्तर होते चले जाएँगे।”

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